वाराणसी के किशोर न्याय बोर्ड का फैसला, अपचारी किशोर को जमानत
वाराणसी: बड़ा लालपुर लमही क्षेत्र स्थित किशोर न्याय बोर्ड ने एक संवेदनशील प्रकरण में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए अपचारी किशोर को जमानत प्रदान की है। थाना मंडुवाडीह से संबंधित मुकदमा अपराध संख्या 328 2025 में भारतीय न्याय संहिता की धारा 137 2, 87 तथा पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था। इस प्रकरण में बोर्ड ने 24 फरवरी 2026 को सुनवाई के उपरांत अपचारी किशोर को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। आदेश में बोर्ड ने प्रकरण की प्रकृति और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए विधिक प्रावधानों के अनुरूप विचार किया।
उम्र और सामाजिक पृष्ठभूमि पर विचार
किशोर न्याय बोर्ड ने अपने विस्तृत आदेश में अपचारी किशोर की आयु, पारिवारिक पृष्ठभूमि, सामाजिक परिवेश और भविष्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का परीक्षण किया। बोर्ड ने यह माना कि किशोर न्याय अधिनियम की मूल भावना सुधार और पुनर्वास पर आधारित है। आदेश में उल्लेख किया गया कि अपचारी किशोर को लंबे समय तक निरुद्ध रखने की अपेक्षा उसे अभिभावक की निगरानी में सौंपना अधिक उपयुक्त होगा। बोर्ड ने यह भी निर्देशित किया कि उसे उसके संरक्षक पिता की सुपुर्दगी में दिया जाए तथा निर्धारित शर्तों का पालन सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही समय समय पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत होने का निर्देश भी दिया गया।
अधिवक्ताओं की पैरवी पर चर्चा
मामले में अधिवक्ता श्रीकांत प्रजापति, अधिवक्ता विनोद यादव और अधिवक्ता धनंजय साहनी ने अपचारी किशोर की ओर से पक्ष रखा। न्यायालय के समक्ष यह तर्क दिया गया कि किशोर न्याय प्रणाली का उद्देश्य दंडात्मक नहीं बल्कि सुधारात्मक है। अधिवक्ताओं ने पारिवारिक परिस्थितियों और संरक्षण की आवश्यकता का उल्लेख करते हुए जमानत का अनुरोध किया। बोर्ड ने आदेश में किशोर के आचरण और सामाजिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए यह माना कि उपयुक्त संरक्षण और मार्गदर्शन उपलब्ध होने पर उसके पुनर्वास की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
किशोर न्याय प्रणाली की भावना
कानूनी जानकारों के अनुसार यह आदेश किशोर न्याय व्यवस्था के उस सिद्धांत को रेखांकित करता है, जिसमें सुधार और पुनर्वास को प्राथमिकता दी जाती है। बड़ा लालपुर लमही स्थित किशोर न्याय बोर्ड का यह निर्णय वाराणसी में किशोर मामलों की सुनवाई के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। आदेश से यह स्पष्ट होता है कि न्यायालय ने प्रकरण की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाया और विधिक प्रावधानों के अनुरूप निर्णय दिया।
इस फैसले के साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि अपचारी किशोर पर न्यायालय की निगरानी बनी रहे और निर्धारित शर्तों का पालन किया जाए। प्रकरण की अगली सुनवाई नियत तिथि पर होगी। न्यायालय के इस आदेश को वाराणसी में किशोर न्याय प्रक्रिया के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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