रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ धाम में बटुक से कथित मारपीट, पुलिस जांच के आदेश
वाराणसी: काशी में रंगभरी एकादशी के अवसर पर बाबा विश्वनाथ धाम में आस्था और उत्सव के बीच उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब एक बटुक के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा कथित मारपीट और अभद्रता का मामला सामने आया। घटना के बाद मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं और बटुकों के बीच नाराजगी देखी गई। मामले को लेकर पुलिस प्रशासन ने जांच और आवश्यक कार्रवाई की बात कही है। रंगभरी एकादशी के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच यह विवाद चर्चा का विषय बना रहा।
परंपरा के तहत निकली पालकी, लाखों श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
शुक्रवार को रंगभरी एकादशी के अवसर पर परंपरा के अनुसार बाबा विश्वनाथ माता के साथ पालकी में सवार होकर गर्भगृह पहुंचे। इससे एक दिन पहले गुरुवार को बाबा पालकी पर सवार होकर मंदिर से लगभग पांच सौ मीटर दूर महंत आवास गौना कराने गए थे। शुक्रवार को गौना कराकर वापसी के दौरान बाबा और माता की पालकी शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। इस दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु सड़कों पर उमड़े। अनुमान है कि दो लाख से अधिक भक्त इस धार्मिक आयोजन में शामिल हुए। भक्त होली खेलते हुए और जयकारे लगाते हुए मंदिर परिसर तक पहुंचे। गर्भगृह में पालकी प्रवेश के बाद परंपरागत रूप से रंगोत्सव भी मनाया गया।
गंगा द्वार पर रोका गया प्रवेश, बटुक से मारपीट का आरोप
आरोप है कि पालकी के गर्भगृह में प्रवेश के बाद पुलिस ने बटुकों और अन्य श्रद्धालुओं को बाहर ही रोक दिया। गंगा द्वार के पास बैरिकेडिंग लगाकर प्रवेश सीमित कर दिया गया। इसी दौरान कतार में खड़े बटुकों ने अंदर जाने की अनुमति को लेकर पुलिस से बातचीत की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कहासुनी बढ़ गई और इसी बीच एक सिपाही ने एक बटुक को थप्पड़ मार दिए। आरोप है कि सिपाही ने लगातार तीन थप्पड़ जड़े और उसके साथ धक्का मुक्की की। इसके बाद मौके पर मौजूद दरोगा ने कथित रूप से बटुक के बाल खींचे और उसे लाइन से बाहर कर बैरिकेडिंग के पीछे कर दिया। बटुक ने खुद को संभालने की कोशिश की, लेकिन उसे दोबारा लाइन में लगने की अनुमति नहीं दी गई। घंटों कतार में खड़े रहने के बावजूद वह दर्शन किए बिना लौटने को मजबूर हुआ।
यह भी आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने बटुक के साथियों के साथ बदसलूकी की। कुछ श्रद्धालुओं का कहना है कि लाइन में खड़ी महिला श्रद्धालुओं के साथ भी धक्का मुक्की हुई। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन घटना के बाद मंदिर परिसर में कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल रहा।
महिला पत्रकार से कथित अभद्रता, मीडिया में नाराजगी
इसी बीच कार्यक्रम की कवरेज कर रही एक महिला पत्रकार के साथ भी कथित अभद्रता का मामला सामने आया है। आरोप है कि मंदिर के गेट नंबर चार पर ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों ने उनसे बदसलूकी की। बीच बचाव करने पहुंचे एक अन्य पत्रकार के साथ भी हाथापाई और थप्पड़ मारने का आरोप लगाया गया है। इस घटना के बाद स्थानीय मीडिया जगत में नाराजगी देखी गई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठी।
डीसीपी का बयान, जांच में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का आश्वासन
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए वाराणसी के डीसीपी गौरव बंसवाल ने कहा कि जिन पत्रकारों के पास पहचान पत्र था, उन्हें रंगभरी एकादशी कार्यक्रम की अनुमति दी गई थी। सभी पुलिसकर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि किसी के साथ बदतमीजी न की जाए। उन्होंने कहा कि यदि बटुक या किसी अन्य श्रद्धालु के साथ मारपीट या अभद्रता की घटना संज्ञान में आती है और जांच में किसी की गलती पाई जाती है तो संबंधित कर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की जांच की बात कही है।
धार्मिक परंपरा और व्यवस्था की चुनौती
रंगभरी एकादशी काशी की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होती है। हालांकि आस्था से जुड़े कार्यक्रमों में संयम और संवेदनशीलता भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस घटना के बाद श्रद्धालुओं और बटुकों के बीच असंतोष देखा गया है। अब सभी की नजर प्रशासन की जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी है, ताकि भविष्य में ऐसे आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सकें।
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