कांशीराम जयंती पर सपा मनाएगी बहुजन समाज दिवस, राजनीतिक सरगर्मी तेज
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन आंदोलन के जनक कांशीराम को लेकर एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी ने 15 मार्च को कांशीराम की 92वीं जयंती के अवसर पर बहुजन समाज दिवस अर्थात पीडीए दिवस मनाने की घोषणा की है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस अवसर पर राज्य के सभी जिला कार्यालयों में कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।
जिला स्तर पर होंगे कार्यक्रम
समाजवादी पार्टी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार कांशीराम की जयंती के अवसर पर पार्टी कार्यालयों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से बहुजन समाज के अधिकारों और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि यह आयोजन बहुजन समाज की एकता और सामाजिक भाईचारे को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
मुलायम सिंह और कांशीराम के समझौते का उल्लेख
अखिलेश यादव ने अपने बयान में पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और कांशीराम के बीच हुए राजनीतिक समझौते का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पहले से ही पीडीए के सभी महापुरुषों का सम्मान करती आई है। पार्टी की ओर से पीडीए के महापुरुषों की सूची में कई प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक नेताओं के नाम शामिल किए गए हैं।
बहुजन समाज के लिए समर्पित था कांशीराम का जीवन
पार्टी के अनुसार कांशीराम ने अपना पूरा जीवन बहुजन समाज के उत्थान और अधिकारों के लिए समर्पित किया था। वर्ष 1992 में उन्होंने मुलायम सिंह यादव के साथ राजनीतिक समझौता किया था। इसके बाद मुलायम सिंह यादव ने इटावा से कांशीराम को लोकसभा के लिए निर्वाचित कराने में सहयोग दिया था। वर्ष 1993 में दोनों दलों के सहयोग से प्रदेश में सरकार का गठन भी हुआ था।
पीडीए महापुरुषों को किया जाएगा याद
समाजवादी पार्टी के अनुसार पार्टी कार्यालयों में पीडीए से जुड़े कई महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि भी मनाई जाती है। इनमें महात्मा गांधी, भीमराव आंबेडकर, राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, चौधरी चरण सिंह, मुलायम सिंह यादव, कांशीराम, बीपी मंडल, कर्पूरी ठाकुर, जनेश्वर मिश्र, ज्योतिबा फुले, शाहू जी महाराज, सावित्रीबाई फुले, अहिल्याबाई होल्कर, संत रविदास, संत गाडगे, शिव दयाल चौरसिया, झलकारी बाई, ऊदा देवी पासी, अवंती बाई लोधी और एपीजे अब्दुल कलाम जैसे नाम शामिल बताए गए हैं।
सपा और बसपा के बीच बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव
सपा द्वारा इस आयोजन की घोषणा के बाद प्रदेश की राजनीति में सपा और बसपा के बीच बहुजन वोटों को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज होने की संभावना जताई जा रही है। हाल ही में बसपा प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी पर कांशीराम सहित अन्य महापुरुषों के सम्मान को लेकर सवाल उठाए थे और सपा की आलोचना की थी।
अब समाजवादी पार्टी द्वारा कांशीराम जयंती पर कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है।
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