जिला अस्पताल की लैब में शराब पीने का वीडियो वायरल, लैब टेक्नीशियन के निलंबन की संस्तुति, तीन संविदाकर्मी हटाए गए
वाराणसी: पंडित दीन दयाल जिला चिकित्सालय की पैथोलॉजी लैब में शराब पीने का वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ आरएस राम ने सख्त कदम उठाते हुए लैब टेक्नीशियन जितेंद्र कुमार के निलंबन की संस्तुति कर दी है। इस संबंध में स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र भेजा गया है। साथ ही वीडियो में दिखाई दे रहे तीन संविदाकर्मियों को भी तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया गया है।
20 सेकंड के वीडियो ने खोली लापरवाही की पोल
बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो करीब 20 सेकंड के दो क्लिप्स के रूप में सामने आया, जिसमें पैथोलॉजी लैब के भीतर टेबल पर शराब के गिलास रखे हुए दिखाई दे रहे हैं और कुछ कर्मचारी वहीं बैठकर शराब का सेवन कर रहे हैं। वीडियो में चार गिलासों में शराब भरी नजर आती है, जबकि एक व्यक्ति पूरे घटनाक्रम को मोबाइल में रिकॉर्ड करता दिखाई देता है। इस घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लैब टेक्नीशियन समेत अन्य की पहचान
जांच में सामने आया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति जितेंद्र कुमार है, जो वर्तमान में लैब टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत था। वह वर्ष 1994 में वार्ड बॉय के रूप में अस्पताल में नियुक्त हुआ था और बाद में पदोन्नति पाकर लैब टेक्नीशियन बना। उसके साथ मौजूद अन्य व्यक्तियों में एक की पहचान राजू के रूप में हुई है, जो संविदा पर पिछले सात वर्षों से पीओसीटी विभाग में तैनात था। हालांकि एक अन्य व्यक्ति की पहचान अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।
लैब के अंदर सिगरेट और खानपान भी नजर आया
वीडियो में यह भी देखा गया कि एक व्यक्ति लैब के फ्रिज को खोलकर कुछ सामान निकालता है और उसे प्लेट में रखकर बैठ जाता है। वहीं कुछ देर बाद एक अन्य व्यक्ति केबिन में सिगरेट जलाता हुआ भी दिखाई देता है। यह पूरा घटनाक्रम उस स्थान पर हो रहा था, जहां मरीजों की जांच के लिए महत्वपूर्ण मशीनें लगी हुई हैं, जिससे इस लापरवाही की गंभीरता और बढ़ जाती है।
प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ आरएस राम ने बताया कि वीडियो भले ही उनके कार्यभार ग्रहण करने से पहले का हो, लेकिन इसमें दर्शाया गया कृत्य पूरी तरह अनुचित और निंदनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की गतिविधियां किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की गई है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल
गौरतलब है कि इसी पैथोलॉजी लैब में इमरजेंसी और ओपीडी के मरीजों की खून की जांच होती है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं के भी सैंपल यहीं जांचे जाते हैं। ऐसे में इस तरह की लापरवाही न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है। प्रशासन अब इस मामले को उदाहरण बनाकर सख्ती बरतने के संकेत दे रहा है।
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