संकट मोचन संगीत समारोह की पहली निशा रही यादगार, साहित्य, संगीत और नृत्य का अद्भुत संगम
वाराणसी में आयोजित संकट मोचन संगीत समारोह 2026 की पहली निशा कला, साहित्य और संगीत के त्रिवेणी संगम से सराबोर नजर आई। हनुमत दरबार में सजे इस प्रतिष्ठित मंच पर देशभर के ख्यात कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत साहित्यिक गतिविधियों से हुई, जिसमें पद्मश्री मालिनी अवस्थी की पुस्तक “चंदन किवाड़” का विमोचन किया गया।
मालिनी अवस्थी की पुस्तक “चंदन किवाड़” का हुआ विमोचन
साहित्य मंच पर आयोजित कार्यक्रम में महंत प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र के साथ व्योमेश शुक्ल, प्रो. विजय नाथ मिश्र, प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल और प्रो. अमित पांडेय की उपस्थिति में “चंदन किवाड़” पुस्तक का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर साहित्य और संगीत के गहरे संबंधों पर भी चर्चा हुई।
पं. राहुल शर्मा की संतूर वादन ने बांधा समां
संगीत की प्रस्तुतियों में पंडित राहुल शर्मा ने संतूर वादन के माध्यम से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने राग गोरख कल्याण में आलाप, जोड़ और झाला प्रस्तुत करते हुए अपनी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इसके बाद राग पहाड़ी की धुन ने वातावरण में अद्भुत शांति और मधुरता घोल दी, मानो पर्वतीय नदियों की कलकल ध्वनि गूंज रही हो। तबले पर पंडित रामकुमार मिश्र ने उनका शानदार साथ दिया।
अंतरराष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी का उद्घाटन
समारोह के अंतर्गत आयोजित अंतरराष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी का उद्घाटन आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन शंखवार ने किया। यह प्रदर्शनी 6 से 11 अप्रैल तक चलेगी, जिसमें 1000 से अधिक चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। इसमें काशी की प्रसिद्ध रामलीला से जुड़े चित्र और पारंपरिक मुखौटे दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
विदुषी विधा लाल की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन
तीसरी प्रस्तुति में प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना विधा लाल ने अपनी प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने अपने गुरु विदुषी सितारा देवी को समर्पित करते हुए शिव स्तुति “भो शंभो, शिव शंभो” से शुरुआत की। उनके साथ तबले पर पंडित उदय शंकर मिश्र, संवादिनी पर मोहित साहनी, सितार पर सिद्धांत चक्रवर्ती और सारंगी पर अंकित मिश्र ने संगत की।
अपने पदचाप, भाव-भंगिमाओं और लय-ताल के अद्भुत संयोजन से उन्होंने भक्तिमय वातावरण का निर्माण किया। उनकी प्रस्तुति में ऊर्जा और परंपरा का सुंदर संतुलन देखने को मिला।
मालिनी अवस्थी के लोकगीतों ने रच दिया समां
पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने दादरा और चैती गायन शैलियों के माध्यम से लोकसंगीत की मधुरता बिखेरी। उन्होंने राग विहाग में “लंका जो धाय गयो” से शुरुआत करते हुए “नदिया तू धीरे बहो रे”, “आओ पिया सूनी पड़ी है सेजिया हमार” जैसे गीत प्रस्तुत किए। उनके साथ हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्र और तबले पर शुभ महाराज ने संगत की।
युवा और वरिष्ठ कलाकारों का शानदार प्रदर्शन
बनारस घराने के युवा तबला वादक राहुल मिश्र ने अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं का दिल जीत लिया। उन्होंने अपनी कला को अपने दादा पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र को समर्पित किया। वहीं चंडीगढ़ के हरविंदर शर्मा ने सितार वादन में राग अहीर भैरव और ललित के मिश्रण से एक नई शैली प्रस्तुत की।
समारोह की अंतिम प्रस्तुति कोलकाता की शिखा भट्टाचार्य ने दी, जिन्होंने हनुमत वंदना से शुरुआत कर कथक नृत्य की पारंपरिक शैलियों—तोड़ा, टुकड़ा, तिहाई और परन—का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
सांस्कृतिक विरासत का जीवंत मंच
संकट मोचन संगीत समारोह एक बार फिर यह साबित करने में सफल रहा कि यह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय कला, संगीत और साहित्य की समृद्ध परंपरा का जीवंत उत्सव है। पहली निशा की शानदार प्रस्तुतियों ने आगामी दिनों के लिए भी उच्च मानक स्थापित कर दिए हैं।
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