काशी पहुंचे तेज प्रताप यादव, बाबा विश्वनाथ के दरबार में किया जलाभिषेक, बोले मन भटक रहा था बाबा ने बुला लिया
वाराणसी: धर्म, आस्था और आध्यात्मिक चेतना की नगरी काशी शनिवार को एक बार फिर राजनीतिक और धार्मिक आस्था के अनोखे संगम की साक्षी बनी, जब जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव वाराणसी पहुंचे और सीधे श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचकर बाबा के दरबार में मत्था टेका। दोपहर करीब एक बजे काशी आगमन के बाद उनकी पूरी यात्रा में आध्यात्मिक भावनाएं प्रमुख रूप से दिखाई दीं। दर्शन पूजन के दौरान उन्होंने विधि विधान से बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया और विशेष पूजा अर्चना में हिस्सा लिया। इस दौरान उनके चेहरे पर अलग ही भावनात्मक और श्रद्धामय भाव दिखाई दिए।
काशी विश्वनाथ धाम में तेज प्रताप यादव के पहुंचने की सूचना मिलते ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में मौजूद श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों के बीच उत्सुकता का माहौल देखने को मिला। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सामान्य चहल पहल के बीच तेज प्रताप यादव की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। दर्शन के दौरान उन्होंने पूरे मनोयोग और श्रद्धा के साथ पूजा प्रक्रिया में भाग लिया। मंदिर के पुरोहितों के निर्देशन में वैदिक विधि विधान के साथ पूजन संपन्न कराया गया।
दर्शन के बाद मंदिर परिसर में किया ओम नमः शिवाय का जप
पूजा अर्चना के बाद तेज प्रताप यादव करीब पंद्रह मिनट तक मंदिर परिसर में रुके रहे। इस दौरान वह लगातार ओम नमः शिवाय का जप करते दिखाई दिए। मंदिर में मौजूद लोगों ने उनके इस आध्यात्मिक रूप को काफी अलग और भावुक बताया। काशी विश्वनाथ धाम में अक्सर देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु अपनी आस्था और मनोकामनाओं के साथ पहुंचते हैं, लेकिन तेज प्रताप यादव की इस यात्रा में धार्मिक भावनाओं की गहराई अलग रूप में दिखाई दी।
मंदिर परिसर में मौजूद लोगों का कहना था कि उनकी उपस्थिति केवल एक राजनीतिक नेता के रूप में नहीं बल्कि एक सामान्य श्रद्धालु के रूप में अधिक दिखाई दे रही थी। यही कारण रहा कि उनकी यात्रा को लेकर लोगों के बीच अलग तरह की चर्चा होती रही।
मन भटक रहा था, बाबा बुला रहे थे इसलिए चला आया
दर्शन पूजन के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान तेज प्रताप यादव ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि काशी आने पर उन्हें हमेशा मानसिक शांति मिलती है। उन्होंने कहा कि कई दिनों से उनका मन विचलित और भटका हुआ महसूस कर रहा था। उन्हें ऐसा महसूस हो रहा था जैसे बाबा उन्हें अपने दरबार बुला रहे हों। इसी भाव के साथ वह काशी पहुंचे।
उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ की नगरी में आने के बाद उन्हें आत्मिक सुकून और अलग तरह की सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है। उनका यह बयान सामने आने के बाद लोगों ने इसे उनकी आध्यात्मिक सोच और निजी भावनात्मक जुड़ाव से भी जोड़कर देखा।
बाबा विश्वनाथ के बाद पहुंचे काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव के दरबार
काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन करने के बाद तेज प्रताप यादव ने काशी की परंपरा का निर्वहन करते हुए बाबा काल भैरव मंदिर पहुंचकर भी पूजा अर्चना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद बाबा काल भैरव के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु इसे अपनी यात्रा की पूर्णता से जोड़कर देखते हैं।
बाबा काल भैरव मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनका पूजन संपन्न कराया गया। उन्होंने वहां भी आशीर्वाद लिया और कुछ समय तक मंदिर परिसर में मौजूद रहे। धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी इस यात्रा ने उनकी आध्यात्मिक आस्था को और स्पष्ट रूप से सामने रखा।
आस्था से जुड़ाव पहले भी रहा चर्चा में
तेज प्रताप यादव का धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों से जुड़ाव पहले भी कई बार चर्चा में रहा है। विभिन्न अवसरों पर वह देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर दर्शन और पूजा अर्चना करते दिखाई देते रहे हैं। काशी से भी उनका जुड़ाव पहले का माना जाता है और वह पूर्व में भी कई अवसरों पर यहां पहुंच चुके हैं।
राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक जीवन के बीच इस बार उनकी वाराणसी यात्रा पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में दिखाई दी। काशी की गलियों से लेकर मंदिर परिसर तक उनकी यह यात्रा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि निजी आस्था और आत्मिक शांति की तलाश जैसी प्रतीत हुई। एक बार फिर यह संदेश भी सामने आया कि काशी केवल धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर नहीं बल्कि आत्मिक ऊर्जा और आध्यात्मिक विश्वास का भी केंद्र है, जहां पहुंचकर लोग अपने भीतर के शोर से दूर शांति तलाशने आते हैं।
LATEST NEWS