मेरठ में स्कूल बस हादसा, 15 फीट गहरी खाई में गिरी बस, 50 से अधिक बच्चे सवार, एक की हालत गंभीर
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में बुधवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा सामने आया, जहां सेंट मेरीज एकेडमी की स्कूल बस काली नदी के पास करीब 15 फीट गहरी खाई में पलट गई। बस में उस समय 50 से 55 बच्चे सवार थे। राहत की बात यह रही कि स्थानीय लोगों की तत्परता से सभी बच्चों और चालक को समय रहते बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
काली नदी फ्लाईओवर के पास हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, यह घटना दौराला-लावड़ मार्ग पर स्थित खेड़ी टप्पा गांव के पास हुई। सेंट मेरीज एकेडमी की बस रोज की तरह बच्चों को लेने गांवों में गई थी और वापस स्कूल लौट रही थी। बस में चिंदौड़ी, लावड़ और मवीमीरा गांव के कक्षा एक से पांचवीं तक के छात्र सवार थे।
बताया जा रहा है कि जैसे ही बस काली नदी फ्लाईओवर के पास पहुंची, चालक मोबाइल देखने लगा। इसी दौरान सामने से आ रहे ट्रक को बचाने के प्रयास में चालक ने नियंत्रण खो दिया, जिससे बस सड़क किनारे खाई में जा गिरी।
पेड़ से टकराकर रुकी बस, मची अफरा-तफरी
बस खाई में गिरने के बाद एक पेड़ से टकराकर रुकी, जिससे और बड़ा हादसा होने से बच गया। दुर्घटना के तुरंत बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद राहगीरों ने तत्परता दिखाते हुए बच्चों और चालक को बस से बाहर निकाला।
राहगीरों और अभिभावकों ने किया रेस्क्यू
घटना की सूचना मिलते ही बच्चों के अभिभावक भी मौके पर पहुंच गए। रोते-बिलखते बच्चों को देख परिजनों की आंखें नम हो गईं। सभी घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार किया गया।
डॉक्टरों के अनुसार, अधिकांश बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि एक बच्चे की हालत गंभीर बताई जा रही है।
बस पर दूसरे स्कूल का नाम, जांच के आदेश
बताया जा रहा है कि बस सेंट मेरीज एकेडमी की थी, लेकिन उस पर किसी अन्य स्कूल का नाम लिखा हुआ था। इस संबंध में अधिकारियों ने बताया कि बस हाल ही में दूसरे स्कूल से खरीदी गई थी और अभी उस पर नया नाम नहीं लिखा गया था।
लापरवाही बनी हादसे की वजह
प्राथमिक जांच में चालक की लापरवाही सामने आ रही है, जो चलते वाहन में मोबाइल देखने लगा था। इसी कारण वह वाहन पर नियंत्रण खो बैठा और हादसा हो गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा और स्कूल वाहनों की निगरानी पर सवाल खड़े करती है। प्रशासन ने इस मामले में सख्त कार्रवाई का संकेत दिया है।
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