वाराणसी में कोर्ट के आदेश पर पूर्व चौकी इंचार्ज समेत पांच के खिलाफ मुकदमा दर्ज जमीन कब्जाने और धमकी देने का आरोप
चौबेपुर थाना क्षेत्र का मामला फिर चर्चा में
वाराणसी: चौबेपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत चिरईगांव चौकी से जुड़ा एक पुराना मामला अब फिर से चर्चा में आ गया है। न्यायालय के सख्त रुख के बाद पूर्व चौकी इंचार्ज सब इंस्पेक्टर पंकज राय सहित पांच लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है और पूरे मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है।
पीड़ित ने लगाए साजिश और कब्जे के आरोप
पीड़ित वीरेंद्र कुमार मौर्या ने आरोप लगाया है कि एक सुनियोजित साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया गया। उन्होंने बताया कि विरोध करने पर उन्हें और उनके परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी भी दी गई। यह मामला अब न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद नए मोड़ पर पहुंच गया है।
गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
अतिरिक्त चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के आदेश पर चौबेपुर थाने में लक्ष्मीना देवी लालजी उमाशंकर मिश्रा पंकज कुमार मिश्रा और तत्कालीन चौकी इंचार्ज पंकज राय के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इन धाराओं में धोखाधड़ी जालसाजी धमकी और अन्य आपराधिक कृत्य शामिल हैं जिससे मामले की गंभीरता स्पष्ट होती है।
दो हजार तेरह में खरीदी गई जमीन बना विवाद का कारण
पीड़ित के अनुसार उन्होंने पंद्रह जुलाई दो हजार तेरह को बाबूलाल नामक व्यक्ति से करीब दो हजार सात सौ बीस वर्ग फीट जमीन खरीदी थी। कई वर्षों तक सब कुछ सामान्य रहा लेकिन बाद में आरोपियों ने इस जमीन पर कब्जा करने के लिए साजिश रची। आरोप है कि सौ रुपये के स्टाम्प पेपर पर फर्जी विक्रय पत्र तैयार किए गए और कलेक्ट्रेट की नकली मुहरों का इस्तेमाल कर दस्तावेजों को वैध दिखाने की कोशिश की गई।
पुराने दस्तावेजों में भी मिलीं विसंगतियां
आरोपियों द्वारा वर्ष उन्नीस सौ उनहत्तर का एक कथित सुलहनामा भी प्रस्तुत किया गया जिसमें ऐसे न्यायालय और पदनाम का उल्लेख था जो उस समय अस्तित्व में नहीं थे। इस तथ्य के सामने आने के बाद पूरे दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए और मामले ने गंभीर रूप ले लिया।
आरटीआई के जरिए सामने आया सच
वीरेंद्र कुमार मौर्या ने बताया कि दस्तावेजों पर संदेह होने के बाद उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत संबंधित अभिलेख प्राप्त किए। जांच में कई गड़बड़ियां सामने आईं जिसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान फर्जीवाड़े की पुष्टि होने पर पूर्व में पारित एकपक्षीय आदेश को निरस्त कर दिया गया।
पद के दुरुपयोग का आरोप भी शामिल
मामले को और गंभीर बनाते हुए पीड़ित ने आरोप लगाया कि तत्कालीन चौकी इंचार्ज पंकज राय ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आरोपियों को संरक्षण दिया। उन्होंने बताया कि उन्हें चौकी पर बुलाकर समझौते का दबाव बनाया गया और आधी जमीन देने का प्रस्ताव रखा गया। प्रस्ताव ठुकराने पर उन्हें और उनके बेटों को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
मुकदमा दर्ज होते ही विभाग में हलचल
कोर्ट के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज होते ही पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार संबंधित अधिकारी वर्तमान में लखनऊ में तैनात हैं। गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें
इस पूरे मामले ने जमीन विवादों में फर्जी दस्तावेजों और प्रशासनिक स्तर पर कथित मिलीभगत जैसे मुद्दों को एक बार फिर उजागर किया है। अब सभी की नजरें जांच की दिशा और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। पीड़ित पक्ष को न्याय की उम्मीद है जबकि प्रशासन पर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
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