बीएचयू के प्रोफेसर की अगुवाई में बड़ा वैज्ञानिक नवाचार स्ट्रॉबेरी सेट दही ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान
वाराणसी: डेयरी विज्ञान के क्षेत्र में काशी ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी वैज्ञानिक क्षमता का मजबूत प्रदर्शन किया है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर और वर्तमान में बीआर अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो दिनेश चंद्र राय के नेतृत्व में कार्यरत शोध टीम ने एक अभिनव उपलब्धि हासिल की है। टीम ने फ्रीज ड्राइड स्ट्रॉबेरी पाउडर के उपयोग से एक विशेष प्रकार का सेट दही विकसित किया है जो स्वाद रंग और पोषण के लिहाज से अत्यंत प्रभावी पाया गया है। इस महत्वपूर्ण शोध को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल एप्लाइड फूड रिसर्च में प्रकाशित किया गया है जो वैश्विक स्तर पर इसकी वैज्ञानिक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
मेटाबोलोमिक्स तकनीक से हुआ गहन विश्लेषण
इस शोध की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें आधुनिक मेटाबोलोमिक्स तकनीक का उपयोग किया गया। इस तकनीक के माध्यम से तैयार किए गए दही में कुल 34 बायोएक्टिव यौगिकों की पहचान की गई। इनमें अल्फा लिनोलेनिक एसिड और एलाजिक एसिड जैसे महत्वपूर्ण तत्व शामिल हैं जो मानव शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ये यौगिक शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने सूजन को कम करने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक होते हैं। इस कारण यह उत्पाद सामान्य डेयरी उत्पाद से आगे बढ़कर फंक्शनल फूड की श्रेणी में आता है।
संतुलित अनुपात ने दिए सर्वोत्तम परिणाम
शोध के दौरान विभिन्न अनुपातों में स्ट्रॉबेरी पाउडर को दही में मिलाकर परीक्षण किए गए। परीक्षण के निष्कर्षों में यह पाया गया कि आठ प्रतिशत स्ट्रॉबेरी पाउडर का मिश्रण सबसे संतुलित और प्रभावी रहा। इस अनुपात पर तैयार दही में स्वाद रंग बनावट और पोषण मूल्य का बेहतर संतुलन देखने को मिला। यह निष्कर्ष डेयरी उद्योग के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इससे उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाला और स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद उपलब्ध कराया जा सकता है।
डेयरी उद्योग के लिए नई संभावनाएं
प्रो दिनेश चंद्र राय ने इस उपलब्धि को भारतीय डेयरी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह नवाचार वैल्यू एडेड डेयरी उत्पादों के विकास और व्यावसायिक उत्पादन को नई दिशा देगा। इससे न केवल उपभोक्ताओं को बेहतर उत्पाद मिलेगा बल्कि किसानों और डेयरी उद्यमियों के लिए आय के नए अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने अपनी टीम के समर्पण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि निरंतर प्रयास और अनुसंधान के कारण ही यह सफलता संभव हो सकी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हो रही पहचान
गौरतलब है कि प्रो राय का यह शोध प्रकाशन पिछले दो वर्षों में उनका इकतीसवां अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन है जो उनकी सक्रियता और योगदान को दर्शाता है। इस उपलब्धि से भारतीय वैज्ञानिक समुदाय को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अनुसंधान न केवल वैज्ञानिक प्रगति को गति देते हैं बल्कि देश के खाद्य और पोषण क्षेत्र को भी नई दिशा प्रदान करते हैं।
भविष्य के अनुसंधान के लिए मजबूत आधार
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अध्ययन आने वाले समय में पोषण आधारित खाद्य उत्पादों के विकास के लिए एक मजबूत आधार सिद्ध होगा। इस तरह के नवाचारों से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय संस्थान वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं और नई तकनीकों के माध्यम से समाज के लिए उपयोगी समाधान विकसित कर रहे हैं। वाराणसी से निकली यह उपलब्धि देश के वैज्ञानिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में देखी जा रही है।
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