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वाराणसी: अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे युवक को डंपर ने रौंदा, मौके पर ही मौत

वाराणसी: अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे युवक को डंपर ने रौंदा, मौके पर ही मौत

वाराणसी में अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे 20 वर्षीय आकाश निषाद को डंपर ने रौंदा, मौत के बाद परिजनों ने किया चक्काजाम।

वाराणसी: देश की सरहद पर सेवा करने और बदन पर वर्दी पहनने का जुनून लिए एक युवा की दौड़ मंगलवार की सुबह हमेशा के लिए थम गई। वाराणसी-गाजीपुर हाईवे पर काल बनकर दौड़ रहे तेज रफ्तार वाहनों ने एक और परिवार की खुशियां निगल लीं।

मामला चौबेपुर थाना क्षेत्र के मोलनापुर गांव के पास का है, जहां मंगलवार तड़के अग्निवीर सेना भर्ती की तैयारी कर रहे 20 वर्षीय आकाश निषाद को एक तेज रफ्तार डंपर ने बेरहमी से रौंद दिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि आकाश की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद चालक डंपर समेत मौके से फरार हो गया, जबकि पीछे रह गए तो सिर्फ सड़क पर बिखरा खून और एक परिवार का कभी न खत्म होने वाला मातम। इस हृदयविदारक घटना ने न केवल ढाका गांव बल्कि पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।

हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल का मंजर बेहद भयावह था। अपने साथी की मौत और डंपर चालक की लापरवाही देख ग्रामीणों और परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। आक्रोशित भीड़ ने वाराणसी-गाजीपुर हाईवे पर चक्काजाम कर दिया, जिससे करीब 20 मिनट तक आवागमन पूरी तरह ठप रहा। सूचना मिलते ही चौबेपुर थाना प्रभारी इंद्रेश कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने सूझबूझ का परिचय देते हुए आक्रोशित ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया और जाम खुलवाया। थाना प्रभारी ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है, ताकि फरार डंपर चालक की पहचान कर उसे जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके।

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक गरीब परिवार की उम्मीदों की हत्या है। आकाश, ढाका गांव निवासी कमल निषाद का इकलौता बेटा था और तीन बहनों के बीच अकेला भाई था। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, जिसे सुधारने के लिए आकाश दिन-रात पसीना बहा रहा था। उसके कंधों पर न सिर्फ बूढ़े माता-पिता की जिम्मेदारी थी, बल्कि वह सेना में भर्ती होकर अपनी तीनों बहनों की शादी भी धूमधाम से करना चाहता था। परिजनों के मुताबिक, वह रोज सुबह साइकिल से सुभाष इंटर कॉलेज के खेल मैदान आता था और वहां अन्य युवकों के साथ कड़ी मेहनत करता था। उसके साथियों ने नम आंखों से बताया कि "आकाश की दौड़ बहुत अच्छी थी, हमें पूरा यकीन था कि इस बार वह अग्निवीर बन ही जाएगा, लेकिन कुदरत को शायद कुछ और ही मंजूर था।"

हादसे की खबर का असर सरहदों के पार भी महसूस किया गया। आकाश के पिता कमल निषाद, जो परिवार का पेट पालने के लिए दुबई में मजदूरी करते हैं, बेटे की मौत की खबर सुनते ही वहीं फफक-फफक कर रो पड़े। जिस बेटे को वह बुढ़ापे की लाठी मान रहे थे, उसके जाने की खबर ने उन्हें तोड़ कर रख दिया है। इधर, गांव में मां और तीनों बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। रक्षाबंधन पर कलाई सूनी होने का डर अब हकीकत बन चुका है। ग्रामीणों ने बताया कि आकाश बेहद मिलनसार और होनहार लड़का था। उसकी मौत ने पूरे गांव में चूल्हे नहीं जलने दिए। हर किसी की जुबान पर बस यही सवाल है, कि आखिर इन तेज रफ्तार डंपरों का कहर कब थमेगा?

स्थानीय लोगों में प्रशासन और हाईवे पर बेलगाम दौड़ते भारी वाहनों के प्रति गहरा रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि वाराणसी-गाजीपुर हाईवे अब 'मौत का हाईवे' बनता जा रहा है। अभी पिछले महीने ही रामपुर चंद्रावती में भी सेना भर्ती की तैयारी कर रहे एक युवक की इसी तरह डंपर की टक्कर से मौत हो गई थी।

इसके अलावा उमरहां और डुबकियां बाजार में भी डंपर के कुचलने से कई जानें जा चुकी हैं। आए दिन हो रही इन घटनाओं के बावजूद डंपर चालकों की रफ्तार पर कोई लगाम नहीं लग पा रही है। आज फिर एक और मां की गोद सूनी हो गई और एक और युवा देश सेवा का सपना आंखों में लिए दुनिया से रुखसत हो गया।

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