Mon, 15 Dec 2025 14:24:52 - By : Palak Yadav
वाराणसी जिले के बड़ागांव क्षेत्र अंतर्गत हसनपुर बिराव भीटी और आसपास के गांवों में नीलगाय और आवारा पशुओं का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका सीधा असर किसानों की खड़ी फसलों पर पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में गेहूं रहर और मटर की फसलें इन पशुओं की वजह से भारी नुकसान झेल रही हैं। किसानों का कहना है कि महीनों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है और कई खेतों में फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। स्थिति यह है कि कई किसानों के लिए खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है जिससे उनकी आर्थिक परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
किसानों के अनुसार रात के समय नीलगाय झुंड के रूप में खेतों में घुस जाती हैं और फसलों को रौंद देती हैं जबकि दिन में आवारा पशु खुलेआम खेतों में चरकर फसलें बर्बाद कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें रात भर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है फिर भी फसलों को पूरी तरह बचा पाना संभव नहीं हो पा रहा है। छोटे और सीमांत किसान इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हैं जिनके लिए खेती ही आजीविका का मुख्य साधन है। लगातार हो रहे नुकसान से किसानों में गहरी चिंता और निराशा का माहौल है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर पहले भी कई बार संबंधित विभागों और प्रशासन को अवगत कराया गया है लेकिन अब तक कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। नीलगाय और आवारा पशुओं की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि के कारण समस्या और गंभीर होती जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में क्षेत्र में खेती करना कठिन हो जाएगा और इसका असर न केवल किसानों की आय पर बल्कि खाद्यान्न उत्पादन पर भी पड़ेगा। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि पशुओं को पकड़ने की ठोस व्यवस्था की जाए गौशालाओं की संख्या बढ़ाई जाए खेतों की सुरक्षा के लिए घेराबंदी की सुविधा दी जाए और फसल नुकसान का उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके।