Fri, 02 Jan 2026 20:59:48 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA
वाराणसी: जनता और जनप्रतिनिधि के बीच का सीधा संवाद लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होता है, और इसी परंपरा को जीवंत रखते हुए वाराणसी कैन्ट के विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने शुक्रवार को अपने महमूरगंज स्थित शिवाजी नगर जनसंपर्क कार्यालय में जनसुनवाई का आयोजन किया। यह महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उन आम नागरिकों के लिए न्याय की आस थी जो प्रशासनिक उदासीनता या सामाजिक प्रताड़ना से जूझ रहे थे।
प्रातः 10 बजे से लेकर अपराह्न 1 बजे तक चली इस मैराथन सुनवाई के दौरान विधायक ने न केवल बड़ी संख्या में आए लोगों की व्यक्तिगत और सामाजिक पीड़ा को धैर्यपूर्वक सुना, बल्कि मौके पर ही संबंधित विभागों के उच्चाधिकारियों को फोन लगाकर समस्याओं के त्वरित निस्तारण के कड़े निर्देश भी दिए। कार्यालय में उमड़ी भीड़ और लोगों का विश्वास इस बात का प्रमाण था कि 'शुक्रवार की जनसुनवाई' अब क्षेत्र की जनता के लिए समाधान का पर्याय बन चुकी है।
जनसुनवाई के दौरान प्रशासनिक लापरवाही और सामाजिक उत्पीड़न के कई गंभीर मामले सामने आए, जिन्हें विधायक ने पूरी संवेदनशीलता के साथ सुना। काजीपुरा खुर्द से आए लालजी अग्रहरी ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि जलकल विभाग वाराणसी द्वारा उन्हें नलकूप ऑपरेटर के पद पर नियुक्त तो कर दिया गया, लेकिन श्रम का उचित मानदेय उन्हें नहीं मिल रहा। उन्होंने बताया कि अब तक उन्हें केवल दो माह का भुगतान, वह भी महज 4000 रुपये की दर से किया गया है, जो कि जीवनयापन के लिए अपर्याप्त है।
इस प्रशासनिक विसंगति पर कड़ा रुख अपनाते हुए विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने तत्काल नगर आयुक्त, वाराणसी को मामले की गहन जांच करने और प्रार्थी का बकाया भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं, एक अन्य मामले में लालफीताशाही का शिकार हुए तुलसीपुर निवासी अशोक कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री राहत कोष से स्वीकृत होने वाली उनकी चिकित्सा राशि को बिना किसी ठोस कारण के निरस्त कर दिया गया है। इस पर विधायक ने जिलाधिकारी को निर्देशित किया कि वे व्यक्तिगत रूप से संज्ञान लेकर प्रार्थी की चिकित्सा राशि जल्द से जल्द जारी करवाएं, ताकि उपचार में बाधा न आए।
सुनवाई के दौरान सबसे मार्मिक प्रकरण शिवाजीनगर की निवासिनी आशू श्रीवास्तव का रहा, जो एक विधवा महिला हैं और ससुराल पक्ष के उत्पीड़न का सामना कर रही हैं। नम आंखों के साथ उन्होंने विधायक को बताया कि पति की मृत्यु के बाद ससुराल वालों ने उनका जीना दूभर कर दिया, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में अपने मायके लौटना पड़ा। अब जब उनके परिजन उनका दूसरा विवाह तय कर रहे हैं, तो उनके पूर्व ससुराल वाले उनका स्त्रीधन (गहने और कपड़े) वापस नहीं कर रहे हैं और मांगने पर गाली-गलौज व मारपीट पर उतारू हो जाते हैं।
एक महिला के साथ हो रहे इस अन्याय पर विधायक ने तुरंत थानाध्यक्ष सिगरा को फटकार लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच करने और दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्यवाही कर महिला का सामान वापस दिलवाने का आदेश दिया। जनसुनवाई के इस पूरे सत्र में विधायक के साथ अभिषेक भी उपस्थित रहे और जनता की समस्याओं को सूचीबद्ध करने में सहयोग दिया।