प्रयागराज: पौष पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, कल्पवास हुआ प्रारंभ

प्रयागराज में पौष पूर्णिमा पर संगम तट पर लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और माह भर के कल्पवास का शुभारंभ हुआ।

Sat, 03 Jan 2026 09:32:18 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA

प्रयागराज: तीर्थराज प्रयाग में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन त्रिवेणी संगम पर शनिवार को पौष पूर्णिमा के अवसर पर आस्था का एक ऐसा जनसैलाब उमड़ा, जिसे देखकर सहज ही भारतीय संस्कृति की विशालता का अनुमान लगाया जा सकता है। भोर की पहली किरण फूटने से पहले ही संगम के घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लग गया। कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और शीतलहर भी मोक्ष की कामना लेकर आए श्रद्धालुओं के उत्साह को कम नहीं कर सकी। शनिवार की अलसुबह, ब्रह्म मुहूर्त में ही लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र त्रिवेणी में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया और सूर्यदेव को अर्घ्य देकर विश्व कल्याण की कामना की। इस महास्नान के साथ ही संगम की रेती पर संयम, अहिंसा और तपश्चर्या के एक माह तक चलने वाले पवित्र 'कल्पवास' का विधिवत शुभारंभ भी हो गया है।

आस्था के आगे नतमस्तक हुई कड़ाके की ठंड
पौष पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं, संतों और गृहस्थों ने प्रयागराज को एक लघु भारत में तब्दील कर दिया है। शुक्रवार की देर रात से ही मेला क्षेत्र की ओर जाने वाले सभी मार्गों पर श्रद्धालुओं का रेला दिखाई देने लगा था, जिसके चलते कई स्थानों पर जाम की स्थिति भी बनी। घाटों पर "हर-हर गंगे" और "जय त्रिवेणी" के जयघोषों के बीच श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। भारी भीड़ के कारण लोगों को नदी तट तक पहुँचने में खासी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन भक्ति की शक्ति ने हर बाधा को बौना साबित कर दिया। तंबुओं की नगरी में बसे कल्पवासियों ने भी आज विधिवत संकल्प लेकर अपने तुलसी के पौधों के रोपण और गंगा पूजन के साथ अपनी एक माह की कठिन साधना शुरू कर दी है।

25 लाख श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान और सुरक्षा का अभेद्य दुर्ग
प्रशासनिक अनुमान के मुताबिक, पौष पूर्णिमा के इस विशेष अवसर पर करीब 25 लाख श्रद्धालुओं के संगम में डुबकी लगाने की संभावना है। इतनी विशाल भीड़ को नियंत्रित करने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मेला प्रशासन और पुलिस विभाग ने अभेद्य सुरक्षा चक्र तैयार किया है। मेला क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से 17 अस्थायी थाने और 42 पुलिस चौकियां स्थापित की गई हैं, जहाँ हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है।

मेला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) नीरज कुमार पांडेय के अनुसार, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए लगभग 10 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, किसी भी प्रकार की आतंकी या अप्रिय गतिविधि से निपटने के लिए एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) के कमांडो ने भी मोर्चा संभाल लिया है। भीड़ प्रबंधन के लिए एक विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है, जिसके तहत मेला क्षेत्र के सातों सेक्टर के पांटून पुलों को 'वन-वे' (एकांगी) कर दिया गया है ताकि आने और जाने वाले श्रद्धालुओं के बीच टकराव की स्थिति न बने।

पौष पूर्णिमा का धार्मिक महत्त्व और कल्पवास की महिमा
शास्त्रों में पौष पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की दशा ऐसी होती है कि गंगा जल के स्पर्श मात्र से ही मनुष्य के पापों का नाश हो जाता है और उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यह तिथि केवल एक स्नान पर्व नहीं है, बल्कि यह 'कल्पवास' की शुरुआत का प्रतीक है। कल्पवास को वेदों में 'ब्रह्मचर्य और तप' का काल कहा गया है। अगले एक महीने तक लाखों श्रद्धालु विलासिता का त्याग कर, जमीन पर सोएंगे, सात्विक भोजन (एक समय) ग्रहण करेंगे और दिन-रात ईश्वर की आराधना में लीन रहेंगे। यह शारीरिक और मानसिक शुद्धि की एक प्राचीन प्रक्रिया है, जो गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी संन्यासी की भांति जीवन जीने की कला सिखाती है।

मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनाएं, आगामी स्नान पर्वों पर नजर
माघ मेले के इस भव्य आगाज पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी कल्पवासियों, संतों और श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं में कोई कमी न छोड़ी जाए और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए।

इस बार माघ मेले में आने वाले अन्य प्रमुख स्नान पर्वों की तिथियां इस प्रकार हैं, जिन पर पुन: लाखों की भीड़ जुटने की उम्मीद है:
✅ मकर संक्रांति: 14 जनवरी
✅मौनी अमावस्या: 18 जनवरी (सबसे बड़ा स्नान पर्व)
✅ बसंत पंचमी: 23 जनवरी
✅माघी पूर्णिमा: 1 फरवरी
✅महाशिवरात्रि: 15 फरवरी

फिलहाल, संगम तट पर भक्ति का जो अद्भुत दृश्य उपस्थित है, वह न केवल अलौकिक है, बल्कि भारत की सनातन परंपरा की जीवित तस्वीर पेश कर रहा है।

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