Sun, 11 Jan 2026 21:46:59 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA
वाराणसी/रामनगर: वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट में अपराध और अपराधियों के खिलाफ चल रहे 'जीरो टॉलरेंस' अभियान के तहत रविवार, 11 जनवरी की सुबह रामनगर पुलिस ने अदम्य साहस और तत्परता का परिचय देते हुए गौ-तस्करी की एक बड़ी साजिश को विफल कर दिया। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के कड़े निर्देशों और जमीनी स्तर पर पुलिस की सक्रियता का ही परिणाम है कि तस्करों के मंसूबे एक बार फिर ध्वस्त हो गए। एक रोमांचक और बेहद जोखिम भरे ऑपरेशन में, रामनगर पुलिस ने न केवल अपनी जान की परवाह किए बिना बैरिकेडिंग तोड़कर भाग रहे तस्करों को दबोचा, बल्कि वध के लिए क्रूरतापूर्वक बिहार ले जाए जा रहे 10 गोवंशीय पशुओं को सुरक्षित मुक्त कराकर एक बड़ा मानवीय कार्य भी किया।
सटीक मुखबिरी और पुलिस की अभेद्य घेराबंदी
घटना की शुरुआत रविवार की सुबह उस वक्त हुई जब रामनगर पुलिस को अपने विश्वसनीय सूत्रों से एक पुख्ता सूचना प्राप्त हुई। खबर थी कि गौतस्करों का एक गिरोह राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (NH-2) के रास्ते एक पिकअप वाहन में भारी मात्रा में गोवंश लादकर बिहार की ओर जाने की फिराक में है। सूचना बेहद संवेदनशील थी, जिसे गंभीरता से लेते हुए रामनगर थाना प्रभारी दुर्गा सिंह ने तनिक भी देर नहीं की। उन्होंने तुरंत एक रणनीतिक प्लान तैयार किया और भीटी चौकी इंचार्ज उपनिरीक्षक आदित्य राय के नेतृत्व में एक विशेष टीम को फील्ड में उतारा। पुलिस टीम ने हाईवे पर इस तरह से जाल बिछाया कि तस्करों को भागने का कोई भी मौका न मिल सके। यह कार्रवाई केवल एक रूटीन चेकअप नहीं थी, बल्कि अपराधियों की हर चाल को मात देने के लिए तैयार की गई एक सुव्यवस्थित 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसी घेराबंदी थी।
जानलेवा हमले की कोशिश और फिल्मी स्टाइल में गिरफ्तारी
जैसे ही तस्करों का वाहन पुलिस की घेराबंदी के करीब पहुंचा, वहां का दृश्य किसी एक्शन फिल्म की तरह बदल गया। पुलिस को सामने देख तस्करों ने वाहन रोकने के बजाय उसकी रफ्तार और बढ़ा दी। उन्होंने पुलिसकर्मियों को रौंदने की नीयत से सीधे बैरिकेडिंग में टक्कर मारने और घेरा तोड़ने का दुस्साहस किया। इस दौरान वहां तैनात जांबाज पुलिसकर्मियों ने गजब की सतर्कता दिखाई और खुद को बचाते हुए तस्करों का पीछा नहीं छोड़ा। पुलिस के बढ़ते दबाव और हड़बड़ाहट में तस्करों का वाहन ढुंढिराज पुलिया के पास अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक विशाल पेड़ से जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहन वहीँ रुक गया। इसके बाद भी आरोपियों ने हार नहीं मानी और वाहन छोड़कर भागने का प्रयास किया, लेकिन मुस्तैद पुलिस टीम ने बिजली जैसी फुर्ती दिखाते हुए मौके पर ही दो आरोपियों को घेरकर दबोच लिया। गनीमत रही कि इस पूरे घटनाक्रम में किसी भी पुलिसकर्मी या आम नागरिक को चोट नहीं आई, जो पुलिस की प्रोफेशनल ट्रेनिंग और सूझबूझ को दर्शाता है।
कानून का शिकंजा: नामजद आरोपी और आगे की कार्रवाई
गिरफ्त में आए तस्करों की पहचान जितेंद्र (उम्र 29 वर्ष, पुत्र शिवकुमार, निवासी टोडरपुर, थाना राजातालाब) और करन विश्वकर्मा (उम्र 26 वर्ष, पुत्र शिवकुमार, निवासी ख़ालिश, थाना मिर्जमुराद) के रूप में हुई है। पुलिस की पूछताछ में यह भी सामने आया है कि यह एक संगठित गिरोह है, जिसमें तीन अन्य लोग भी शामिल हैं, जिन्हें मुकदमे में नामजद किया गया है। थाना प्रभारी दुर्गा सिंह ने पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपियों के खिलाफ गोवध निवारण अधिनियम और बीएनएस (BNS) की सुसंगत और कठोर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है। पुलिस ने दोनों अभियुक्तों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत रिमांड के लिए माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया है, ताकि इस रैकेट की जड़ तक पहुंचा जा सके।
बेजुबानों की सुरक्षा: खाकी का मानवीय चेहरा
इस पूरे ऑपरेशन का सबसे सुखद पहलू उन 10 मवेशियों की जान बचना रहा, जिन्हें बेहद अमानवीय तरीके से ठूंस-ठूंस कर पिकअप में भरा गया था। अगर समय रहते रामनगर पुलिस ने यह कार्रवाई न की होती, तो शायद ये बेजुबान बिहार के किसी बूचड़खाने में अपनी जान गंवा देते। रेस्क्यू के तुरंत बाद पुलिस ने प्राथमिकता के आधार पर सभी गोवंशीय पशुओं का चिकित्सकीय परीक्षण करवाया। उनकी सेहत सुनिश्चित करने के बाद उन्हें देखभाल के लिए राजकीय गौशाला भेज दिया गया है। पुलिस की इस तत्परता ने यह साबित कर दिया है कि उनका काम सिर्फ अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि हर जीव की रक्षा करना भी है।
कमिश्नरेट पुलिस की कार्यशैली पर जनता का बढ़ा भरोसा
रामनगर की यह घटना इस बात का प्रमाण है कि पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में वाराणसी पुलिस अब अपराध के खिलाफ 'रक्षात्मक' नहीं बल्कि 'आक्रामक' मुद्रा में है। जिस तरह से थाना प्रभारी दुर्गा सिंह और उनकी टीम ने शांत दिमाग से रणनीति बनाई और जोखिम के बावजूद उसे अंजाम दिया, वह काबिले-तारीफ है। जनता के बीच इस कार्रवाई का संदेश बहुत साफ़ है, वाराणसी की सड़कों पर अपराध और तस्करी के लिए अब कोई जगह नहीं है। रामनगर पुलिस की इस सफलता ने न केवल गौतस्करों के नेटवर्क की कमर तोड़ी है, बल्कि आम जनमानस में खाकी के प्रति सम्मान और सुरक्षा के भाव को और भी मजबूत किया है।