Fri, 02 Jan 2026 21:08:20 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA
सोनभद्र: रॉबर्ट्सगंज के हृदय स्थल रामलीला मैदान के पास दिनदहाड़े कार का शीशा तोड़कर 10 लाख रुपये से भरा बैग उड़ाने वाली दुस्साहसिक वारदात का सोनभद्र पुलिस ने न केवल पर्दाफाश किया है, बल्कि अपराध की दुनिया में खौफ का पर्याय बन चुके अंतरराज्यीय 'नायडू गिरोह' की कमर तोड़ दी है। गुरुवार की रात चुर्क रेलवे स्टेशन के समीप पुलिस और बदमाशों के बीच हुई सीधी मुठभेड़ में गिरोह के सरगना समेत दो शातिर अपराधी पुलिस की गोली लगने से घायल हो गए, जबकि तीसरे को घेराबंदी कर दबोच लिया गया। घायल अवस्था में दोनों बदमाशों को तत्काल मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। पुलिस की इस त्वरित और साहसिक कार्रवाई ने जिले में कानून व्यवस्था के इकबाल को बुलंद किया है।
घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने बताया कि 26 दिसंबर को हुई इस सनसनीखेज वारदात ने शहर को झकझोर कर रख दिया था। बलिया निवासी विद्यासागर तिवारी की कंपनी सीएसडी इंफ्रा के कैशियर प्रकाश द्विवेदी और चालक रविकांत बैंक ऑफ बड़ौदा से 10 लाख रुपये निकालकर जा रहे थे। रामलीला मैदान के पास बदमाशों ने बेहद शातिराना तरीके से कार पंचर होने का नाटक किया और जैसे ही चालक और कैशियर का ध्यान भटका, पलक झपकते ही सीट पर रखा रुपयों से भरा बैग लेकर चंपत हो गए। पुलिस के लिए यह चुनौती बड़ी थी, क्योंकि गिरोह ने कोई सुराग नहीं छोड़ा था। लेकिन, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मुखबिरों के सटीक नेटवर्क के जरिए पुलिस ने गुरुवार शाम गिरोह की एक महिला सदस्य और दो बाल अपचारियों को हिरासत में लिया, जिनसे मिली अहम जानकारी ने पुलिस को मुख्य आरोपियों तक पहुंचा दिया।
सीओ रणधीर मिश्र के नेतृत्व में पुलिस की तीन विशेष टीमों ने चुर्क रेलवे स्टेशन के पास उस वक्त जाल बिछाया, जब सूचना मिली कि गिरोह के बाकी सदस्य किसी अन्य बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं और जिले से भागने की तैयारी कर रहे हैं। पुलिस को देखते ही बदमाशों ने बचने के लिए फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें महाराष्ट्र के नंदूरबार निवासी गैंग लीडर सुब्रमण्यम वेंकेट स्वामी और बालामुर्गन पैरों में गोली लगने से घायल हो गए। मौके से तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली निवासी उनके साथी रामू नायकर को गिरफ्तार कर लिया गया। मौके से पुलिस ने 1.35 लाख रुपये नकद, अवैध देसी तमंचे और कारतूस बरामद किए हैं, जो उनकी खतरनाक मंशा को जाहिर करते हैं।
पुलिस अधीक्षक (SP) अभिषेक वर्मा ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि यह कोई साधारण चोरों का गिरोह नहीं है, बल्कि यह कुख्यात 'नायडू गैंग' है, जिसका नेटवर्क तमिलनाडु, महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक फैला हुआ है। पूछताछ में यह बात सामने आई है कि यह गिरोह बच्चों और महिलाओं को ढाल बनाकर रेकी करता है और फिर बड़ी घटनाओं को अंजाम देता है। इसी गिरोह ने 13 दिसंबर को फतेहपुर जिले के बिंदकी और उससे पहले 3 अक्टूबर को उरमौरा रोड पर मिशन अस्पताल के सामने भी इसी तरह की टप्पेबाजी की घटनाओं को अंजाम दिया था। लखनऊ, कानपुर, अयोध्या और इंदौर जैसे बड़े शहरों में भी इनके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं।
पुलिस की इस सफलता पर एसपी अभिषेक वर्मा ने पूरी टीम की पीठ थपथपाई है और उन्हें उत्साहवर्धन के लिए 20 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी। पकड़े गए बदमाशों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि वे भविष्य में कानून के साथ खिलवाड़ करने की जुर्रत न कर सकें। पुलिस अब इनके अन्य साथियों और लूटी गई शेष रकम की बरामदगी के लिए इनके अंतरराज्यीय संपर्कों को खंगाल रही है।