Fri, 02 Jan 2026 21:15:04 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA
मिर्जामुराद (वाराणसी): कुदरत का खेल भी बड़ा अजीब होता है, कभी वह दामन को खुशियों से भर देता है तो कभी पल भर में सब कुछ छीन कर जीवन भर का गम दे जाता है। कुछ ऐसा ही हृदय-विदारक घटनाक्रम वाराणसी जिले के मिर्जामुराद क्षेत्र अंतर्गत बेनीपुर गांव में देखने को मिला, जहाँ एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं। यहाँ कड़ाके की ठंड से अपने जिगर के टुकड़े को बचाने की कोशिश ही उसकी मौत का सबब बन गई। शुक्रवार की सुबह रजाई के अंदर दम घुटने से महज 25 दिन के दुधमुंहे बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई। जिस घर में कल तक बधाई गीत और सोहर गूंज रहे थे, वहां अब सिर्फ माँ की चीत्कार और परिजनों के रोने की आवाजें सुनाई दे रही हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बेनीपुर निवासी राहुल कुमार और सुधा देवी का दांपत्य जीवन खुशियों से भरा हुआ था। शादी के लगभग दो वर्ष के इंतजार के बाद उनके आंगन में पहले संतान के रूप में पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी। अभी 25 दिन पहले ही बच्चे का जन्म हुआ था और परिवार में जश्न का माहौल था। बरही और मंगल- गान का दौर चल रहा था, और हर कोई नवजात के आगमन की खुशी मना रहा था। लेकिन गुरुवार की देर रात विधि को कुछ और ही मंजूर था। परिजनों ने बताया कि रात में कड़ाके की ठंड थी। माँ सुधा देवी ने बच्चे को दूध पिलाया और उसे ठंड से बचाने के लिए रजाई ओढ़ाकर अपने पास सुला लिया। रात भर माँ और बच्चा रजाई की गर्मी में सोते रहे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह रजाई उस मासूम के लिए काल बन जाएगी।
शुक्रवार की सुबह जब सुधा देवी की आंख खुली, तो उन्होंने देखा कि उनका लाडला कोई हरकत नहीं कर रहा है। अमूमन सुबह उठते ही रोने या हाथ-पांव चलाने वाला बच्चा एकदम शांत पड़ा था। अनहोनी की आशंका से घबराई माँ ने उसे हिलाया-डुलाया, लेकिन बच्चे के शरीर में कोई हलचल नहीं हुई। बदहवास सुधा ने तुरंत अपने पति राहुल को जगाया। बच्चे की हालत देखते ही घर में कोहराम मच गया। परिजन आनन-फानन में बच्चे को लेकर मोहनसराय स्थित एक निजी अस्पताल की ओर भागे, जहाँ डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, रजाई के अंदर ऑक्सीजन की कमी और दम घुटने (Asphyxia) से बच्चे की सांसें थम चुकी थीं।
अस्पताल से जैसे ही यह मनहूस खबर गांव पहुंची, वहां सन्नाटा पसर गया। बच्चे का शव घर पहुंचते ही जो दृश्य उपस्थित हुआ, उसे देख कर पत्थर दिल भी पिघल गए। जिस माँ की गोद अभी कुछ दिन पहले ही हरी हुई थी, वह अब अपने बच्चे के शव से लिपट कर बेसुध हो चुकी थी। राहुल कुमार, जो पिता बनने का सुख अभी ठीक से भोग भी नहीं पाए थे, उनकी आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उन्होंने रोते हुए बताया कि दो साल की मन्नतों के बाद यह खुशी मिली थी, लेकिन एक ही रात में सब कुछ खत्म हो गया। घटना की खबर सुनकर आसपास के ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई और हर कोई इस दर्दनाक हादसे पर अपनी संवेदना व्यक्त कर रहा था। बाद में गमगीन माहौल के बीच परिजनों ने गंगा नदी के तट पर विधि-विधान के साथ मासूम के शव को प्रवाहित कर अंतिम विदाई दी।
"न्यूज रिपोर्ट" सभी पाठकों से अपील करता है, कि सर्दियों में नवजात शिशुओं को भारी रजाई में सुलाने से बचें और उनका चेहरा ढकने के बजाय उन्हें गर्म कपड़े पहनाकर सुलाएं, ताकि उन्हें सांस लेने में तकलीफ न हो।