बलिया: नगरा पुलिस ने मुठभेड़ के बाद वांछित अपराधी को गिरफ्तार किया

By
Savan Nayak
Savan Nayak is the Bureau Chief for Uttar Pradesh at News Report, a registered Hindi newspaper. He specializes in ground reporting on crime, law and order,...
10 Min Read
बलिया के नगरा थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार अपराधी

जनपद बलिया में अपराध और अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना नगरा पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस टीम पर फायरिंग कर भागने की कोशिश करने वाले शातिर और वांछित अभियुक्त को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। अभियुक्त के कब्जे से एक नाजायज तमंचा 315 बोर, एक खोखा कारतूस, एक जिंदा कारतूस तथा मंदिर से चोरी की गई चांदी का हिस्सा बरामद हुआ है। गिरफ्तार अभियुक्त रूदल नट जनपद के विभिन्न थानों में दर्ज तीन दर्जन से अधिक गंभीर मुकदमों में वांछित रहा है और लंबे समय से पुलिस की नजर में था।

यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक बलिया श्री ओमवीर सिंह के निर्देशन में अपराध नियंत्रण अभियान के अंतर्गत की गई। अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी बलिया श्री दिनेश कुमार शुक्ला के पर्यवेक्षण और क्षेत्राधिकारी रसड़ा श्री आलोक कुमार गुप्ता के नेतृत्व में थाना नगरा पुलिस टीम द्वारा यह कार्रवाई अंजाम दी गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह गिरफ्तारी न केवल एक शातिर अपराधी को कानून के दायरे में लाने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि क्षेत्र में कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

घटना का विवरण 7 फरवरी 2026 का है। थाना नगरा के थानाध्यक्ष संजय कुमार अपनी टीम के साथ क्षेत्र में रात्रि गश्त और संदिग्ध व्यक्ति एवं वाहन चेकिंग में लगे हुए थे। पुलिस टीम खरूआंव पोखरे के पास चेकिंग कर रही थी, तभी मुखबिर खास से सूचना मिली कि एक अपराधी प्रवृत्ति का व्यक्ति किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की नीयत से चन्द्रवार पकवाइनार की ओर से पैदल आ रहा है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम ने तत्काल रणनीति बनाई और खरूआंव स्थित प्राचीन योगीबीर बाबा स्थान के पास घेराबंदी कर संदिग्ध व्यक्ति का इंतजार करने लगी।

कुछ ही देर बाद एक व्यक्ति पैदल आता दिखाई दिया। मुखबिर ने टॉर्च की रोशनी में उसकी पहचान करते हुए पुलिस को संकेत दिया और स्वयं वहां से हट गया। जब पुलिस टीम ने उसे रोकने का प्रयास किया तो वह व्यक्ति अचानक पीछे मुड़कर भागने लगा। इसी दौरान उसने पुलिस को धमकाते हुए कहा कि उसके पास कट्टा है और वह गोली चला देगा। थानाध्यक्ष नगरा ने उसे पुलिस होने की चेतावनी देते हुए आत्मसमर्पण करने को कहा, लेकिन अभियुक्त ने चेतावनी को अनदेखा करते हुए पुलिस टीम को लक्ष्य कर फायर कर दिया।

फायरिंग के दौरान पुलिस टीम ने संयम बरतते हुए सरकारी वाहन और आसपास की प्राकृतिक आड़ का सहारा लिया, जिससे कोई भी पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए थानाध्यक्ष नगरा ने उप निरीक्षक प्रभाकर शुक्ला को आत्मरक्षार्थ फायर करने का निर्देश दिया। उप निरीक्षक ने नाजुक अंगों को बचाते हुए अभियुक्त के शरीर के निचले हिस्से की ओर फायर किया। गोली लगते ही अभियुक्त गिर पड़ा और कराहने लगा।

इसके बाद पुलिस टीम ने पूरी सतर्कता और प्रशिक्षण के अनुरूप अभियुक्त को काबू में लिया। टॉर्च की रोशनी में देखने पर पाया गया कि अभियुक्त के बाएं पैर की पिंडली में गोली लगी थी और वहां से खून बह रहा था। मौके पर ही गमछे से पैड बनाकर प्राथमिक उपचार किया गया। अभियुक्त को रात करीब 21 बजकर 55 मिनट पर हिरासत में लिया गया। उसके दाहिने हाथ से एक नाजायज तमंचा 315 बोर बरामद हुआ, जिसकी नाल में एक खोखा कारतूस फंसा हुआ था। इसके अलावा एक जिंदा कारतूस जमीन पर पड़ा हुआ मिला।

जामा तलाशी के दौरान अभियुक्त ने अपना नाम रूदल नट पुत्र तुफानी नट निवासी ग्राम नकहरा थाना गड़वार जनपद बलिया उम्र लगभग 30 वर्ष बताया। तलाशी में उसके जैकेट की जेब से सफेद धातु का एक टुकड़ा भी बरामद हुआ, जो बाद में चोरी की चांदी का हिस्सा पाया गया। घायल अभियुक्त को उपचार के लिए सीएचसी नगरा भेजा गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल बलिया रेफर कर दिया गया।

पूछताछ के दौरान अभियुक्त ने कई सनसनीखेज खुलासे किए। उसने स्वीकार किया कि वह जनपद बलिया के विभिन्न थानों में दर्ज कई मामलों में वांछित था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार छिपता फिर रहा था। उसने बताया कि वह चोरी की नीयत से निकल रहा था, तभी पुलिस से मुठभेड़ हो गई। अभियुक्त ने यह भी कबूल किया कि वह एक संगठित गिरोह का सदस्य है और अपने साथियों के साथ मिलकर चोरी और अन्य आपराधिक घटनाओं को अंजाम देता रहा है।

अभियुक्त ने अपने साथियों के नाम भी बताए, जिनमें गुड्डू, पतरू, टेंगर, कयामू उर्फ कयामुद्दीन और अन्य शामिल हैं। उसने स्वीकार किया कि 4 और 5 जनवरी 2026 की रात को थाना सुखपुरा क्षेत्र के बुढ़वा मंदिर से शिवलिंग, नाग और दुर्गा प्रतिमा के आभूषण चोरी किए गए थे। चोरी के बाद शिवलिंग और चांदी के आभूषणों को लेकर वह और उसका साथी टेंगर फरार हो गए थे। अभियुक्त के पास से बरामद चांदी उसी चोरी का हिस्सा निकली।

इसके अलावा अभियुक्त ने दिसंबर 2025 में नगरा और सुखपुरा थाना क्षेत्रों में हुई कई चोरी की घटनाओं में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। उसने बताया कि मंदिरों, विद्यालयों और निजी परिसरों से की गई चोरी के सामान को कबाड़ी को बेचकर प्राप्त धनराशि को घरेलू खर्चों में उपयोग कर लिया गया। अभियुक्त ने यह भी बताया कि कुछ मामलों में चोरी का सामान बिहार में नदी में फेंक दिया गया ताकि साक्ष्य न मिल सकें।

पुलिस जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि अभियुक्त रूदल नट के खिलाफ बलिया जनपद के विभिन्न थानों में पहले से ही गंभीर धाराओं में 33 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें आर्म्स एक्ट, गिरोहबंदी अधिनियम, चोरी, लूट, डकैती, हत्या के प्रयास, एनडीपीएस एक्ट और अन्य संगीन अपराध शामिल हैं। अभियुक्त का लंबा आपराधिक इतिहास उसे एक कुख्यात और शातिर अपराधी के रूप में चिन्हित करता है।

इस मामले में थाना नगरा पर मुकदमा संख्या 34/2026 धारा 109(1) बीएनएस और 3/25 आर्म्स एक्ट के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया है। इसके साथ ही अभियुक्त के विरुद्ध पूर्व में दर्ज मामलों को भी विवेचना में शामिल कर विधिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले में बीएनएस की धारा 109(1), 305(डी), 331(4), 303(2), 317(2) तथा आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 सहित अन्य प्रासंगिक धाराएं लागू की गई हैं।

गिरफ्तारी के दौरान माननीय सर्वोच्च न्यायालय और मानवाधिकार आयोग के दिशा निर्देशों का पूर्ण पालन किया गया। अभियुक्त की गिरफ्तारी की सूचना उसके परिजनों को उचित माध्यम से दी जा रही है। पूरे घटनाक्रम के दौरान फील्ड यूनिट भी मौके पर मौजूद रही और साक्ष्य संकलन की कार्रवाई की गई।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस गिरफ्तारी से न केवल कई लंबित मामलों में अहम सुराग मिले हैं, बल्कि अभियुक्त के गिरोह से जुड़े अन्य अपराधियों तक पहुंचने का रास्ता भी साफ हुआ है। पुलिस टीम अब अभियुक्त के बयान और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अन्य वांछित अपराधियों की तलाश में जुट गई है।

इस पूरी कार्रवाई में थानाध्यक्ष संजय कुमार, उप निरीक्षक प्रभाकर शुक्ला, हेड कांस्टेबल देवव्रत उपाध्याय, कांस्टेबल विकास वर्मा और कांस्टेबल रमेश चौहान की अहम भूमिका रही। वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिस टीम की सतर्कता और साहस की सराहना की है।

पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनपद बलिया में अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। जो भी व्यक्ति कानून व्यवस्था को चुनौती देगा, उसके खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई की जाएगी। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर समाज को सुरक्षित रखा जा सके।

यह गिरफ्तारी न केवल एक शातिर अपराधी के आतंक का अंत है, बल्कि पुलिस की सक्रियता और सतर्कता का भी प्रमाण है। बलिया पुलिस का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।