बरेली: सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री द्वारा दिन में दिए गए इस्तीफे ने पहले ही हलचल मचा दी थी, लेकिन शाम होते-होते मामला और भी गंभीर मोड़ पर पहुंच गया। इस्तीफे के बाद सुलह और मनाने के तमाम प्रयासों के बीच, अलंकार अग्निहोत्री ने जिला प्रशासन पर ऐसे आरोप लगाए, जिन्होंने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया।
इस्तीफा देने के बाद दिनभर अधिकारियों द्वारा अलंकार अग्निहोत्री को मनाने की कोशिशें चलती रहीं। कभी उनके प्रशासनिक करियर का हवाला दिया गया तो कभी भावनात्मक स्तर पर उन्हें निर्णय बदलने के लिए प्रेरित करने का प्रयास हुआ। हालांकि, इन तमाम प्रयासों का उन पर कोई असर नहीं पड़ा। इसी क्रम में शाम के समय वह जिलाधिकारी के बुलावे पर डीएम आवास पहुंचे। करीब एक घंटे तक चली इस मुलाकात के बाद जब वह बाहर निकले, तो उन्होंने मीडिया के सामने जो आरोप लगाए, वे चौंकाने वाले थे।
अलंकार अग्निहोत्री ने दावा किया कि डीएम आवास में उन्हें लगभग 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे बना दिए गए थे कि उन्हें रातभर वहीं रोकने की साजिश रची गई। उन्होंने यह भी बताया कि इस दौरान उन्होंने सचिव दीपक पांडेय को फोन कर अपनी स्थिति से अवगत कराया और कहा कि उन्हें जबरन रोका गया है। उनका आरोप है कि जैसे ही इस बात की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची, उन्हें तत्काल वहां से जाने दिया गया।
सिटी मजिस्ट्रेट ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डीएम आवास में बातचीत के दौरान डीएम अविनाश सिंह एक लखनऊ के अधिकारी से फोन पर स्पीकर मोड में बात कर रहे थे। उसी दौरान दूसरी ओर से आए कॉल में कथित तौर पर उनके लिए अपशब्दों का प्रयोग किया गया। अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि यह व्यवहार न केवल उनके पद बल्कि प्रशासनिक गरिमा के भी खिलाफ है।
इस्तीफे के बाद माहौल और गरमा गया, जब अलंकार अग्निहोत्री ने अपना सरकारी आवास खाली करने के लिए अपने समर्थकों को बुला लिया। उनके बंगले पर समर्थकों की भीड़ जुटने लगी, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई। इसी बीच अखंड भारत गौरव ट्रस्ट के संस्थापक अनिल मुनि भी सिटी मजिस्ट्रेट के समर्थन में उनके आवास पहुंचे। उन्होंने सरकार की नीतियों के खिलाफ तीखा विरोध जताया और मीडिया के सामने कपड़े उतारकर प्रदर्शन किया। अर्धनग्न अवस्था में उन्होंने कहा कि आज स्वर्ण समाज के कपड़े उतर गए हैं और यूजीसी बिल को लेकर भी सरकार और संसद की चुप्पी पर सवाल खड़े किए।
पूरे घटनाक्रम पर जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने सिटी मजिस्ट्रेट के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। डीएम का कहना है कि बंधक बनाए जाने जैसी कोई बात पूरी तरह गलत और भ्रामक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीसीएस अधिकारियों की मौजूदगी में सामान्य माहौल में चाय पर बातचीत हुई थी, ताकि यह समझा जा सके कि अलंकार अग्निहोत्री ने अचानक इस्तीफा देने का निर्णय क्यों लिया। उनके अनुसार, इसके अलावा कोई असामान्य या दबाव की स्थिति नहीं थी।
फिलहाल, सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों ने बरेली प्रशासन को कठघरे में ला खड़ा किया है। एक ओर अधिकारी आरोपों को निराधार बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अलंकार अग्निहोत्री अपने आरोपों पर अडिग हैं। यह मामला अब केवल एक इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली, अधिकारियों के सम्मान और व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में इस पूरे प्रकरण पर शासन और प्रशासन का अगला कदम क्या होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
