काशी में नौ अगस्त को होगा छह वर्षीय भक्त भागवत प्रभु जी का आगमन सत्संग कीर्तन और श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश से श्रद्धालुओं को करेंगे प्रेरित
वाराणसी: भारत की सांस्कृतिक राजधानी, धर्म और अध्यात्म की प्राचीन नगरी काशी एक बार फिर भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण की साक्षी बनने जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार छह वर्षीय कृष्ण भक्त भागवत दास प्रभु जी जिन्हें भक्त भागवत प्रभु जी के नाम से भी जाना जाता है उनका नौ अगस्त दो हजार छब्बीस दिन रविवार को वाराणसी आगमन प्रस्तावित है। उनका कार्यक्रम चोलापुर क्षेत्र के तेवर गांव दलपति में आयोजित किया जाएगा जहां समाजसेवी राजू मिश्रा और संगीता मिश्रा के आवास पर सुबह दस बजे से सत्संग कीर्तन तथा श्रीमद्भगवद्गीता के संदेशों का वाचन और प्रवचन होगा। कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है और बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
सुबह दस बजे से होगा सत्संग और गीता प्रवचन
आयोजकों के अनुसार भक्त भागवत प्रभु जी अपने मधुर वचनों के माध्यम से श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेशों का सरल और सहज भाषा में वर्णन करेंगे। कार्यक्रम में भजन कीर्तन के साथ आध्यात्मिक चर्चा भी होगी। आयोजन में राजू मिश्रा परिवार के अलावा तेवर गांव के ग्रामीण तथा आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु शामिल होंगे। आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को धर्म आध्यात्मिकता और सदाचार के प्रति जागरूक करना है।
कौन हैं भक्त भागवत प्रभु जी
भक्त भागवत प्रभु जी का वास्तविक नाम भागवत दास है। उनका जन्म वर्ष दो हजार बीस में उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद स्थित गोवर्धन में हुआ था। वर्तमान समय में उनकी आयु लगभग छह वर्ष है। कम आयु में ही भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी गहरी आस्था और श्रीमद्भगवद्गीता के प्रति उनकी समझ ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई है। सोशल मीडिया पर उनके भक्ति संदेश और कृष्ण प्रेम से जुड़े वीडियो व्यापक रूप से साझा किए जाते हैं जिन्हें बड़ी संख्या में लोग देखते और सुनते हैं।
गर्भकाल से ही मिला धार्मिक संस्कार
परिवार के अनुसार भागवत दास प्रभु जी को धार्मिक संस्कार गर्भकाल से ही मिलने शुरू हो गए थे। उनकी माता पूज्य सचि देवी का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान उन्होंने नियमित रूप से श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ किया और भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में समय बिताया। उनका दावा है कि उन्होंने गीता के अठारह हजार श्लोकों का अध्ययन किया और प्रतिदिन मंदिर जाकर पूजा अर्चना की। परिवार का मानना है कि इन्हीं धार्मिक संस्कारों का प्रभाव बालक भागवत दास के व्यक्तित्व में प्रारंभ से दिखाई देता है।
वेदिक शिक्षा के साथ आध्यात्मिक अध्ययन
वर्तमान में भागवत दास प्रभु जी गोवर्धन स्थित गौरांग इंस्टीट्यूट फॉर वेदिक एजुकेशन में अध्ययन कर रहे हैं। यहां उन्हें वेदिक शिक्षा के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उनके गुरु का नाम वृंदावन चंद्र दास जी बताया जाता है जिनके मार्गदर्शन में वे आध्यात्मिक अध्ययन कर रहे हैं। परिवार के अनुसार उन्हें अध्ययन के साथ साथ गीता के श्लोकों का अभ्यास और भक्ति मार्ग की शिक्षा भी दी जाती है।
गीता वितरण और माला जप के लिए करते हैं प्रेरित
भक्त भागवत प्रभु जी अपने प्रवचनों में लोगों को श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ने और उसके संदेशों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देते हैं। उनके कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं को गीता का वितरण करने तथा माला जप और महामंत्र के जाप का महत्व समझाने की बात भी कही जाती है। उनके भक्ति संदेश विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के बीच भी लोकप्रिय बताए जाते हैं।
परिवार का परिचय
भक्त भागवत प्रभु जी अपने परिवार के साथ गोवर्धन में रहते हैं। उनके पिता का नाम अकाम भक्ति दास बताया जाता है जिनका पूर्व नाम आदित्य शर्मा था। परिवार के अनुसार उन्होंने इंजीनियरिंग और एमटेक की शिक्षा प्राप्त की है। उनकी माता पूज्य सचि देवी धार्मिक गतिविधियों से जुड़ी रहती हैं। परिवार में उनके छोटे भाई हरिअंश दास भी हैं जिनकी आयु लगभग चार वर्ष बताई जाती है।
श्रद्धालुओं में उत्साह
तेवर गांव सहित आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालु भक्त भागवत प्रभु जी के आगमन का इंतजार कर रहे हैं। आयोजकों ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से समय पर पहुंचकर सत्संग और गीता प्रवचन में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि इस आयोजन के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक जागरूकता और सकारात्मक जीवन मूल्यों का संदेश प्रसारित किया जाएगा।
पृष्ठभूमि
हाल के वर्षों में कम आयु के कई बाल प्रवचनकार और आध्यात्मिक वक्ता देशभर में चर्चा का विषय बने हैं। भक्त भागवत प्रभु जी भी ऐसे ही बाल वक्ताओं में शामिल हैं जिनकी पहचान मुख्य रूप से श्रीकृष्ण भक्ति और श्रीमद्भगवद्गीता के संदेशों के प्रचार प्रसार से जुड़ी हुई है। हालांकि उनके जीवन और उपलब्धियों से संबंधित कई जानकारियां परिवार और उनके समर्थकों द्वारा साझा की जाती हैं। स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्यों और सार्वजनिक अभिलेखों की उपलब्धता सीमित है। ऐसे में उनके संबंध में उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से परिवार और आयोजकों द्वारा दी गई सूचनाओं पर आधारित है।
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