वाराणसी: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर में जातिगत टिप्पणी के बाद भड़के हिंसक बवाल को लेकर लंका पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। घटना के सूत्रधारों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस टीम बीएचयू के प्रवेश और निकास द्वारों सहित आसपास के प्रमुख चौराहों पर लगे 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। इसके साथ ही घटना के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए 100 से अधिक वीडियो को भी जांच के दायरे में लिया गया है, ताकि उपद्रव में शामिल हर व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित की जा सके।
पुलिस जांच में सामने आया है कि सात नामजद आरोपियों में बाबतपुर निवासी दर्शिल पांडेय भी शामिल है, जो पहले से ही जिलाबदर घोषित है। अन्य आरोपियों में रोशन मिश्रा, शशांक सिंह, विशाल और विश्वजीत यादव के आपराधिक इतिहास को लेकर संबंधित थानों से विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। हॉस्टल गेटों पर बाहरी नंबर की गाड़ियों की सघन जांच हो रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। शुक्रवार को भी पूरे दिन परिसर में सख्ती का माहौल रहा, जहां सुरक्षाकर्मियों ने आने-जाने वालों की तलाशी ली।
गौरतलब है कि गुरुवार दोपहर बीएचयू के बिरला और रूईया हॉस्टल के छात्रों के बीच कहासुनी ने अचानक हिंसक रूप ले लिया। देखते ही देखते मारपीट और पथराव शुरू हो गया, जिसमें तीन छात्र घायल हो गए। दोपहर से लेकर देर शाम तक स्थिति पूरी तरह बेकाबू बनी रही। लंका पुलिस की मौजूदगी के बावजूद उग्र छात्रों ने जमकर हंगामा किया। इस दौरान बीएचयू का प्रॉक्टोरियल बोर्ड असहज नजर आया। चीफ प्रॉक्टर प्रो. संदीप पोखरिया सहित अन्य सुरक्षा कर्मी छात्रों को समझाने का प्रयास करते रहे, लेकिन वे हालात पर काबू पाने में सफल नहीं हो सके।
स्थिति तब नियंत्रण में आई जब हालात बिगड़ते देख पीएसी और कमिश्नरेट पुलिस के दस थानों की फोर्स को परिसर में उतारा गया। भारी पुलिस बल की तैनाती के बाद ही छात्र शांत हुए। इस दौरान कई वाहनों के शीशे भी क्षतिग्रस्त होने की सूचना है, जिससे परिसर में दहशत का माहौल बन गया।
इस घटना ने वर्ष 2019 की यादें ताजा कर दीं, जब एलबीएस और बिरला हॉस्टल के बीच हुए टकराव के दौरान पेट्रोल बम फेंके जाने जैसी गंभीर घटनाएं सामने आई थीं। उस समय भी प्रॉक्टोरियल बोर्ड हालात संभालने में नाकाम रहा था और पुलिस फोर्स को कैंपस में प्रवेश करना पड़ा था। तत्कालीन चीफ प्रॉक्टर ओपी राय स्वयं पुलिस के साथ उपद्रवी छात्रों के बीच पहुंचे थे। गुरुवार को बिरला और रूईया हॉस्टल के बीच हुए बवाल ने उसी पुराने तनाव की झलक दिखा दी, जिसे देखकर कई सुरक्षाकर्मी भी सहम गए।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की परत-दर-परत जांच कर रही है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और बीएचयू परिसर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।
