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बीएचयू ने टाइम्स रैंकिंग 2026 में सुधारी स्थिति, वैश्विक लक्ष्य के लिए बड़ी चुनौतियां

बीएचयू ने टाइम्स रैंकिंग 2026 में सुधारी स्थिति, वैश्विक लक्ष्य के लिए बड़ी चुनौतियां

बीएचयू ने टाइम्स रैंकिंग 2026 में अपनी स्थिति सुधारी है, पर वैश्विक शीर्ष हेतु शोध, अंतरराष्ट्रीय सहयोग व परिसर अनुशासन पर और काम करना होगा।

Banaras Hindu University ने टाइम्स हायर एजुकेशन रैंकिंग 2026 में अपनी स्थिति में पहले की तुलना में सुधार दर्ज किया है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है लेकिन इसके साथ ही नए वर्ष में शिक्षकों छात्रों और प्रशासन की जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। रैंकिंग में सुधार के बावजूद वैश्विक स्तर के शीर्ष संस्थानों में स्थान बनाने के लिए स्कोरिंग के सभी प्रमुख मानकों पर और अधिक गंभीरता से काम करने की जरूरत है। विशेष रूप से शोध कार्यों की संख्या के साथ साथ उनकी गुणवत्ता और उद्धरण संख्या को बढ़ाना होगा क्योंकि रैंकिंग में इनका योगदान काफी अहम होता है। इसके अलावा विदेशी छात्रों और अंतरराष्ट्रीय संकाय सदस्यों को आकर्षित करने के साथ उच्च गुणवत्ता वाले वैश्विक सहयोग को भी मजबूती देनी होगी।

विश्वविद्यालय को आइओई के तहत मिली स्वायत्तता और फंडिंग का प्रभावी उपयोग करते हुए विकास की रफ्तार को बनाए रखना होगा। अनुसंधान और विकास के लिए आंतरिक संसाधनों से फंडिंग को और सशक्त करने की आवश्यकता है ताकि शोध संस्कृति को जमीनी स्तर पर मजबूती मिल सके। इसके साथ ही परिसर में अनुशासन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। पूर्व में सामने आई छेड़खानी और बलात्कार जैसी घटनाओं ने विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाया है इसलिए छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। नए चीफ प्राक्टर से अपेक्षा है कि वे इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाएंगे। चोरी मारपीट और छिनैती जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के साथ छात्रावासों में सक्रिय अराजक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करना भी जरूरी होगा।

प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना होगा ताकि फैकल्टी और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच लंबे समय से चले आ रहे आंतरिक विवादों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके। अकादमिक मोर्चे पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के पूर्ण क्रियान्वयन की दिशा में तेजी लाने की आवश्यकता है क्योंकि स्नातक परास्नातक और पीएचडी समेत कई पाठ्यक्रमों की प्रवेश प्रक्रिया लगातार विलंबित होती रही है। बीते वर्ष भी स्नातक में प्रवेश प्रक्रिया काफी लंबी चली जिससे देर से दाखिला पाने वाले छात्रों को प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा की तैयारी का पूरा अवसर नहीं मिल सका। नए अंतरविषयक कोर्स आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और उत्कृष्ट संकाय सदस्यों की भर्ती के साथ छात्र शिक्षक अनुपात में सुधार की दिशा में ठोस पहल की उम्मीद की जा रही है। इन सभी चुनौतियों का संतुलित और दृढ़ता से सामना करते हुए बीएचयू नए वर्ष में अपने अकादमिक लक्ष्यों को हासिल कर वैश्विक मंच पर भारतीय शिक्षा का नेतृत्व कर सकता है।

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