PYPL ऑनलाइन फ्रॉड केस में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, चार राज्यों में 15 ठिकानों पर छापेमारी, 900 करोड़ की ठगी का खुलासा
ऑनलाइन निवेश और पार्ट टाइम नौकरी के नाम पर हजारों लोगों से ठगी करने वाले एक बड़े साइबर गिरोह के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने विदेशी फिनटेक प्लेटफॉर्म पीवाईपीएल से जुड़े ऑनलाइन धोखाधड़ी मामले में दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पंजाब में कुल 15 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। जांच एजेंसी के अनुसार इस गिरोह ने फर्जी निवेश योजनाओं के माध्यम से भारतीय नागरिकों से लगभग 900 करोड़ रुपये की ठगी की है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की साइबर शाखा ने सौंपा था मामला
जानकारी के अनुसार इस पूरे मामले को केंद्रीय गृह मंत्रालय की साइबर अपराध विरोधी इकाई आइ4सी द्वारा सीबीआई को सौंपा गया था। इसके बाद सीबीआई ने केस दर्ज कर संगठित साइबर धोखाधड़ी के इस नेटवर्क की जांच शुरू की और विभिन्न राज्यों में एक साथ छापेमारी की कार्रवाई की।
सीबीआई के अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह लंबे समय से ऑनलाइन माध्यमों के जरिए लोगों को ठग रहा था और बड़ी संख्या में नागरिकों को अपने जाल में फंसा चुका था।
गिरोह का सरगना चार्टर्ड अकाउंटेंट
जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक कुमार शर्मा कर रहा था। बताया जा रहा है कि वह दिल्ली और गुरुग्राम सीमा के पास स्थित बिजवासन इलाके में अपने कार्यालय से पूरे गिरोह की गतिविधियों को संचालित करता था।
सीबीआई अब अशोक कुमार शर्मा की हिरासत की मांग कर रही है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उसे गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार अशोक शर्मा के नेतृत्व में चल रहा यह नेटवर्क ‘बिजवासन समूह’ के नाम से जाना जाता था।
फर्जी कंपनियों के जरिए चलाया गया नेटवर्क
जांच एजेंसी के मुताबिक इस गिरोह ने करीब 15 फर्जी कंपनियों का नेटवर्क तैयार कर रखा था, जिसके जरिए ठगी की रकम को मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से इधर-उधर भेजा जाता था। पिछले वर्ष ही इस गिरोह ने ऑनलाइन योजनाओं के जरिए लगभग 900 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की थी।
इन कंपनियों का इस्तेमाल निवेश योजनाओं और अन्य वित्तीय गतिविधियों के नाम पर लोगों से पैसा जुटाने के लिए किया जाता था, जबकि वास्तविकता में यह पूरी तरह से धोखाधड़ी का नेटवर्क था।
निवेश और नौकरी के नाम पर दिया जाता था लालच
सीबीआई अधिकारियों के अनुसार गिरोह के सदस्य इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवाओं का इस्तेमाल करते थे। इनके जरिए लोगों को ऑनलाइन निवेश योजनाओं, क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग और पार्ट टाइम नौकरी के अवसरों में अधिक मुनाफे का लालच दिया जाता था।
जैसे ही लोग इन योजनाओं में पैसा निवेश करते थे, गिरोह विभिन्न डिजिटल माध्यमों से उस धनराशि को अलग-अलग खातों और कंपनियों के जरिए ट्रांसफर कर देता था। कई मामलों में विदेशों से जुड़े फिनटेक प्लेटफॉर्म और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से भी पैसे की निकासी की जाती थी।
जांच एजेंसियां खंगाल रही हैं पूरे नेटवर्क की कड़ियां
सीबीआई अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और कंपनियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। एजेंसी का कहना है कि छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार यह मामला देश में ऑनलाइन निवेश और साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते नेटवर्क का एक बड़ा उदाहरण है। जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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