चंदौली में ग्राम रोजगार सेवकों का लंबित मानदेय हुआ जारी, सख्त रुख के बाद एक दिन में पूरी हुई प्रक्रिया
चंदौली: नियामताबाद क्षेत्र में ग्राम रोजगार सेवकों के लंबे समय से अटके मानदेय का मामला आखिरकार निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। वर्षों से उपेक्षा और टालमटोल का शिकार बने इस मुद्दे पर जब पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य सत्येंद्र बारी ‘बीनू’ ने सख्त रुख अपनाया, तो प्रशासनिक तंत्र में अचानक हलचल मच गई। अधिकारियों को स्पष्ट और कड़े शब्दों में जवाबदेही का एहसास कराया गया, जिसका नतीजा यह हुआ कि महज एक ही दिन के भीतर लंबित मानदेय के भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी गई।
बताया जा रहा है कि ग्राम रोजगार सेवक लगातार अपने मानदेय के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ हासिल नहीं हो रहा था। हालात इस कदर बिगड़ चुके थे कि कई सेवकों के सामने आर्थिक संकट गहराने लगा था। ऐसे में जब यह मामला सत्येंद्र बारी ‘बीनू’ के संज्ञान में आया, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल संबंधित विभागीय अधिकारियों को तलब किया। बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि श्रमिकों और कर्मचारियों के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उनकी सख्ती का असर इतना तेज और व्यापक रहा कि वर्षों से फाइलों में उलझा यह मुद्दा चंद घंटों में सुलझ गया। अधिकारियों को न केवल जवाब देना पड़ा, बल्कि तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश भी लागू करने पड़े। प्रशासनिक ढांचे में यह बदलाव इस बात का संकेत था कि जब नेतृत्व मजबूत और प्रतिबद्ध हो, तो जटिल से जटिल समस्याओं का समाधान भी संभव है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद ग्राम रोजगार सेवकों के बीच खुशी और राहत का माहौल है। जिन लोगों ने लंबे समय तक अपने हक के लिए संघर्ष किया, उन्होंने इस त्वरित कार्रवाई को अपने लिए एक बड़ी जीत बताया। कई सेवकों ने कहा कि पहली बार उन्हें ऐसा लगा कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना गया और उस पर तुरंत कार्रवाई भी हुई।
सत्येंद्र बारी ‘बीनू’ ने हमारे संवाददाता से बातचीत में कहा कि यह केवल मानदेय का मामला नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी कर्मचारी को उसके मेहनताना के लिए भटकना पड़े, यह न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि प्रशासनिक विफलता भी है। उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में इस तरह की लापरवाही सामने आई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस घटनाक्रम ने यह भी साबित कर दिया कि जनप्रतिनिधि यदि संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ काम करें, तो व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाना संभव है। नियामताबाद का यह मामला अब जिले में एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है, जहां एक सख्त हस्तक्षेप ने न केवल समस्या का समाधान किया, बल्कि कर्मचारियों के मन में व्यवस्था के प्रति भरोसा भी मजबूत किया।
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