वाराणसी/रांची: नशे के अवैध कारोबार ने किस तरह सिस्टम की जड़ों को खोखला कर अकूत संपत्ति अर्जित की है, इसका एक चौंकाने वाला खुलासा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गोपनीय जांच और छापेमारी में हुआ है। वाराणसी और रांची के बीच सक्रिय ‘शैली ट्रेडर्स’ से जुड़े सिंडिकेट ने कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी से जुटाई गई काली कमाई को बड़ी सफाई से 'व्हाइट मनी' में बदलने के लिए टूरिज्म, रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर में झोंक दिया।
जांच में सामने आया है कि सिंडिकेट के सरगना शुभम जायसवाल ने तस्करी के पैसों से न केवल एक साल के भीतर एक ही कंपनी की छह लग्जरी गाड़ियां खरीदीं, बल्कि वाराणसी, लखनऊ, नोएडा और झारखंड के पॉश इलाकों में बेतहाशा निवेश किया। जांच एजेंसियों के हाथ लगे दस्तावेजों से पता चला है कि वाराणसी के रिंग रोड पर छह पार्टनरशिप में एक बेहद कीमती जमीन खरीदी गई थी, जहां दुबई की तर्ज पर एक अल्ट्रा-लक्जरी होटल बनाने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई थी। शुभम ने अपने रिश्तेदारों और कर्मचारियों के नाम पर भी वाराणसी और आसपास के जिलों में कई बेनामी संपत्तियां बना रखी हैं, जिनकी अब ईडी द्वारा गहनता से कुंडली खंगाली जा रही है।
अपराध की दुनिया में इस सिंडिकेट के उदय की कहानी भी कम फिल्मी नहीं है। आदमपुर थाना क्षेत्र के प्रहलाद घाट, कायस्थ टोला निवासी भोला प्रसाद के बेटे शुभम जायसवाल ने कोरोना लॉकडाउन के बाद पैदा हुए हालात का फायदा उठाते हुए कफ सिरप की तस्करी में कदम रखा था। बताया जाता है कि दवा का सामान्य काम करने वाले शुभम को जेल से छूटकर आए एक हिस्ट्रीशीटर ने इस काले धंधे की राह दिखाई। इसके बाद विभागीय भ्रष्टाचार और ड्रग अफसरों की कथित मेहरबानी से फर्जी नामों और पतों पर धड़ल्ले से ड्रग लाइसेंस बनते चले गए। इसी दौरान शुभम का संपर्क वरुणा पार के अमित सिंह 'टाटा' और आजमगढ़ के नरवे निवासी विकास सिंह से हुआ। इन दोनों ने शुभम को तस्करी को छोटे स्तर से निकालकर वृहद पैमाने पर ले जाने का 'ब्लूप्रिंट' दिया और परिवहन का सुरक्षित रास्ता तैयार करवाया। अमित सिंह टाटा और एसटीएफ के आलोक सिंह ने धनबाद और वाराणसी में अपनी फर्मों का पंजीकरण करवाया और शैली ट्रेडर्स के जरिए खरीद-फरोख्त का एक सेंट्रलाइज्ड बिलिंग सिस्टम खड़ा कर दिया। करीब एक साल तक यह खेल गुपचुप तरीके से चलता रहा, लेकिन माफियाओं की एंट्री और वर्चस्व की लड़ाई ने इस पूरे सिंडिकेट को सार्वजनिक कर दिया। आज स्थिति यह है कि मास्टरमाइंड शुभम के खिलाफ कई जिलों में मुकदमे दर्ज हैं और गाजियाबाद पुलिस भी उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही है।
प्रशासनिक स्तर पर भी अब इस नेटवर्क को ध्वस्त करने की कार्रवाई तेज हो गई है। खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग (FDA) ने तस्करी के इस नेटवर्क पर बड़ा प्रहार करते हुए मंगलवार को तीन और फर्मों न्यू पीएल फॉर्मा, जायसवाल मेडिकल और आशा डिस्ट्रीब्यूटर का लाइसेंस निरस्त कर दिया। सहायक आयुक्त पीसी रस्तोगी के अनुसार, वाराणसी में अब तक कुल 22 फर्मों के लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं और जिन फर्मों पर पहले एफआईआर दर्ज हुई थी, उनके खिलाफ विभागीय जांच जारी है। कार्रवाई की आंच अब पड़ोस के जौनपुर जिले तक भी पहुंच गई है, जहां श्री केदार मेडिकल एजेंसी, बद्रीनाथ फार्मेसी, गुप्ता ट्रेडिंग, हर्ष मेडिकल एजेंसी और मिलन ड्रग सेंटर समेत 12 फर्मों को संदिग्ध खरीद-फरोख्त और जालसाजी के मामले में नोटिस भेजकर जवाब तलब किया गया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर इन पर भी कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
कानूनी पेंच भी अब कसता जा रहा है। करीब 500 करोड़ रुपये के इस कफ सिरप घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक और शैली ट्रेडर्स के प्रोपराइटर भोला प्रसाद जायसवाल को वाराणसी की अदालत ने तलब किया है। भोला प्रसाद फिलहाल सोनभद्र जेल में बंद है। डीसीपी काशी गौरव बंशवाल ने पुष्टि की है कि कोर्ट ने 'वारंट बी' जारी किया है, जिसके तहत भोला प्रसाद को 2 जनवरी को सोनभद्र जेल से लाकर वाराणसी कोर्ट में पेश किया जाएगा। भोला प्रसाद और उसके बेटे शुभम ने मिलकर जिस तरह से सिंडिकेट चलाया, उसके सबूत खंगालने के लिए ईडी ने उनके ठिकानों पर दो दिनों तक मैराथन छापेमारी की थी। अब कोर्ट में पेशी के दौरान इस मामले में और भी कई बड़े राज खुलने की उम्मीद है।
ड्रग्स की काली कमाई से होटल और रियल एस्टेट में खड़ा किया करोड़ों का एंपायर, ईडी के शिकंजे में मास्टरमाइंड

प्रवर्तन निदेशालय ने वाराणसी और रांची में सक्रिय कफ सिरप तस्करी सिंडिकेट का खुलासा किया, जिसने करोड़ों की काली कमाई से रियल एस्टेट और पर्यटन में निवेश किया।
Category: uttar pradesh crime money laundering
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