वाराणसी: काशी में आर्थिक अपराधियों और सरकारी राजस्व को चूना लगाने वाले गिरोहों के विरुद्ध वाराणसी पुलिस ने एक और बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। कैंट थाना क्षेत्र के अंतर्गत चल रही सघन जांच और “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत पुलिस ने अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय एक ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने फर्जी जीएसटी बिलिंग के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को करोड़ों की चपत लगाई थी। इस हाई-प्रोफाइल मामले में वाराणसी पुलिस को उस वक्त बड़ी सफलता मिली, जब टीम ने ₹25,000 के इनामी मुख्य अभियुक्त को पंजाब से गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती जांच के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं; इस गिरोह ने अब तक लगभग ₹54 करोड़ की जीएसटी चोरी को अंजाम दिया है।
वाराणसी कमिश्नरेट की इस कार्रवाई का खाका पुलिस आयुक्त के कड़े निर्देशों के बाद तैयार किया गया था। वरुणा जोन के पुलिस उपायुक्त के कुशल नेतृत्व में कैंट पुलिस ने मुकदमा अपराध संख्या 423/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं—316(2), 318(4), 319(2), 338, 336(3), 420(2) और 61(2)—के तहत दर्ज मामले की परतें उधेड़नी शुरू कीं। विवेचना के दौरान पुलिस ने पाया कि यह केवल एक साधारण धोखाधड़ी नहीं, बल्कि डिजिटल दस्तावेजों और फर्जी फर्मों के जरिए बुना गया एक जटिल आर्थिक मायाजाल था, जिसका उद्देश्य सीधे तौर पर सरकारी खजाने में सेंध लगाना था।
फर्जी फर्मों और कागजी इनवॉयस का मायाजाल
इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे के ‘मॉडस ऑपरेंडी’ (कार्यप्रणाली) ने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। पुलिस जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि अभियुक्तों ने कागजी स्तर पर कई फर्जी फर्मों का एक विशाल नेटवर्क खड़ा कर रखा था। इन फर्मों का अस्तित्व केवल फाइलों और जीएसटी पोर्टल पर था, जबकि धरातल पर इनका कोई कामकाज नहीं हो रहा था। गिरोह के सदस्य बिना किसी वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के ही जीएसटी पोर्टल पर फर्जी इनवॉयस अपलोड करते थे और रिटर्न दाखिल कर देते थे। इन फर्जी बिलों के माध्यम से कागजों पर यह दिखाया जाता था कि बड़ी कंपनियों को लोहे और स्क्रैप जैसे कच्चे माल की आपूर्ति की गई है। इस पूरी प्रक्रिया का एकमात्र उद्देश्य अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ उठाना था, जिससे सरकार को मिलने वाले राजस्व का पैसा सीधे तौर पर इन जालसाजों की जेब में जा रहा था।
पंजाब में दबिश और ‘जस्सा’ की गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए कैंट पुलिस और एसओजी (SOG) की एक संयुक्त टीम गठित की गई थी। सुरागों का पीछा करते हुए और तकनीकी सर्विलांस की मदद से पुलिस की टीम पंजाब पहुंची। वहां विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए ₹25,000 के इनामी मुख्य अभियुक्त जसप्रीत सिंह उर्फ जस्सा को गिरफ्तार किया गया। 26 वर्षीय जसप्रीत, जो कि पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के मंडी गोबिंदगढ़ का निवासी है, इस पूरे सिंडिकेट की एक अहम कड़ी माना जा रहा है। उसके कब्जे से पुलिस ने एक लैपटॉप, टैबलेट, कई स्मार्टफोन और फर्जी फर्म ‘A/S Works’ से जुड़े ढेर सारे आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं। इसके अलावा, बैंकिंग से जुड़े अहम कागजात और पहचान पत्र भी जब्त किए गए हैं, जो इस घोटाले की गहराई को मापने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
पुलिस टीम की सतर्कता और भविष्य की कार्रवाई
इस बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में कैंट प्रभारी निरीक्षक शिवाकांत मिश्रा और एसओजी प्रभारी उप निरीक्षक गौरव कुमार सिंह समेत कई जांबाज पुलिसकर्मी शामिल रहे। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब्त किए गए डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच कराई जा रही है ताकि गिरोह के अन्य सहयोगियों और लाभार्थियों तक पहुंचा जा सके। पुलिस को संदेह है कि इस घोटाले के तार कई अन्य राज्यों के व्यापारियों और बिचौलियों से भी जुड़े हो सकते हैं। इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि वाराणसी कमिश्नरेट अब संगठित आर्थिक अपराधों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है और आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े नामों पर गाज गिर सकती है।
