जौनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में किसान यूनियन की मासिक बैठक उस समय विवाद का केंद्र बन गई जब प्रदेश अध्यक्ष राजनाथ यादव और महिला सदस्यों के बीच हुई कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया। बुधवार को चल रही इस बैठक के दौरान किसी टिप्पणी को लेकर माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। आरोप है कि प्रदेश अध्यक्ष ने महिला सदस्यों के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग किया, जिससे नाराज होकर महिलाओं ने विरोध शुरू कर दिया। विरोध इतना बढ़ गया कि बात हाथापाई तक पहुंच गई और कलेक्ट्रेट परिसर में अफरा तफरी का माहौल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद के दौरान महिलाएं आपस में भी भिड़ती नजर आईं और देखते ही देखते वहां भारी भीड़ जमा हो गई। स्थिति बिगड़ती देख प्रदेश अध्यक्ष राजनाथ यादव मौके से भाग निकले। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल कलेक्ट्रेट पहुंचा और कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ को नियंत्रित किया गया। पुलिस ने महिलाओं को समझा बुझाकर स्थिति को शांत कराया ताकि कोई बड़ा हादसा न हो।
हमलावर महिला शीला ने आरोप लगाया कि प्रदेश अध्यक्ष न केवल गाली गलौज करते हैं बल्कि यूनियन के कार्यों में लूट खसोट और मनमानी की शिकायतें भी लंबे समय से सामने आती रही हैं। महिलाओं का कहना है कि संगठन के भीतर उनकी बातों को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा है और सम्मान के साथ पेश नहीं आया जाता। इसी आक्रोश का परिणाम इस रूप में सामने आया।
पुलिस ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि विवाद एक टिप्पणी से शुरू हुआ, लेकिन इसके पीछे यूनियन के भीतर लंबे समय से चल रहा असंतोष भी एक बड़ा कारण है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद किसान यूनियन के अन्य सदस्यों ने भी संगठन की आंतरिक स्थिति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि महिलाओं के प्रति सम्मान की कमी और अधिकारों की अनदेखी का गंभीर उदाहरण है। इस विवाद ने यूनियन के भीतर की राजनीति और कार्यप्रणाली को भी उजागर कर दिया है। अब सभी की नजरें पुलिस जांच और यूनियन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
