कानपुर: पूर्व एडिशनल कमिश्नर केशवलाल पर आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा दर्ज, 2017 छापे में मिला था करोड़ों का कैश
कानपुर में सेल टैक्स विभाग के सेवानिवृत्त एडिशनल कमिश्नर केशवलाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में आखिरकार करीब नौ साल बाद मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वर्ष 2017 में आयकर विभाग की छापेमारी में उनके ठिकानों से भारी मात्रा में नकदी और ज्वेलरी बरामद हुई थी। अब विजिलेंस की विस्तृत जांच के बाद इस मामले में औपचारिक रूप से केस दर्ज कर आगे की विवेचना शुरू कर दी गई है।
2017 की छापेमारी में सामने आया था बड़ा खुलासा
19 अप्रैल 2017 को आयकर विभाग ने नोएडा और कानपुर स्थित केशवलाल के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में करीब 10.50 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। जांच के दौरान यह देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए कि नोटों की गड्डियां गद्दों, पूजा कक्ष, अलमारियों और यहां तक कि बाथरूम के बंद पड़े फ्लश में छिपाकर रखी गई थीं।
इसके अलावा बेडरूम में गत्तों में भरकर भी बड़ी मात्रा में कैश रखा गया था। छापेमारी के दौरान लगभग 3.5 करोड़ रुपये की ज्वेलरी और कई अचल संपत्तियों के दस्तावेज भी बरामद किए गए थे।
आय से कई गुना अधिक खर्च का खुलासा
विजिलेंस जांच में यह सामने आया कि केशवलाल की वैध आय बेहद सीमित थी, जबकि उनके खर्च और संपत्ति अर्जन का स्तर असामान्य रूप से अधिक था। विजिलेंस अधिकारी राजन कुमार रावत के अनुसार, केशवलाल ने अपने सेवा काल में वैध स्रोतों से करीब 1.34 करोड़ रुपये की आय अर्जित की, जबकि उन्होंने लगभग 18.27 करोड़ रुपये खर्च किए।
इस प्रकार उनकी आय से करीब 17.26 करोड़ रुपये अधिक खर्च पाया गया, जो आय से अधिक संपत्ति का स्पष्ट मामला बनाता है। यह अंतर उनकी घोषित आय से लगभग 18 गुना अधिक है।
कई शहरों में करोड़ों की संपत्तियां
जांच के दौरान केशवलाल के पास विभिन्न शहरों में कई महंगी संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। इनमें लखनऊ में दो, जबकि कानपुर, प्रयागराज, गाजियाबाद और नोएडा में एक-एक संपत्ति शामिल है। इन सभी संपत्तियों की कुल कीमत करोड़ों रुपये में आंकी गई है।
बताया जा रहा है कि मूल रूप से चंदौली जिले के बम्हनियावं गांव निवासी केशवलाल उस समय कानपुर में तैनात थे और लखनपुर क्षेत्र में किराए के मकान में रहते थे, जबकि उनका परिवार नोएडा के सेक्टर-34 में निवास करता था।
पहले हो चुकी है कार्रवाई
आयकर छापेमारी के बाद मई 2017 में केशवलाल को जबरन सेवानिवृत्ति दे दी गई थी। इसके अलावा पिछले वर्ष जुलाई माह में उनकी 100 प्रतिशत पेंशन कटौती का आदेश भी जारी किया गया था। विभाग द्वारा उनके और उनकी पत्नी इंदु श्रीवास्तव के खिलाफ करीब 28 करोड़ रुपये की मांग भी निकाली गई थी।
2023 से शुरू हुई थी विजिलेंस जांच
विजिलेंस जांच की प्रक्रिया 19 सितंबर 2023 से शुरू हुई थी। लंबी जांच और साक्ष्य संकलन के बाद 6 जनवरी 2026 को रिपोर्ट शासन को भेजी गई और मुकदमा दर्ज करने की अनुमति मांगी गई। शासन से अनुमति मिलने के बाद 8 अप्रैल 2026 को विजिलेंस के कानपुर सेक्टर ने औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज कर लिया।
साठगांठ के आरोपों की भी जांच
जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि केशवलाल ने इतनी बड़ी संपत्ति कैसे अर्जित की। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि उन्होंने पान मसाला कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों के साथ साठगांठ कर अवैध रूप से धन अर्जित किया।
विजिलेंस अधिकारी राजन कुमार रावत ने बताया कि मामले की गहन जांच जारी है और संपत्तियों के स्रोत, लेन-देन के तरीकों तथा अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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