काशी में गौभक्तों का शंखनाद, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध को समर्थन
अस्सी घाट पर सैकड़ों लोगों ने किया सामूहिक शंखनाद
अमित मिश्रा की रिपोर्ट : वाराणसी में बुधवार को गौभक्तों ने अस्सी घाट पर सामूहिक शंखनाद कर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा चलाए जा रहे गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध के समर्थन में आवाज बुलंद की। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश सरकार से गौमाता को राज्यमाता घोषित करने और प्रदेश में पूर्ण रूप से गोकशी पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में काशीवासी गौभक्तों ने एकत्र होकर शंखनाद किया और आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया।
बताया गया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश सरकार को 40 दिनों की समयसीमा देते हुए मांग की थी कि गौमाता को राज्यमाता घोषित किया जाए और प्रदेश में पूरी तरह से गोकशी पर प्रतिबंध लागू किया जाए। निर्धारित समयसीमा पूरी होने के बाद बुधवार को राजधानी लखनऊ में गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसके समर्थन में काशी में भी यह प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया।
गौमाता की रक्षा के लिए आंदोलन जारी
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित गौभक्तों को संबोधित करते हुए मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने कहा कि सनातन धर्म की आत्मा मानी जाने वाली गौमाता के प्राणों की रक्षा के लिए पूरे देश में आंदोलन चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का व्यापक असर दिखाई दे रहा है और बड़ी संख्या में सनातन धर्म के अनुयायी इससे जुड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा लखनऊ में किए जा रहे गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद के समर्थन में काशीवासियों ने अस्सी घाट पर शंखनाद कर यह संदेश दिया है कि काशी इस आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ी है। उनका कहना था कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि गौसंरक्षण की भावना से जुड़े करोड़ों लोगों की आस्था का विषय है।
राजनीतिक समर्थन से ऊपर गौसंरक्षण का मुद्दा
संजय पाण्डेय ने कहा कि यह आंदोलन किसी भी राजनीतिक दल के समर्थन में नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भी दल गौमाता की रक्षा का संकल्प लेगा, उसी को गौभक्तों का समर्थन मिलेगा। हालांकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान समय में खुद को हिंदूवादी कहने वाली सरकार के कार्यकाल में गोकशी की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जो चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि गौसंरक्षण के लिए आवाज उठाने वाले लोगों पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं और उनके खिलाफ षड्यंत्र रचकर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। इसके बावजूद गौभक्त अपने आंदोलन से पीछे हटने वाले नहीं हैं और गौमाता को राष्ट्रमाता तथा राज्यों में राज्यमाता घोषित किए जाने तक यह अभियान जारी रहेगा।
आस्था और परंपरा से जुड़ा है गौसंरक्षण
वक्ताओं ने कहा कि भारत की संस्कृति और परंपरा में गौमाता का विशेष महत्व रहा है। सनातन परंपरा में गौमाता को पूजनीय माना जाता है और उसे समृद्धि तथा धर्म का प्रतीक माना जाता है। इसलिए गौसंरक्षण केवल धार्मिक मुद्दा नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दायित्व भी है।
कार्यक्रम के दौरान अस्सी घाट पर धार्मिक वातावरण देखने को मिला। गौभक्तों ने एक साथ शंखनाद कर आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। आयोजकों का कहना था कि देश के विभिन्न हिस्सों में भी इसी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि गौसंरक्षण के मुद्दे पर व्यापक जनजागरण किया जा सके।
कार्यक्रम में ये लोग रहे उपस्थित
अस्सी घाट पर आयोजित शंखनाद कार्यक्रम में महामृत्युंजय मंदिर के महंत किशन दक्षिण, कांग्रेस के नगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, राकेश पाण्डेय, सरदार सतनाम सिंह, अरुण सोनी, सुनील श्रीवास्तव, प्रमोद वर्मा, पंडित सदानंद तिवारी, संतोष चौरसिया, पुलक त्रिपाठी, हिमांशु सिंह, किशन यादव, के के द्विवेदी, शशिकांत यादव, श्रीश तिवारी, सुभाष सिंह, मिर्ची दुबे, आशीष पाण्डेय और प्रदीप पाण्डेय सहित सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित रहे।
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