मेरठ में ऑनलाइन शादी सामान ठगी: करोड़ों का फ्रॉड, 4 युवक गिरफ्तार

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Dilip Kumar
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मेरठ पुलिस ने शादी के सामान की ऑनलाइन बिक्री के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।

मेरठ के चार युवक शादी के सामान की ऑनलाइन बिक्री के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी में गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां शादी समारोहों में इस्तेमाल होने वाले डेकोरेशन के सामान की ऑनलाइन बिक्री के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी की गई। मुंडाली क्षेत्र के अजराड़ा गांव के चार युवकों ने फेसबुक और इंस्टाग्राम के माध्यम से लोगों को आधी कीमत पर सामान देने का झांसा देकर देश के कई राज्यों के लोगों को निशाना बनाया। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से कुछ सामान भी बरामद किया है।

प्रेस वार्ता में एसएसपी ने दी जानकारी

पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय ने बताया कि इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर के पोर्टल पर कर्नाटक और तमिलनाडु से छह शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। शिकायतों में जिन मोबाइल नंबरों का उल्लेख था, उनकी आईडी मुंडाली क्षेत्र के अजराड़ा गांव से जुड़ी पाई गई। साइबर सेल की जांच में सामने आया कि गांव के सलमान, सलीम, मतलूब और जीशान पिछले दो वर्षों से इस प्रकार की साइबर ठगी में संलिप्त थे।

आधी कीमत का लालच देकर करते थे ठगी

आरोपियों ने फर्जी कंपनियों के नाम से फेसबुक और इंस्टाग्राम पर कई आईडी बना रखी थीं। इन आईडी पर शादी समारोहों में उपयोग होने वाले झूमर, लाइटें, कांच के जग, फूलों की लड़ियां और अन्य सजावटी सामान की तस्वीरें अपलोड की जाती थीं। बाजार मूल्य के मुकाबले इनकी कीमत आधी दर्शाई जाती थी। ग्राहकों को बताया जाता था कि सामान सीधे फैक्ट्री से बेचा जा रहा है, इसलिए सस्ता है और दुकानों तक पहुंचते ही कीमत दोगुनी हो जाती है।

ऑर्डर के लिए एक वाट्सएप नंबर भी दिया जाता था और वीडियो के माध्यम से पूरे देश में निशुल्क ऑनलाइन डिलीवरी का दावा किया जाता था। कर्नाटक, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से बड़ी संख्या में ऑर्डर प्राप्त होते थे। भुगतान मिलने के बाद आरोपी कुरियर की रसीद भेजते थे, लेकिन पैकेट में असली सामान के स्थान पर रद्दी भर दी जाती थी। इस प्रकार लोगों से लाखों रुपये ऐंठ लिए जाते थे।

फर्जी सिम और बैंक खातों का इस्तेमाल

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी कंपनी के कागजात लगाकर बैंक खाते खुलवा रखे थे। जैसे ही खातों में रकम जमा होती थी, उसे तुरंत निकाल लिया जाता था। सभी मोबाइल नंबर भी फर्जी आईडी पर खरीदे गए थे। ठगी के बाद सिम कार्ड तोड़ दिए जाते थे और खाता बंद होने पर दूसरा खाता खुलवा लिया जाता था। पुलिस के अनुसार इस गिरोह ने बैंक स्तर पर भी सेटिंग कर रखी थी, जिससे लंबे समय तक इनकी गतिविधियां जारी रहीं।

पहले भी दर्ज हो चुके हैं मुकदमे

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2023 और 2024 में भी इन आरोपियों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। उस समय वे थाने से ही जमानत पर छूट गए थे। इसके बावजूद इन्होंने ठगी का सिलसिला जारी रखा और दो वर्षों में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया।

बरामद किया गया सामान

पुलिस ने आरोपियों के पास से लोहे के स्टार, लोहे के झूमर, कांच और तार के बाल, कांच के जग, फूल की लड़ी, फूल शेड, तार की टोकरी, कांच के झूमर, तार के बैलून, तार के लट्टू और फूलों के पट्टे सहित अन्य सजावटी सामग्री बरामद की है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन वस्तुओं की तस्वीरें ऑनलाइन पोस्ट कर ग्राहकों को आकर्षित किया जाता था।

कई राज्यों के लोग बने शिकार

इस गिरोह ने विशेष रूप से कर्नाटक, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश के लोगों को निशाना बनाया। ऑनलाइन माध्यम से ठगी होने के कारण पीड़ितों को शुरुआती स्तर पर ठगी का अंदेशा भी नहीं होता था। जब कुरियर खोलने पर रद्दी निकलती थी, तब तक आरोपी मोबाइल नंबर बंद कर चुके होते थे।

मेरठ पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और अन्य संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर अत्यधिक सस्ते दाम पर सामान बेचने वाले अज्ञात पेजों और आईडी से सावधान रहें तथा किसी भी प्रकार का भुगतान करने से पहले सत्यापन अवश्य करें।