मिशन कर्मयोगी: उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य, एआई दक्षता में देश में नंबर-वन बनाना
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक क्षमता को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मिशन कर्मयोगी के तहत राज्य को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई दक्ष कार्मिकों के मामले में देश में नंबर-वन बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाना और उन्हें भविष्य की प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।
मुख्य सचिव ने की समीक्षा, दिए स्पष्ट निर्देश
शुक्रवार को मुख्य सचिव एसपी गोयल ने मिशन कर्मयोगी की प्रगति और आगामी कार्ययोजना की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत निष्क्रिय उपयोगकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। उनका जोर इस बात पर रहा कि अधिक से अधिक कर्मचारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लें और अपनी दक्षता बढ़ाएं।
तकनीकी और व्यावहारिक दक्षता पर फोकस
मिशन कर्मयोगी का मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को तकनीकी, व्यावहारिक और कार्यात्मक रूप से सक्षम बनाना है। इसके तहत कर्मचारियों को आधुनिक तकनीकों, विशेषकर एआई से संबंधित ज्ञान प्रदान किया जाएगा, ताकि वे बदलते प्रशासनिक परिवेश में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में सबसे अधिक एआई दक्ष कर्मचारी और कर्मयोगी उत्कर्ष बैज धारक तैयार किए जाएं।
प्रत्येक कर्मचारी के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रत्येक विभाग और जिले में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाए, जो इस अभियान की निगरानी और समन्वय सुनिश्चित करेंगे। साथ ही, प्रत्येक कर्मचारी के लिए न्यूनतम चार घंटे का ऑनलाइन प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है। इसमें कम से कम एक घंटा एआई से संबंधित पाठ्यक्रम के लिए निर्धारित किया गया है।
दो से आठ अप्रैल तक मनाया जाएगा “साधना सप्ताह”
मिशन कर्मयोगी को गति देने के लिए राज्य सरकार ने दो से आठ अप्रैल तक “साधना सप्ताह” आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस दौरान सभी कर्मचारियों को आईजीओटी पोर्टल पर निर्धारित प्रशिक्षण पूरा करना होगा। इसके अलावा वेबिनार, समूह चर्चा और पैनल चर्चा जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनकी रिकॉर्डिंग पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश पहले ही बना अग्रणी राज्य
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि प्रदेश के लगभग 20 लाख कर्मचारियों में से 19,99,497 कर्मचारी आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत हो चुके हैं। इतना ही नहीं, प्रदेश के कार्मिकों ने अब तक एक करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूरे कर देश में पहला स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि राज्य की डिजिटल प्रशिक्षण क्षमता को दर्शाती है।
सुशासन और सेवा गुणवत्ता में होगा सुधार
मुख्य सचिव एसपी गोयल ने विश्वास जताया कि इस पहल से कर्मचारियों की डिजिटल दक्षता और एआई ज्ञान में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित यह बदलाव भविष्य में सुशासन को और मजबूत बनाएगा।
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