मुंबई लोकल ट्रेन में हुए एक मामूली झगड़े ने एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। इस दर्दनाक घटना में गणित के प्रोफेसर Alok Singh की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। वे अपनी पत्नी का जन्मदिन मनाने के लिए घर लौट रहे थे, लेकिन मालाड स्टेशन पर हुई इस वारदात ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। घटना के बाद परिजनों ने पुलिस कार्रवाई और इलाज में देरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, हालांकि पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
आलोक सिंह विले पार्ले स्थित एक कॉलेज में गणित के प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थे। वे अपनी पत्नी Pooja Alok Singh के साथ मालाड ईस्ट के कुरार गांव स्थित प्रतापनगर एसआरए सोसायटी में रहते थे। दोनों की शादी को अभी तीन साल ही हुए थे और वे किराए के फ्लैट में अपना छोटा सा खुशहाल संसार बसा रहे थे। परिवार के अनुसार आलोक बेहद शांत स्वभाव के थे और किसी से झगड़ा करने से बचते थे।
पूजा सिंह ने बताया कि उनके जन्मदिन के मौके पर दोनों ने बाहर डिनर पर जाने की योजना बनाई थी। इसी वजह से आलोक उस दिन कॉलेज से करीब एक घंटा पहले निकल गए थे। आमतौर पर वह शाम करीब 6:30 बजे घर पहुंचते थे, लेकिन उस दिन 5:30 बजे ही मालाड स्टेशन पहुंच गए थे। पूजा घर पर उनका इंतजार कर रही थीं, लेकिन कुछ ही देर बाद उनका इंतजार जिंदगी के सबसे बड़े सदमे में बदल गया।
पूजा के अनुसार, उन्हें अचानक पुलिस का फोन आया और बताया गया कि आलोक ट्रेन हादसे में घायल हुए हैं और उन्हें अस्पताल बुलाया गया है। जब वे अस्पताल पहुंचीं, तो डॉक्टरों ने बताया कि आलोक की मौत हो चुकी है। पूजा का कहना है कि शुरुआत में परिवार को यह बताया गया कि आलोक की मौत ट्रेन हादसे में हुई है, लेकिन अंतिम संस्कार के बाद उन्हें सच्चाई का पता चला कि उनके पति की चाकू मारकर हत्या की गई थी।
इस खुलासे के बाद परिवार का दर्द और गुस्सा दोनों बढ़ गए। पूजा सिंह ने कहा कि उनकी सारी खुशियां एक पल में उजड़ गईं। उन्होंने मांग की कि उनके पति की हत्या करने वाले को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। आलोक सिंह के पिता Anil Singh एनएसजी कमांडो हैं और रक्षा मंत्री Rajnath Singh की सुरक्षा में तैनात हैं। इसके बावजूद परिवार को न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, यह बात उन्हें और अधिक पीड़ा दे रही है।
आलोक की बहन Pooja Sandeep Singh ने बताया कि उनका भाई बेहद शांत और समझदार इंसान था। उन्होंने कहा कि आलोक कभी किसी से झगड़ा नहीं करता था और यह समझ से परे है कि कोई उस पर चाकू से हमला क्यों करेगा। परिवार की रिश्तेदार शीला सिंह ने भी कहा कि आलोक एमएससी डिग्रीधारी थे और पढ़ाई लिखाई में बेहद होनहार थे। उनका कहना है कि किसी को इतना गुस्सा क्यों आया कि उसने एक निर्दोष व्यक्ति की जान ले ली, यह सवाल पूरे परिवार को कचोट रहा है।
परिजनों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि यदि समय पर इलाज मिल जाता तो आलोक की जान बच सकती थी। परिवार का दावा है कि चाकू लगने के बाद आलोक को करीब आधे घंटे तक प्लेटफॉर्म पर बैठाकर रखा गया और वह लगभग एक घंटे तक जीवित थे। उनका कहना है कि स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर थी, ट्रेन में धारदार हथियार कैसे पहुंचा, और समय पर एम्बुलेंस क्यों नहीं बुलाई गई, इन सभी सवालों के जवाब अब तक नहीं मिले हैं।
वहीं इस मामले में रेलवे पुलिस ने इलाज और कार्रवाई में देरी के आरोपों को खारिज किया है। रेलवे पुलिस के वरिष्ठ निरीक्षक Datta Khupekar ने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती गई। उनके अनुसार ट्रैफिक जाम के कारण एम्बुलेंस को पहुंचने में 15 से 20 मिनट की देरी हुई। इसके बाद घायल को एम्बुलेंस में शिफ्ट करने और अस्पताल ले जाने में भी कुछ समय लगा, लेकिन प्रक्रिया के तहत ही कार्रवाई की गई।
मालाड स्टेशन पर हुई यह घटना न सिर्फ मुंबई लोकल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि रोजमर्रा की यात्रा किस तरह जानलेवा बन सकती है। एक ऐसा व्यक्ति, जो अपनी पत्नी का जन्मदिन मनाने के सपने लेकर घर लौट रहा था, वह कभी घर नहीं पहुंच सका। आज उसका परिवार न्याय की उम्मीद में सवालों और दर्द के साथ जीने को मजबूर है।
