राष्ट्रीय आय सह मेधा छात्रवृत्ति योजना एनएमएमएस के तहत शैक्षिक सत्र 2025 26 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 26 जनवरी से शुरू हो रही है। इस योजना के अंतर्गत आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर छात्र छात्राएं 15 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद की वेबसाइट के माध्यम से पूरी की जाएगी। परीक्षा आठ मार्च को आयोजित होगी जबकि प्रवेश पत्र पांच मार्च को जारी किए जाएंगे।
यह योजना सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा आठ के विद्यार्थियों के लिए है, जिनका उद्देश्य आर्थिक अभाव के कारण पढ़ाई छोड़ने से रोकना है। चयनित छात्रों को कक्षा नौ से 12वीं तक प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी। इससे छात्रों को माध्यमिक शिक्षा पूरी करने में आर्थिक सहयोग मिलेगा। बिहार राज्य से कुल 5433 विद्यार्थियों का चयन इस योजना के तहत किया जाएगा, जिससे हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
आवेदन के लिए पात्रता शर्तें भी स्पष्ट रूप से तय की गई हैं। सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए सातवीं कक्षा में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए यह सीमा 50 प्रतिशत रखी गई है। योजना का लाभ केवल सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों के छात्र छात्राओं को ही मिलेगा।
परीक्षा का कोई निश्चित पाठ्यक्रम निर्धारित नहीं किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य मेधावी विद्यार्थियों की पहचान करना है। प्रश्न आठवीं कक्षा के स्तर पर आधारित होंगे। परीक्षा दो चरणों में आयोजित की जाएगी। पहले चरण में मानसिक योग्यता परीक्षा होगी जिसमें 90 प्रश्न पूछे जाएंगे और इसके लिए 90 मिनट का समय दिया जाएगा। इस खंड में तर्क शक्ति विश्लेषण क्षमता तथा शब्दिक और अशब्दिक प्रश्न शामिल होंगे।
दूसरे चरण में शैक्षिक योग्यता परीक्षा आयोजित की जाएगी जिसमें गणित विज्ञान और सामाजिक विज्ञान से संबंधित 90 प्रश्न पूछे जाएंगे। अंतिम चयन लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा। शिक्षा विभाग की ओर से छात्रों से अपील की गई है कि वे समय रहते आवेदन करें और परीक्षा की तैयारी गंभीरता से करें ताकि इस महत्वपूर्ण छात्रवृत्ति योजना का लाभ उठाया जा सके।
एनएमएमएस योजना को शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है, जो प्रतिभाशाली लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करती है और उनके शैक्षिक भविष्य को सुरक्षित करने में अहम भूमिका निभाती है।
