काशी: रामनगर में 108 दिवसीय रामचरित मानस पाठ का आयोजन, महाशिवरात्रि पर समापन

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Sandeep Srivastava
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रामनगर में श्रद्धालुओं की उपस्थिति में रामचरित मानस पाठ

वाराणसी: रामनगर/धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं की जीवंत भूमि काशी के रामनगर क्षेत्र में इन दिनों भक्ति का अनुपम वातावरण बना हुआ है। यहां 30 अक्टूबर 2025 से प्रारंभ हुआ 108 दिवसीय रामचरित मानस का अखंड पाठ निरंतर श्रद्धा और आस्था के साथ संपन्न हो रहा है। यह भव्य आयोजन महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर पूर्णाहुति और विशाल भंडारे के साथ संपन्न होगा। आयोजन को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

महंत शिवानंद गिरी महाराज ने बताया कि रामचरित मानस का यह पाठ समाज में आध्यात्मिक जागरण और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के उद्देश्य से शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि मानस केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा है। इसके नियमित पाठ से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और लोगों के भीतर धर्म, धैर्य और करुणा जैसे गुणों का विकास होता है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर पाठ में सहभागिता कर रहे हैं और भक्ति भाव से सेवा में जुटे हैं।

मंदिर संस्थापक बचाऊं गुरु ने जानकारी दी कि यह आयोजन 30 अक्टूबर 2025 से विधिवत रूप से प्रारंभ हुआ और तब से लगातार निर्धारित क्रम में पाठ जारी है। 108 दिनों तक चलने वाले इस विशेष अनुष्ठान में रामचरित मानस के संपूर्ण कांडों का पाठ किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए स्थानीय श्रद्धालुओं और भक्तों का सहयोग मिल रहा है। महाशिवरात्रि के दिन हवन पूजन के साथ पाठ की पूर्णाहुति की जाएगी और उसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें क्षेत्र के लोगों के साथ दूरदराज से आने वाले श्रद्धालु भी प्रसाद ग्रहण करेंगे।

आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आधुनिक व्यवस्था भी की गई है। मंदिर परिसर में एक क्यूआर कोड की व्यवस्था की गई है, जिसके माध्यम से भक्तजन अपनी श्रद्धानुसार दान कर सकते हैं। इससे पारदर्शिता बनी रहती है और दूर रहने वाले भक्त भी इस धार्मिक अनुष्ठान से जुड़ सकते हैं। आयोजकों का कहना है कि यह प्रयास परंपरा और तकनीक के समन्वय का एक उदाहरण है।

रामनगर क्षेत्र में चल रहे इस 108 दिवसीय मानस पाठ ने न केवल धार्मिक वातावरण को सशक्त किया है, बल्कि सामाजिक एकता का भी संदेश दिया है। प्रतिदिन भजन, कीर्तन और प्रवचन के माध्यम से लोगों को धर्म और नैतिकता की सीख दी जा रही है। महाशिवरात्रि पर होने वाला समापन समारोह और भंडारा इस दीर्घकालिक अनुष्ठान की भव्य परिणति होगा, जिसे लेकर श्रद्धालु उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हैं। काशी की आध्यात्मिक धारा में यह आयोजन एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ रहा है।