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बारिश के बीच रावण जन्म से हुआ रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला का भव्य शुभारंभ

Sandeep Srivastava Sub Editor News Report Newspaper
Last updated: 25/09/2026 22:00
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Sandeep Srivastava
Sandeep Srivastava Sub Editor News Report Newspaper
BySandeep Srivastava
Sandeep Srivastava serves as a Sub Editor at News Report, a registered Hindi newspaper dedicated to ethical, accurate, and reader-focused journalism. He is responsible for copy...
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9 Min Read
रामनगर रामलीला में रावण जन्म के प्रसंग का मंचन
रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला में रावण जन्म के प्रसंग का मंचन करते कलाकार।
Contents
  • बारिश भी न रोक सकी रामनगर की रामलीला, रावण जन्म से हुआ विश्वप्रसिद्ध रामलीला का शुभारंभ
  • रावण जन्म से हुआ रामलीला का श्रीगणेश
  • क्षीरसागर की झांकी ने मोहा मन
  • देवी स्तुति और आकाशवाणी से आगे बढ़ी कथा
  • बारिश के बीच भी कम नहीं हुआ लीला प्रेमियों का उत्साह
  • कल 26 सितंबर को होगा श्रीराम जन्म और बाललीला का मंचन

बारिश भी न रोक सकी रामनगर की रामलीला, रावण जन्म से हुआ विश्वप्रसिद्ध रामलीला का शुभारंभ

वाराणसी। काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला का शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर शुभारंभ हो गया। आसमान में बादलों की आवाजाही और बारिश के बीच भी लीला प्रेमियों का उत्साह कम नहीं हुआ। रामकथा के प्रति आस्था ऐसी रही कि बारिश की परवाह किए बिना बड़ी संख्या में लोग रामनगर के रामबाग स्थित लीला स्थल पर पहुंचे और मुक्ताकाशीय रामलीला के प्रथम दिन के दिव्य प्रसंगों के साक्षी बने। करीब दो सौ वर्ष से चली आ रही इस परंपरा में इस बार भी रामलीला की शुरुआत रावण जन्म, दिग्विजय, क्षीरसागर की झांकी, देव स्तुति और आकाशवाणी के प्रसंगों से हुई।

रामनगर की रामलीला की विशेषता यह है कि यहां लीला किसी एक स्थायी मंच पर नहीं होती, बल्कि रामनगर और आसपास के विस्तृत क्षेत्र में अलग-अलग लीलास्थलों पर रामचरितमानस के प्रसंग जीवंत होते हैं। लगभग एक माह तक चलने वाली यह रामलीला अयोध्या, जनकपुर, चित्रकूट और लंका जैसे विभिन्न लीला स्थलों के माध्यम से दर्शकों को रामकथा के साथ चलने का अवसर देती है। परंपरा के अनुसार यहां आधुनिक रंगमंच की तरह माइक और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था का प्रयोग नहीं किया जाता। पात्र अपनी ऊंची और स्पष्ट आवाज में संवाद बोलते हैं तथा पारंपरिक मशाल और पेट्रोमैक्स की रोशनी में लीला को जीवंत करते हैं।

रावण जन्म से हुआ रामलीला का श्रीगणेश

प्रथम दिन रामबाग के मुख्य द्वार के पास लीला का शुभारंभ रावण जन्म के प्रसंग से हुआ। परंपरागत रूप से काशीराज परिवार के डॉ. अनंत नारायण सिंह की मौजूदगी में लीला आरंभ हुई। कार्यक्रम में रावण के जन्म के साथ उसके तप, वरदान प्राप्त करने और इसके बाद बढ़ते अहंकार तथा दिग्विजय से जुड़े प्रसंगों को प्रस्तुत किया गया। तुलसीकृत रामचरितमानस के पदों और चौपाइयों के गायन के साथ वातावरण भक्तिमय बना रहा।

रामकथा में रावण को ब्रह्मा से वरदान प्राप्त होने के बाद अपने बल और सामर्थ्य पर अभिमान होता है। उसके अत्याचार बढ़ने लगते हैं और देवता, ऋषि-मुनि तथा धर्माचरण करने वाले लोग चिंतित हो उठते हैं। यही वह स्थिति है जहां से भगवान विष्णु के अवतार की भूमिका तैयार होती है। रामचरितमानस में इसी भाव को धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के व्यापक सिद्धांत से जोड़ा गया है-

“जब जब होइ धरम कै हानी।
बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी॥
तब तब प्रभु धरि बिबिध सरीरा।
हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा॥”

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रामनगर की लीला में रावण के जन्म और दिग्विजय के प्रसंग के साथ इसी धार्मिक भावभूमि को आगे बढ़ाया गया, जिसमें अधर्म के बढ़ते प्रभाव और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए भगवान के अवतार की पृष्ठभूमि तैयार होती है।

क्षीरसागर की झांकी ने मोहा मन

प्रथम दिन की लीला में क्षीरसागर की भव्य झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। लीला स्थल को क्षीरसागर का स्वरूप दिया गया। शेषशैय्या पर भगवान विष्णु के दर्शन, उनके चरणों में विराजमान माता लक्ष्मी तथा कमल पर आसीन ब्रह्मा की झांकी ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराई। पूर्व वर्षों में भी रामनगर की लीला के प्रथम दिन रामबाग पोखरे को क्षीरसागर का स्वरूप देकर शेषशैय्या पर भगवान विष्णु की झांकी सजाई जाती रही है।

देवताओं और ऋषियों की व्यथा, भगवान विष्णु की स्तुति तथा पृथ्वी पर धर्म की स्थापना के लिए अवतार की भूमिका को लीला के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। देव स्तुति के दौरान रामभक्तों के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा। रामचरितमानस के भाव के अनुरूप देवताओं की प्रार्थना में यही कामना दिखाई देती है कि प्रभु अवतार लेकर सज्जनों की पीड़ा हरें और अधर्म का अंत करें।

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देवी स्तुति और आकाशवाणी से आगे बढ़ी कथा

प्रथम दिन देवी स्तुति और आकाशवाणी का प्रसंग भी मंचित किया गया। आकाशवाणी के माध्यम से रामावतार की कथा की भूमिका तैयार होती है। यही प्रसंग आगे चलकर अयोध्या में राजा दशरथ के यहां भगवान श्रीराम के जन्म तक पहुंचता है। इस प्रकार रामनगर की रामलीला के पहले दिन रावण के जन्म से शुरू हुई कथा का केंद्र धीरे-धीरे उस दिव्य घटना की ओर बढ़ा, जिसमें भगवान श्रीराम के अवतार का संदेश मिलता है।

रामचरितमानस में भगवान के अवतार का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए तुलसीदास लिखते हैं-

“बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार।
निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार॥”

इसी भावभूमि पर रामनगर की रामलीला आने वाले दिनों में रामजन्म, बाललीला, विश्वामित्र आगमन, सीता स्वयंवर, वनगमन और लंका विजय तक की कथा को क्रमशः आगे बढ़ाएगी। रामनगर में रामलीला केवल संवाद और अभिनय तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरा नगर ही अलग-अलग प्रसंगों के अनुरूप लीला क्षेत्र में बदल जाता है।

बारिश के बीच भी कम नहीं हुआ लीला प्रेमियों का उत्साह

रामनगर में शुक्रवार को मौसम ने भी लीला प्रेमियों की परीक्षा ली। बारिश के बावजूद श्रद्धालु और दर्शक लीला स्थल पर डटे रहे। रामनगर की रामलीला के इतिहास में मौसम की चुनौती के बीच भी परंपरा को आगे बढ़ाने की मिसालें मिलती रही हैं। वर्ष 2026 के आयोजन को लेकर ट्रस्ट की ओर से पहले ही स्पष्ट किया गया है कि यदि वर्षा या किसी अन्य विशेष कारण से किसी दिन की लीला पूरी नहीं हो पाती है तो उसे अगले एक-दो दिनों में पूरा किया जाएगा।

यही वजह है कि रामनगर की रामलीला को यहां के लोगों के लिए केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा से जुड़ा वार्षिक अनुष्ठान माना जाता है। लगभग दो शताब्दियों से चली आ रही इस परंपरा में रामचरितमानस के प्रसंगों को उसी पारंपरिक शैली में प्रस्तुत करने का प्रयास आज भी जारी है। ऐतिहासिक रूप से रामनगर की रामलीला की शुरुआत महाराजा उदित नारायण सिंह के शासनकाल में 1830 के दशक में हुई मानी जाती है।

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कल 26 सितंबर को होगा श्रीराम जन्म और बाललीला का मंचन

रामनगर रामलीला के दूसरे दिन यानी शनिवार, 26 सितंबर को कथा का सबसे महत्वपूर्ण और भावपूर्ण प्रसंग सामने आएगा। जारी कार्यक्रम के अनुसार श्री अवध में शृंगी ऋषि द्वारा कराए गए यज्ञ, श्रीराम सहित चारों भाइयों के जन्म, विराट दर्शन, बाललीला तथा यज्ञोपवीत और मृगया के प्रसंगों का मंचन होगा।

श्रीराम जन्म के अवसर पर रामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाई वातावरण को भक्तिमय बना देगी-

“भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।
हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥”

भगवान श्रीराम के जन्म के साथ अयोध्या में उत्सव का वातावरण, माता कौशल्या की प्रसन्नता और बाल स्वरूप की मनोहारी छवि लीला के माध्यम से प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की बाल लीलाओं तथा आगे के संस्कारों के प्रसंग कथा को अगले चरण में ले जाएंगे।

रामनगर रामलीला के जारी कार्यक्रम के अनुसार 27 सितंबर को विश्वामित्र आगमन, ताड़का-सुबाहु वध, मारीच निरसन, अहिल्या तारण, गंगा दर्शन, मिथिला प्रवेश और श्रीजनक मिलन होगा। 28 सितंबर को जनकपुर दर्शन और फुलवारी का प्रसंग, 29 सितंबर को धनुष यज्ञ एवं परशुराम संवाद और 30 सितंबर को अवध से बारात प्रस्थान तथा जनकपुर में श्रीराम-सीता विवाह का मंचन प्रस्तावित है।

इस तरह पहले दिन रावण जन्म और अधर्म के बढ़ते प्रभाव से शुरू हुई रामकथा अब दूसरे दिन श्रीराम जन्म के साथ धर्म, मर्यादा और आदर्श जीवन की ओर आगे बढ़ेगी। बारिश के बावजूद जिस तरह पहले दिन रामनगर में श्रद्धा और उत्साह दिखाई दिया, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में भी रामलीला के विभिन्न लीलास्थलों पर रामभक्तों और लीला प्रेमियों की बड़ी मौजूदगी देखने को मिलेगी।

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