रामनगर में शास्त्री जयंती पर गूंजा जनसेवा और राष्ट्रनिर्माण का संदेश
वाराणसी: रामनगर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और भारत के महान सपूत पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रनायकों के जीवन और उनके आदर्शों को याद किया गया। कार्यक्रम में वाराणसी कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने दोनों महापुरुषों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए लोगों से उनके आदर्शों को अपने जीवन और सार्वजनिक व्यवहार में उतारने का संकल्प लेने का आह्वान किया। रामनगर की धरती पर आयोजित इस कार्यक्रम में शास्त्री जी की सादगी, ईमानदारी, राष्ट्रभक्ति और जनसेवा के मूल्यों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
शास्त्री जी का जीवन सादगी और ईमानदारी की मिसाल
विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री का पूरा जीवन सादगी, ईमानदारी, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और जनसेवा का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी ने सार्वजनिक जीवन में पद को प्रतिष्ठा का साधन बनाने के बजाय उसे देश और समाज की सेवा का माध्यम माना। उनका प्रसिद्ध मंत्र जय जवान जय किसान देश के जवानों और किसानों के योगदान को सम्मान देने वाली दूरदर्शी सोच का प्रतीक बना। विधायक ने कहा कि रामनगर में शास्त्री जी का पैतृक आवास होना क्षेत्रवासियों के लिए गौरव का विषय है और यह विरासत लोगों को निरंतर राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देती है।
जनप्रतिनिधि का दायित्व जनता के सुख दुख में सहभागी बनना
सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि शास्त्री जी के जीवन से प्रेरणा लेते हुए जनप्रतिनिधियों को यह समझना चाहिए कि जिम्मेदारी केवल किसी पद पर आसीन होने तक सीमित नहीं होती। जनता के सुख दुख में सहभागी बनना और उनकी समस्याओं को सुनकर समाधान की दिशा में प्रयास करना भी जनप्रतिनिधि के दायित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने अपने क्षेत्र में किए जा रहे जनसंपर्क का उल्लेख करते हुए कहा कि वे प्रतिदिन पैदल क्षेत्र में निकलकर लोगों से संवाद करते हैं और जनसुनवाई के माध्यम से उनकी समस्याओं को समझने तथा उनके समाधान का प्रयास करते हैं।
जनता और जनप्रतिनिधि के बीच संवाद को बताया जरूरी
विधायक ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधि और जनता के बीच भय की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। जनता अपने प्रतिनिधि तक सहजता से पहुंचे और अपनी बात खुलकर रख सके, यह स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इसी भावना को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में भी ऐसे बदलाव किए हैं, जिससे आम लोग उनसे सहजता से संवाद कर सकें। उनके अनुसार जनप्रतिनिधि और जनता के बीच सीधा संवाद क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
शास्त्री जयंती पर राष्ट्रनिर्माण का संकल्प लेने का आह्वान
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से आह्वान करते हुए सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि महापुरुषों को केवल जयंती के अवसर पर याद करना पर्याप्त नहीं है। उनके विचारों और आदर्शों को अपने व्यवहार में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने लोगों से शास्त्री जी की जयंती पर सादगी, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के मूल्यों को जीवन में अपनाने तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प लेने की अपील की।
रामनगर की विरासत से जुड़ा रहा कार्यक्रम
रामनगर में आयोजित कार्यक्रम का एक विशेष महत्व इसलिए भी रहा क्योंकि लाल बहादुर शास्त्री का पैतृक आवास इसी क्षेत्र से जुड़ा है। शास्त्री जी की स्मृतियों और उनके जीवन से जुड़े प्रसंग रामनगर की सामाजिक और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे अवसर पर उनके विचारों को याद करना और नई पीढ़ी तक उनके जीवन मूल्यों को पहुंचाना कार्यक्रम का प्रमुख संदेश रहा। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच शास्त्री जी की सादगी और सार्वजनिक जीवन में उनकी प्रतिबद्धता चर्चा का विषय रही।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम की अध्यक्षता राजन श्रीवास्तव ने की। मुख्य वक्ता डॉ कुमुद रंजन रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ अत्रि भारद्वाज उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मनोज श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री के फुफेरे भाई ज्ञान शंकर श्रीवास्तव, भतीजे शिवेन्द्र शास्त्री और बहू श्वेता शास्त्री की उपस्थिति भी रही। कार्यक्रम में अशोक जायसवाल, डॉ अनुप गुप्ता, सृजन श्रीवास्तव, बेनी माधव, रितेश राय, भईया लाल, वीरेंद्र मौर्या, राजकुमार सिंह, रितेश पाल, कुलदीप सेठ, आलोक सिंह, महेंद्र, गोविंद, उदय, जितेंद्र, अनुराग, दिव्यांश, स्वयं और कृष्णा सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
भाजपा कार्यकर्ताओं और रामनगरवासियों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ माताएं बहनें, युवा साथी और बड़ी संख्या में रामनगरवासी शामिल हुए। उपस्थित लोगों ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के जीवन मूल्यों को याद करते हुए राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों पर विचार किया। कार्यक्रम के दौरान शास्त्री जी के विचारों और उनके सार्वजनिक जीवन की सादगी को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया।
शास्त्री जी की विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश
रामनगर में आयोजित यह कार्यक्रम केवल जयंती समारोह तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसमें सार्वजनिक जीवन में नैतिकता, जनसेवा और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी जैसे विषयों पर भी संदेश दिया गया। शास्त्री जी का जीवन यह याद दिलाता है कि सार्वजनिक पद की वास्तविक सार्थकता जनता के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्य के निर्वहन में है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने की भावना व्यक्त की।
रामनगर की धरती पर शास्त्री जयंती का यह आयोजन उनके विचारों और स्मृतियों से जुड़ी उस विरासत को फिर सामने लाया, जिसने इस क्षेत्र को देश के इतिहास में विशेष पहचान दी है। कार्यक्रम में श्रद्धांजलि के साथ जनसेवा, सादगी और राष्ट्रहित का संदेश प्रमुखता से सामने आया। उपस्थित लोगों के बीच यही भावना रही कि महापुरुषों की स्मृतियां तभी जीवंत रहती हैं जब उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों के आचरण का हिस्सा बनें।
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