वाराणसी (रामनगर): प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र रामनगर से एक बेहद दुस्साहसिक और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। रामनगर के वार्ड संख्या 65, मलहिया टोला में शुक्रवार की दरम्यानी रात अज्ञात चोरों ने सरकारी संपत्ति को निशाना बनाते हुए क्षेत्र की जलापूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। बेखौफ बदमाशों ने यहाँ स्थित सरकारी ट्यूबवेल के ताले तोड़कर न केवल परिसर में प्रवेश किया, बल्कि पूरी विद्युत वायरिंग और कीमती केबल उखाड़ ले गए। इस वारदात ने न केवल प्रशासनिक सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है, बल्कि कड़ाके की ठंड के बीच स्थानीय नागरिकों के सामने पानी का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
शनिवार की सुबह जब रोजमर्रा की तरह लोगों ने अपने घरों के नल खोले, तो पानी की एक बूंद न पाकर पूरे मोहल्ले में हड़कंप मच गया। शुरुआत में इसे सामान्य तकनीकी खराबी माना जा रहा था, लेकिन जब जांच की गई तो मंजर देख हर कोई दंग रह गया। चोरों ने इतनी सफाई और निडरता से पूरी केबलिंग गायब कर दी थी कि विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। नगर निगम के अधीन आने वाले इस ट्यूबवेल में हुई इस बड़ी चोरी ने स्थानीय पुलिस और सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि चोरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें अब सरकारी प्रतिष्ठानों और पुलिसिया कार्रवाई का कोई भय नहीं रह गया है।
पार्षद का कड़ा रुख और त्वरित कार्रवाई
इस घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय पार्षद रामकुमार यादव मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने इस कृत्य की घोर निंदा करते हुए इसे जनता की बुनियादी सुविधाओं पर सीधा प्रहार बताया। पार्षद यादव ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने तत्काल संबंधित अधिकारियों को मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराने और दोषियों की पहचान कर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पार्षद ने कहा, “यह महज चोरी नहीं, बल्कि हजारों लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ है। हम प्राथमिकता के आधार पर नई वायरिंग कराकर जल्द से जल्द जलापूर्ति बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं।”
टैंकरों से राहत, सुरक्षा पर उठते सवाल
जब तक ट्यूबवेल की मरम्मत का कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक के लिए पार्षद रामकुमार यादव की पहल पर नगर निगम ने क्षेत्र में पानी के टैंकरों की व्यवस्था की है। मोहल्ले में टैंकर पहुँचते ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हालांकि, वैकल्पिक व्यवस्था से तात्कालिक राहत तो मिल गई है, लेकिन स्थानीय जनता में सुरक्षा को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है। लोगों का तर्क है कि यदि भीड़भाड़ वाले रिहायशी इलाकों में स्थित सरकारी ट्यूबवेल सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या होगा? नागरिकों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संवेदनशील सरकारी केंद्रों पर गार्ड या सीसीटीवी कैमरों की पुख्ता व्यवस्था की जाए।
रामनगर की यह घटना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। अब देखना यह होगा कि पुलिस इन शातिर चोरों तक कितनी जल्दी पहुँचती है और क्षेत्र की जनता को इस जल संकट से पूर्ण रूप से कब तक निजात मिलती है।
