रामनगर में शहीद पार्क पीएससी से मां दुर्गा मंदिर तक जर्जर सड़क बनी जानलेवा सावन से पहले मरम्मत की उठी मांग
रामनगर(वाराणसी): रामनगर क्षेत्र में शहीद पार्क पीएससी से दुर्गा पोखरा स्थित मां दुर्गा मंदिर तक जाने वाला मुख्य मार्ग इन दिनों पूरी तरह जर्जर हो चुका है। सड़क पर जगह जगह एक से दो फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं जिससे प्रतिदिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दो पहिया वाहन चालक सबसे अधिक हादसों का शिकार हो रहे हैं जबकि पैदल चलने वाले श्रद्धालु, महिलाएं, बुजुर्ग और स्कूली बच्चों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के कारण गड्ढों में पानी भर जाने से खतरा कई गुना बढ़ गया है। लोगों का आरोप है कि नगर निगम और लोक निर्माण विभाग को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
सावन में लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए बढ़ी चिंता
दुर्गा पोखरा स्थित मां दुर्गा मंदिर रामनगर की आस्था का प्रमुख केंद्र है। सावन माह, नवरात्र और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन पूजन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर तक पहुंचने वाला यही प्रमुख मार्ग वर्तमान में बदहाल स्थिति में है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सावन शुरू होने से पहले सड़क का निर्माण नहीं कराया गया तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए इस मार्ग का तत्काल निर्माण कराया जाना अत्यंत आवश्यक है।
मां दुर्गा मंदिर की पौराणिक महिमा और धार्मिक महत्व
रामनगर की दुर्गा पोखरा पर स्थित मां दुर्गा मंदिर वर्षों से श्रद्धा और विश्वास का केंद्र रहा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा के इस प्राचीन धाम में सच्चे मन से की गई प्रार्थना भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती है। नवरात्र के नौ दिनों में यहां भव्य पूजा अर्चना और धार्मिक आयोजन होते हैं। सावन के दौरान भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन कर सुख समृद्धि और परिवार की मंगल कामना करते हैं। यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि रामनगर की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने उठाई आवाज
रामपुर वार्ड के पार्षद लल्लन सोनकर ने कहा कि यह सड़क वर्षों से क्षेत्र के लोगों की जीवनरेखा है। प्रतिदिन हजारों लोग इसी मार्ग से आवागमन करते हैं लेकिन सड़क की हालत बेहद खराब हो चुकी है। उन्होंने संबंधित विभागों से तत्काल मरम्मत और पुनर्निर्माण कराने की मांग करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
पुराना रामनगर के पार्षद रामकुमार यादव ने कहा कि यह मार्ग लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है। कई बार अधिकारियों का ध्यान इस ओर दिलाया गया लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सड़क का निर्माण नहीं हुआ तो भविष्य में बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रमुख समाजसेवी एवं पेशे से इंजीनियर अमित राय ने बताया कि सड़क की तकनीकी स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। जगह जगह सड़क की परत उखड़ गई है और गहरे गड्ढे बन चुके हैं। उन्होंने मांग की कि लोक निर्माण विभाग और नगर निगम संयुक्त रूप से इस मार्ग का सर्वे कराकर उच्च गुणवत्ता के साथ स्थायी सड़क का निर्माण कराएं ताकि वर्षों तक लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
युवा नेता आशीष राय ने मांग की कि सावन शुरू होने से पहले इस सड़क का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर कराया जाए। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन श्रद्धालु और स्थानीय लोग जान जोखिम में डालकर इस मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं। जनहित के इस मुद्दे पर प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
स्थानीय नागरिकों में बढ़ रहा आक्रोश
उमेश सोनकर, सुरेश यादव, आनंद यादव, आशीष यादव समेत बड़ी संख्या में युवाओं और नागरिकों ने भी सड़क की बदहाल स्थिति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बरसात में सड़क पूरी तरह तालाब जैसी दिखाई देती है जिससे वाहन चालकों को गड्ढों का अंदाजा नहीं लग पाता और दुर्घटनाएं होती रहती हैं। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ तो क्षेत्रवासी जनहित में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
अब जिम्मेदार विभागों की परीक्षा
यह केवल एक सड़क का मामला नहीं बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा, धार्मिक आस्था और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय है। विकास की वास्तविक तस्वीर धरातल पर दिखाई देने वाले कार्यों से तय होती है। जब प्रमुख धार्मिक स्थल तक पहुंचने वाला मार्ग ही बदहाल हो जाए तो यह व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन जाता है। सावन शुरू होने में अब अधिक समय नहीं बचा है। ऐसे में जिला प्रशासन, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और जनप्रतिनिधियों से क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि बिना किसी देरी के इस सड़क का पुनर्निर्माण कराया जाए ताकि श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके। जनहित से जुड़े इस मुद्दे पर समय रहते कार्रवाई होना ही प्रशासन की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का सबसे बड़ा प्रमाण होगा।
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