सोनभद्र खदान हादसे में मजदूरों को बचाने वाले NDRF जवान वाराणसी में सम्मानित

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Dilip Kumar
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सोनभद्र खदान हादसे में बचाव कार्य करने वाले NDRF जवानों का वाराणसी में सम्मान

300 फीट गहरी खदान में फंसे मजदूरों को बचाने वाले NDRF जवान सम्मानित

वाराणसी। सोनभद्र जनपद के ओबरा थाना क्षेत्र स्थित बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में हुए भीषण हादसे के दौरान अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देने वाली राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की 11वीं वाहिनी को वाराणसी में सम्मानित किया गया। सोमवार 09.02.2026 को जोनल पुलिस कार्यालय वाराणसी में आयोजित सम्मान समारोह में अपर पुलिस महानिदेशक वाराणसी जोन पीयूष मोर्डिया ने NDRF के अधिकारियों और जवानों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनके साहसिक कार्य की सराहना की।

गौरतलब है कि 15.11.2025 को सोनभद्र के बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक धंस गया था। इस दुर्घटना में कई मजदूर खदान के भीतर पत्थरों और मलबे के नीचे दब गए थे। खदान लगभग 300 फीट गहरी थी, जिसमें कई स्थानों पर पानी भरा हुआ था और अंदर घोर अंधकार फैला हुआ था। हालात इतने भयावह थे कि बचाव कार्य किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकता था।

ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की 11वीं वाहिनी वाराणसी ने मोर्चा संभाला। जवानों ने दिन रात लगातार अभियान चलाते हुए जोखिम की परवाह किए बिना खदान के भीतर उतरकर फंसे श्रमिकों तक पहुंच बनाई। सीमित ऑक्सीजन, पानी से भरे रास्ते और अस्थिर चट्टानों के बीच काम करते हुए NDRF टीम ने सूझबूझ और तकनीकी दक्षता का परिचय दिया। उनके साहस और धैर्य के कारण कई मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका, जिससे अनेक परिवारों की जान में जान आई।

सम्मान समारोह के दौरान अपर पुलिस महानिदेशक पीयूष मोर्डिया ने कहा कि NDRF के जवानों ने जिस तरह विषम परिस्थितियों में अपने कर्तव्य का निर्वहन किया, वह पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि आपदा के समय NDRF देश की सबसे मजबूत और भरोसेमंद ताकत बनकर सामने आती है।

इस अवसर पर NDRF के उपमहानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा और उप सेनानायक नवीन शर्मा भी मौजूद रहे। उन्होंने जवानों के परिश्रम और समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह सम्मान पूरी टीम के मनोबल को और मजबूत करेगा। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों और कर्मियों के बीच एकजुटता और गर्व का भाव स्पष्ट दिखाई दिया।

बिल्ली मारकुंडी खनन हादसे में किया गया यह रेस्क्यू ऑपरेशन न केवल तकनीकी दृष्टि से जटिल था, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ा हुआ था। आज जब उन बहादुर जवानों को सम्मानित किया गया, तो यह संदेश भी दिया गया कि आपदा के समय मानव जीवन की रक्षा करने वाले हाथों को समाज कभी नहीं भूलता।