SPEL 3.0: वाराणसी में 155 युवाओं को पुलिसिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण, 80% छात्राएं शामिल

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SPEL 3.0 के अंतर्गत वाराणसी के 18 थानों में युवाओं को पुलिसिंग का प्रशिक्षण

SPEL 3.0 के तहत 18 थानों में 155 युवाओं को मिल रहा पुलिसिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण, 80 प्रतिशत प्रतिभागी छात्राएं

कमिश्नरेट वाराणसी में युवाओं को पुलिस व्यवस्था से जोड़ने और उन्हें कानून तथा पुलिसिंग की वास्तविक समझ देने के उद्देश्य से SPEL 3.0 यानी स्टूडेंट पुलिस एक्सपीरिएंशल लर्निंग प्रोग्राम संचालित किया जा रहा है। पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी के निर्देशन तथा अपर पुलिस उपायुक्त महिला अपराध के नेतृत्व में चल रहे इस कार्यक्रम के तहत जनपद के 18 थानों में कुल 155 युवाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत प्रतिभागी छात्राएं हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह पहल युवाओं विशेषकर छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ाने, कानून के प्रति जागरूकता विकसित करने और पुलिस तथा समाज के बीच सहभागिता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को पुलिसिंग की जमीनी कार्यप्रणाली से लेकर उच्च प्रशासनिक स्तर तक के कार्यों का प्रत्यक्ष अनुभव कराया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को बीट पुलिसिंग चौकी और थाना स्तर की कार्यशैली के साथ साथ सर्किल और जिला स्तर पर पुलिस अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारियों की जानकारी दी जा रही है। इसका उद्देश्य यह समझाना है कि पुलिस व्यवस्था किस प्रकार समन्वय और अनुशासन के साथ कार्य करती है।

प्रशिक्षण की शुरुआत में युवाओं को पुलिस विभाग की संगठनात्मक संरचना से परिचित कराया गया। उन्हें बीट चौकी और हल्का व्यवस्था थाना सर्किल शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र जिला रेंज जोन और कमिश्नरेट स्तर की व्यवस्था के साथ साथ प्रदेश स्तर की पुलिस संरचना की जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त पुलिस यूनिफॉर्म और जिला तथा राज्य स्तर पर कार्यरत विभिन्न पुलिस प्रतिष्ठानों के बारे में भी विस्तार से बताया गया।

थाना स्तर पर चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को थाना क्षेत्र का विवरण बीट और चौकी हल्का विभाजन तथा थाना के विभिन्न पटल और शाखाओं की कार्यप्रणाली समझाई गई। युवाओं को एफआईआर लेखन जनरल डायरी अपराध रजिस्टर डाक व्यवस्था और अन्य अभिलेखों की जानकारी दी गई। इस दौरान उन्होंने थानों का भ्रमण कर पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों से संवाद भी किया जिससे उन्हें पुलिस के दैनिक कार्यों की प्रत्यक्ष समझ मिली।

सामान्य विधिक ज्ञान के अंतर्गत प्रतिभागियों को भारतीय न्याय संहिता बीएनएस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता बीएनएसएस और भारतीय साक्ष्य अधिनियम बीएसए सहित अन्य प्रमुख कानूनों के बारे में बताया गया। साथ ही आरोपी के अधिकार गिरफ्तारी तलाशी और जब्ती जमानत रिमांड आरोप पत्र तथा न्यायालयी प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया गया ताकि कानून की बुनियादी समझ विकसित हो सके।

कार्यक्रम में महिलाओं और बच्चों से संबंधित अपराधों पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया। युवाओं को इनसे जुड़े कानूनों विशेष प्रावधानों विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मिशन शक्ति जैसे अभियानों की जानकारी दी गई। इसके अलावा मादक पदार्थों मानव तस्करी और अन्य विशेष अपराधों से संबंधित अधिनियमों पर भी जागरूक किया गया।

थाना कार्यालय की कार्यप्रणाली को समझाने के लिए प्रतिभागियों को एसएचओ कार्यालय आगंतुक पटल महिला हेल्प डेस्क और सीसीटीएनएस जैसी आधुनिक तकनीकी प्रणालियों से परिचित कराया गया। यह प्रशिक्षण संबंधित अधिकारियों की देखरेख में पूरी तरह व्यावहारिक रूप से दिया जा रहा है।

घटनास्थल निरीक्षण के दौरान युवाओं को कम से कम दो घटनास्थलों का भ्रमण कराया गया जहां उन्हें घटनास्थल संरक्षण पूछताछ साक्ष्य संकलन विधि विज्ञान प्रयोगशाला की भूमिका गवाह सुरक्षा और केस डायरी लेखन की जानकारी दी गई। इसके साथ ही मकर संक्रांति के अवसर पर घाटों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भीड़ प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दिया गया जिसमें मेला जुलूस और धार्मिक सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान बंदोबस्त ड्यूटी तथा आमजन से संवाद के तरीकों को समझाया गया।

इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को बीट आरक्षियों के साथ बीट पुलिसिंग महिला बीट गश्त और पिकेट ड्यूटी तथा थाना स्तर पर संचालित कम्युनिटी पुलिसिंग कार्यक्रमों से भी जोड़ा गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम के आगामी चरण में युवाओं को सामाजिक महत्व के विभिन्न संस्थानों सुधार गृहों और आश्रमों का भ्रमण कराया जाएगा। साथ ही जिला पुलिस मुख्यालय स्तर पर उन्हें उच्च स्तरीय अनुभवात्मक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा ताकि वे पुलिसिंग को एक जिम्मेदार और संवेदनशील सेवा के रूप में समझ सकें।