10 मिनट की देरी पड़ी भारी: सीबीएसई हाईस्कूल इंग्लिश परीक्षा से वंचित रह गई छात्रा
क्षेत्र में शनिवार को आयोजित सीबीएसई हाईस्कूल की इंग्लिश परीक्षा के दौरान एक छात्रा को मात्र 10 मिनट की देरी के कारण परीक्षा से वंचित रहना पड़ा। निर्धारित समय के बाद परीक्षा केंद्र पहुंचने पर विद्यालय प्रशासन ने प्रवेश देने से इनकार कर दिया, जिससे छात्रा का पूरा पेपर छूट गया। घटना के बाद परीक्षा केंद्र के बाहर भावुक दृश्य देखने को मिला।
10:10 बजे पहुंची, गेट पर ही रोक दिया गया
जानकारी के अनुसार उमरहा निवासी कक्षा 10 की छात्रा नाजिया बानो एंबीशन स्कूल की छात्रा हैं। उनका परीक्षा केंद्र चौबेपुर स्थित डलिम्स सनबीम स्कूल में बनाया गया था। परीक्षा सुबह निर्धारित समय पर शुरू हो चुकी थी। छात्रा करीब 10:10 बजे परीक्षा केंद्र पहुंची, लेकिन गेट पर मौजूद कर्मियों ने निर्धारित समय बीत जाने का हवाला देते हुए उसे अंदर प्रवेश नहीं दिया।
बताया गया कि बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित समय के बाद किसी भी परीक्षार्थी को परीक्षा कक्ष में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती। इसी आधार पर विद्यालय प्रशासन ने छात्रा को परीक्षा में बैठने से रोक दिया।
रास्ते में गाड़ी पंचर होने से हुई देरी
परिजनों के अनुसार परीक्षा केंद्र आते समय उनकी गाड़ी रास्ते में पंचर हो गई थी। इस कारण वे समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सके। काफी प्रयास के बावजूद देरी हो गई। जब छात्रा को प्रवेश नहीं मिला तो वह गेट पर ही अपने पिता से लिपटकर रोने लगी। मौके पर मौजूद लोगों ने भी इस दृश्य को देखकर सहानुभूति जताई।
पुलिस ने किया मानवीय आधार पर अनुरोध
घटना की सूचना मिलने पर थानाध्यक्ष इन्द्रेश कुमार परीक्षा केंद्र पहुंचे। उन्होंने विद्यालय के प्रधानाचार्य से बातचीत कर मानवीय आधार पर छात्रा को परीक्षा में शामिल करने का अनुरोध किया। हालांकि विद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बोर्ड के नियमों में समय सीमा को लेकर कड़ाई है और वे निर्देशों का उल्लंघन नहीं कर सकते।
काफी प्रयास के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकल सका, तो थानाध्यक्ष ने छात्रा और उसके परिजनों को समझाकर घर भेज दिया। घटना के बाद क्षेत्र में परीक्षा प्रणाली की सख्ती और समय प्रबंधन को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
समय पालन की सख्ती और मानवीय पहलू पर बहस
इस घटना ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली में समय पालन की अनिवार्यता को सामने रखा है। जहां एक ओर बोर्ड के नियमों का पालन आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर आकस्मिक परिस्थितियों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल छात्रा का एक महत्वपूर्ण पेपर छूट जाने से उसका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो सकता है। परिजन इस घटना से काफी आहत हैं। यह मामला परीक्षा केंद्रों तक समय से पहुंचने और संभावित देरी की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था रखने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
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