माघ मेला विवाद: उमा भारती बोलीं- शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगना प्रशासन का अधिकार नहीं

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Savan Nayak
मेरा नाम सावन कुमार है, और मैं न्यूज रिपोर्ट में वरिष्ठ क्राइम संवाददाता के रूप में कार्यरत हूँ। पत्रकारिता के प्रति मेरी गहरी रुचि है, और...
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प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य-प्रशासन विवाद पर उमा भारती की प्रतिक्रिया।

प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच चल रहा विवाद फिलहाल थमता नहीं दिख रहा है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए हैं और मामला लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी बीच मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता उमा भारती का बयान सामने आया है, जिसने इस विवाद को नया आयाम दे दिया है।

उमा भारती ने प्रशासन द्वारा शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगने को पूरी तरह अनुचित बताया है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के शंकराचार्य होने या न होने का निर्णय करना प्रशासन का अधिकार क्षेत्र नहीं है। यह अधिकार केवल शंकराचार्य परंपरा और विद्वत परिषद को ही है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि उनके इस बयान को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरोध के रूप में न देखा जाए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि उन्हें विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान अवश्य निकलेगा। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगना उनकी मर्यादा और अधिकारों के दायरे से बाहर है।

बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज होती देख उमा भारती ने एक और स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि योगी विरोधी किसी तरह की खुशफहमी न पालें। उनका कथन योगी आदित्यनाथ के खिलाफ नहीं है और वह उनके प्रति सम्मान, स्नेह और शुभकामनाओं का भाव रखती हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को कानून व्यवस्था पर सख्ती से नियंत्रण करना चाहिए, लेकिन किसी के शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगना मर्यादा का उल्लंघन है।

उधर, इस पूरे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश में अधिकारियों के इस्तीफों का सिलसिला भी जारी है। हाल ही में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने शंकराचार्य और यूजीसी के समर्थन में इस्तीफा दिया था। इसके बाद अयोध्या में तैनात जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री के समर्थन और शंकराचार्य के विरोध में अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

गौरतलब है कि प्रयागराज माघ मेला हर साल धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में शंकराचार्य और प्रशासन के बीच उपजा यह विवाद न केवल धार्मिक परंपराओं बल्कि प्रशासनिक सीमाओं और अधिकारों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और शंकराचार्य पक्ष के बीच इस मुद्दे पर कोई सहमति कब और कैसे बनती है।

मेरा नाम सावन कुमार है, और मैं न्यूज रिपोर्ट में वरिष्ठ क्राइम संवाददाता के रूप में कार्यरत हूँ। पत्रकारिता के प्रति मेरी गहरी रुचि है, और मैं हमेशा निष्पक्ष और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने का प्रयास करता हूँ। समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर करना और जनता की आवाज़ को सही मंच तक पहुँचाना मेरा उद्देश्य है।