लखनऊ: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मौसम ने करवट ले ली है। आज मंगलवार सुबह से ही राज्य के कई हिस्सों में अंधेरा छाया रहा। राजधानी लखनऊ और औद्योगिक शहर कानपुर में सुबह 10 बजे तक घने बादलों के कारण दिन में रात जैसा माहौल बना रहा। काले बादलों के बीच आंधी जैसी तेज हवाएं चलीं और रिमझिम बारिश होती रही, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई और ठंड का असर बढ़ गया।
इससे पहले आज तड़के औरैया, जालौन समेत करीब 10 जिलों में झमाझम बारिश हुई। उन्नाव, चित्रकूट और इटावा में करीब आधे घंटे तक ओलावृष्टि दर्ज की गई। कई इलाकों में सड़कों पर ओलों की सफेद चादर बिछ गई, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के चलते खेतों में खड़ी फसलें गिर गईं। खराब मौसम के कारण लोग घरों में दुबके रहे, जबकि जरूरी काम से बाहर निकले लोगों को छाता और रेनकोट का सहारा लेना पड़ा।
वहीं, अलीगढ़, मैनपुरी, बुलंदशहर समेत लगभग 20 जिलों में घना कोहरा छाया रहा। कई स्थानों पर दृश्यता शून्य के करीब पहुंच गई, जिससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया। उन्नाव समेत पांच जिलों में अलग-अलग स्थानों पर 10 से अधिक वाहन आपस में टकरा गए। आगरा एक्सप्रेसवे पर यात्रियों से भरी एक बस और ट्रक की टक्कर में कई लोग घायल हो गए, जिनमें एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।
कोहरे और खराब मौसम का असर परिवहन व्यवस्था पर भी साफ नजर आया। सड़क यातायात के साथ-साथ रेल और हवाई सेवाएं भी प्रभावित रहीं। लखनऊ समेत कई प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर 25 से अधिक ट्रेनें देरी से पहुंचीं और रवाना हुईं। वहीं, एयरपोर्ट पर भी कई उड़ानों में विलंब दर्ज किया गया, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मौसम क्यों बदला?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तराखंड और नेपाल में हो रही भारी बर्फबारी का सीधा असर उत्तर प्रदेश के तराई और मैदानी इलाकों पर पड़ रहा है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. एस.एन. सुनील पांडेय ने बताया कि देर रात पश्चिमी विक्षोभ और एक एंटी साइक्लोन के मिलने से बादलों की एक मजबूत शृंखला बन गई है। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी मिलने के कारण बारिश और ओलावृष्टि की स्थिति बनी। उनके मुताबिक, नए पश्चिमी विक्षोभ के असर से पश्चिमी यूपी में शुरू हुई बूंदाबांदी का दायरा बुंदेलखंड, विंध्य क्षेत्र और प्रयागराज मंडल तक फैल सकता है। यह मौसम परिवर्तन 4 फरवरी तक बने रहने की संभावना है, इसके बाद कोहरा छंटने और तापमान में हल्की गिरावट आने की उम्मीद है।
किसानों की बढ़ी चिंता
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, तेज हवाओं और ओलों के कारण गेहूं की फसल गिर गई है, जिससे दाने हल्के होने और उत्पादन में करीब 20 प्रतिशत तक की कमी की आशंका है। गन्ने की फसल भी कई इलाकों में गिर गई है, जिससे उसके खराब होने और पैदावार घटने का खतरा बढ़ गया है।
सरसों और सब्जियों की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में अधिक पानी भरने से सरसों की फलियां जमीन पर गिर गई हैं, जिससे दानों के खराब होने का खतरा है। सब्जी उत्पादक किसानों पर इस बारिश का सबसे ज्यादा असर पड़ा है। मौसम की इस मार से किसान अब नुकसान के आकलन और राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
