एसआईआर ड्यूटी में तैनात बीएलओ की बीमारी से मौत छुट्टी की गुहार के बावजूद काम में लगे रहने का आरोप
वाराणसी: विशेष गहन पुनरीक्षण एसआईआर की ड्यूटी में तैनात एक बीएलओ की बुधवार सुबह बीमारी के चलते मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि गंभीर रूप से बीमार होने के बावजूद उन्हें ड्यूटी से राहत नहीं मिली और इलाज के अभाव में उन्होंने तड़पते हुए दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिवार में शोक और आक्रोश का माहौल है और ग्रामीण भी मामले को लेकर दुख और नाराजगी जता रहे हैं।
चौबेपुर के कौवापुर गांव के निवासी थे अजगर अली
मृतक की पहचान चौबेपुर थाना क्षेत्र के कौवापुर गांव निवासी बीएलओ शेख मुहम्मद अजगर अली के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। परिवार के लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों से छुट्टी लेकर इलाज कराने की अनुमति मांगी थी लेकिन उनकी गुहार पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। परिजनों के अनुसार बीमारी की स्थिति में भी उन्हें लगातार विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े कार्यों में लगाया जाता रहा जिससे उनकी सेहत पर लगातार असर पड़ता गया।
डॉक्टर ने ज्वाइंडिस के गंभीर संक्रमण की जताई थी आशंका
परिवार के मुताबिक जब उनकी तबीयत अधिक बिगड़ने लगी तो उन्हें स्थानीय डॉक्टर के पास दिखाया गया। जांच के बाद डॉक्टर ने ज्वाइंडिस यानी पीलिया के गंभीर संक्रमण की आशंका जताई थी और तुरंत अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज कराने की सलाह दी थी। इसके बावजूद परिस्थितियों और ड्यूटी के दबाव के कारण उन्हें समय पर समुचित इलाज नहीं मिल सका। परिवार का कहना है कि इसी कारण उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई और अंततः बुधवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।
छुट्टी की मांग को लेकर परिजनों ने लगाए आरोप
परिजनों का आरोप है कि अजगर अली ने कई बार अधिकारियों और अपने सुपरवाइजर से छुट्टी की मांग की थी। उनका कहना है कि बीमारी को गंभीरता से लेने के बजाय इसे टाल दिया गया और उन्हें भरोसा दिया गया कि विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने और मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद उन्हें अवकाश दे दिया जाएगा। हालांकि इससे पहले ही उनकी हालत इतनी बिगड़ गई कि बुधवार सुबह उनकी मौत हो गई।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
अचानक हुई इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतक अपने पीछे पत्नी और तीन बेटों को छोड़ गए हैं। घर में कोहराम मचा हुआ है और परिजन गहरे सदमे में हैं। गांव के लोगों ने भी इस घटना पर दुख जताया है और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उन्हें इलाज और आराम का अवसर मिल जाता तो संभव है कि उनकी जान बचाई जा सकती थी।
चुनावी ड्यूटी में लगे कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों पर उठे सवाल
इस घटना ने चुनावी कार्यों में लगे कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और परिचितों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में लगे कर्मचारियों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होती है लेकिन उनके स्वास्थ्य और मानवीय परिस्थितियों को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए। लोगों का मानना है कि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं से बचने के लिए कर्मचारियों की बीमारी और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और समय पर निर्णय लेना आवश्यक है।
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