वाराणसी: डाफी उपकेंद्र पर ब्रेकर गार्ड की पहल अब लाइनमैन की सुरक्षा में नहीं होगी कोई चूक
वाराणसी: बिजली लाइनों की मरम्मत के दौरान होने वाले हादसों को रोकने की दिशा में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम उठाया है। शहर के डाफी स्थित 33 11 केवी विद्युत उपकेंद्र पर ब्रेकर गार्ड नामक अत्याधुनिक सुरक्षा डिवाइस का सफल परीक्षण किया गया है। इस पहल का स्थलीय निरीक्षण स्वयं निगम के प्रबंध निदेशक शंभू कुमार ने किया। यह कदम न केवल तकनीकी रूप से उन्नत है बल्कि लाइनमैन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है।
आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों ने विकसित किया डिवाइस
डाफी उपकेंद्र पर स्थापित यह डिवाइस देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों द्वारा विकसित किया गया है। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और सुरक्षित बनाती है जिससे मानवीय चूक की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है। अब तक फीडर के शटडाउन और पुनः चालू करने की प्रक्रिया कागजी औपचारिकताओं या मौखिक सूचना पर आधारित होती थी जिससे कई बार गलतफहमी या संचार की कमी के कारण दुर्घटनाएं हो जाती थीं।
ओटीपी आधारित सुरक्षा प्रणाली से बढ़ी विश्वसनीयता
नई प्रणाली में ओटीपी आधारित सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत जब तक संबंधित लाइनमैन के मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी को सिस्टम में दर्ज नहीं किया जाएगा तब तक फीडर को चालू नहीं किया जा सकेगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि मरम्मत कार्य पूर्ण होने और लाइनमैन की पुष्टि के बिना बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होगी। यह व्यवस्था कार्यस्थल पर मौजूद कर्मचारियों को एक अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है और हादसों की संभावना को लगभग समाप्त कर देती है।
एमडी ने किया निरीक्षण और सराहा नवाचार
निरीक्षण के दौरान प्रबंध निदेशक शंभू कुमार ने स्वयं डिवाइस की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझा और तकनीकी पहलुओं का परीक्षण किया। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कर्मचारियों की सुरक्षा निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस प्रकार की तकनीकें कार्यस्थल को अधिक सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनकी तकनीकी समझ और अनुभव के कारण निरीक्षण के दौरान कई उपयोगी सुझाव भी सामने आए।
सफल होने पर पूरे पूर्वांचल में लागू होगा मॉडल
उन्होंने संकेत दिया कि यदि डाफी उपकेंद्र पर यह पायलट प्रोजेक्ट पूरी तरह सफल रहता है तो इस मॉडल को पूर्वांचल क्षेत्र के अन्य उपकेंद्रों पर भी लागू किया जाएगा। इससे न केवल लाइनमैनों का मनोबल बढ़ेगा बल्कि शून्य दुर्घटना के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी। इस तरह की पहलें ऊर्जा क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को नई दिशा देने का काम करेंगी।
तकनीक और सुरक्षा का संतुलित उदाहरण
ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी विकास के बीच यह पहल एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में सामने आई है जहां आधुनिक तकनीक और मानवीय संवेदनशीलता का संतुलित समावेश देखने को मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू किया गया तो यह पूरे प्रदेश में विद्युत कर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
LATEST NEWS