महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र और होमी भाभा कैंसर अस्पताल ने 7वें स्थापना दिवस पर सेवा, शिक्षा और अनुसंधान की प्रतिबद्धता दोहराई
वाराणसी स्थित महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र (एमपीएमएमसीसी) और होमी भाभा कैंसर अस्पताल (एचबीसीएच) ने अपने सातवें स्थापना दिवस पर कैंसर उपचार, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराया। वर्ष 2019 में लोकार्पण के बाद से संस्थान ने पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को उन्नत और सुलभ उपचार उपलब्ध कराने में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
दो दिवसीय कार्यक्रम के साथ स्थापना दिवस समारोह
स्थापना दिवस के अवसर पर 21 और 22 फरवरी को दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। 21 फरवरी को सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जबकि 22 फरवरी को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ समारोह सम्पन्न होगा। इस अवसर पर देशभर से आए ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों और चिकित्सकों ने कैंसर उपचार में हो रहे नवीन अनुसंधान और तकनीकी प्रगति पर चर्चा की।
सीएमई कार्यक्रम का उद्घाटन काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने किया। उन्होंने ‘महामना ओरेशन’ के दौरान कैंसर चिकित्सा के बदलते स्वरूप और संस्थान की भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एस. एन. संखवार और वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. हरित चतुर्वेदी सहित कई विशेषज्ञों ने भाग लिया।
1.5 लाख से अधिक नए मरीजों का पंजीकरण
संस्थान के निदेशक प्रो. सत्यजीत प्रधान ने बताया कि 2018 में जहां 6,307 नए मरीजों का पंजीकरण हुआ था, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 27,731 हो गई। स्थापना के बाद से अब तक कुल 1.5 लाख से अधिक नए मरीजों का पंजीकरण किया जा चुका है। यह वृद्धि क्षेत्र में कैंसर उपचार की बढ़ती आवश्यकता और संस्थान पर जनता के भरोसे को दर्शाती है।
50,000 आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को 500 करोड़ की सहायता
संस्थान ने आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के उपचार को प्राथमिकता दी है। अब तक लगभग 50,000 जरूरतमंद मरीजों को विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी योजनाओं के माध्यम से करीब 500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इससे कई परिवारों को महंगे उपचार के आर्थिक बोझ से राहत मिली है।
83,372 सर्जरी और उन्नत तकनीकी सुविधाएं
पिछले सात वर्षों में अस्पताल में 83,372 सर्जरी की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त 19,706 मरीजों को रेडियोथेरेपी और 5,53,377 साइकल कीमोथेरेपी प्रदान की गई है। कैंसर की प्रारंभिक पहचान के लिए सामुदायिक और अस्पताल आधारित स्क्रीनिंग कार्यक्रमों को भी मजबूत किया गया है।
तकनीकी क्षेत्र में संस्थान पूर्वी उत्तर प्रदेश का पहला केंद्र बन गया है, जहां कैंसर सर्जरी के लिए रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। वर्ष 2025 में संस्थान को दो लिनियर एक्सेलेरेटर, एक रोबोटिक सर्जरी यूनिट और एक सीटी स्कैन मशीन प्राप्त हुई, जिससे उपचार की गुणवत्ता और सटीकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
शिक्षा और अनुसंधान में विस्तार
संस्थान ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। रेडियोडायग्नोसिस में एमडी तथा पैलिएटिव मेडिसिन में डीएनबी जैसे नए पाठ्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं। अनुसंधान को संस्थान की कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है, जिससे साक्ष्य आधारित उपचार पद्धतियों को बढ़ावा मिल रहा है।
सात वर्षों की इस यात्रा में एमपीएमएमसीसी और एचबीसीएच ने सेवा, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में संतुलित विकास का उदाहरण प्रस्तुत किया है। संस्थान भविष्य में वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित ऑन्कोलॉजी केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में अग्रसर है।
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