कफ सिरप तस्करी से शराब कारोबार तक काले धन का जाल हवाला नेटवर्क में महिलाओं की भूमिका उजागर
वाराणसी: कफ सिरप तस्करी से अर्जित काले धन को वैध कारोबार में खपाने के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। कोतवाली पुलिस ने इस मामले में हवाला कारोबारी वैभव जायसवाल से जुड़े तंत्र की जांच करते हुए उसकी मां और पत्नी सहित पांच महिलाओं को गिरफ्तार किया। हालांकि पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में अदालत ने न्यायिक रिमांड देने से इनकार कर दिया जिसके बाद सभी आरोपित महिलाओं को रिहा कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने अवैध तस्करी और हवाला नेटवर्क की जटिलता के साथ साथ पारिवारिक संबंधों के दुरुपयोग की ओर भी संकेत किया है।
पुलिस जांच में सामने आया संगठित नेटवर्क
कोतवाली के एसीपी विजय प्रताप सिंह के अनुसार गिरफ्तार महिलाओं में नवापुरा निवासी राधिका जायसवाल जो वैभव की मां हैं और उसकी पत्नी शिवांगी जायसवाल के अलावा राजघाट भारद्वाजी टोला की ऊषा देवी कायस्थ टोला की रेखा देवी और बबिता सिंह शामिल हैं। जांच में यह तथ्य सामने आया कि इन महिलाओं के नाम पर शराब की दुकानों के लाइसेंस लिए गए थे जिनके जरिए अवैध धन को वैध दिखाने का प्रयास किया गया।
लॉटरी सिस्टम के जरिए लाइसेंस हासिल करने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार सोनभद्र जेल में बंद शैली ट्रेडर्स के प्रोपराइटर भोला प्रसाद जायसवाल ने एक सुनियोजित लॉटरी प्रणाली के माध्यम से इन महिलाओं के नाम पर अंग्रेजी शराब की दुकानों के लाइसेंस हासिल किए थे। इन दुकानों में लगाई गई पूंजी के स्रोत को लेकर संदेह उत्पन्न हुआ जिसके बाद पुलिस ने गहन जांच शुरू की।
हवाला के जरिए धन का स्थानांतरण
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कफ सिरप तस्करी से अर्जित धन को पहले हवाला चैनल के माध्यम से स्थानांतरित किया जाता था और फिर उसे शराब कारोबार में निवेश कर वैध रूप दिया जाता था। पूछताछ में महिलाओं ने स्वीकार किया कि वे लाइसेंसी दुकानों की अनुज्ञापी हैं लेकिन पूंजी की व्यवस्था शुभम और भोला प्रसाद द्वारा की गई थी जो अवैध स्रोतों से जुड़ी बताई जा रही है।
वैभव जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद खुलीं परतें
पिछले सप्ताह भगोड़े शुभम जायसवाल के करीबी वैभव जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद इस नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं। जांच में यह भी सामने आया कि शुभम और उसके पिता भोला प्रसाद ने कफ सिरप तस्करी से अर्जित धन को शराब कारोबार में लगाने के लिए एक संगठित सिंडिकेट तैयार किया था। इस नेटवर्क में चौकाघाट क्षेत्र के एक कारोबारी की मदद से साड़ी और होटल व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी शामिल किया गया जिससे नेटवर्क का विस्तार हुआ।
बैंक खातों और दस्तावेजों की जांच में मिले संकेत
पुलिस और विशेष जांच टीम द्वारा विभिन्न बैंक खातों और दस्तावेजों के विश्लेषण में यह सामने आया कि फरारी के दौरान शुभम जायसवाल को हवाला के जरिए लगातार आर्थिक सहायता मिलती रही। एक एओपी के माध्यम से उसने छह अंग्रेजी शराब की दुकानों के लाभांश में अपना हिस्सा तय कर रखा था। इसके अलावा कफ सिरप मामले में जेल में बंद अन्य आरोपियों के परिजनों के नाम पर भी देसी और कंपोजिट शराब की दुकानें ली गई थीं।
अदालत में पेशी नहीं हो सकी
मामले से जुड़े एक अन्य पहलू में लखनऊ जेल में बंद आरोपी अमित सिंह टाटा और अमित यादव की अदालत में पेशी नहीं हो सकी। दोनों को वारंट बी के तहत जिला जज की अदालत में पेश किया जाना था लेकिन पुलिस उन्हें प्रस्तुत नहीं कर पाई। कोतवाली थाना प्रभारी दयाशंकर सिंह ने बताया कि इस संबंध में अदालत में प्रार्थना पत्र दिया गया है।
जांच जारी और आगे और खुलासे संभव
पुलिस का मानना है कि कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी और उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क में अभी कई कड़ियां जुड़नी बाकी हैं। जांच एजेंसियां सप्लाई चेन वित्तीय लेनदेन और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार आगे की पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
पृष्ठभूमि और व्यापक महत्व
हाल के वर्षों में कफ सिरप तस्करी और हवाला नेटवर्क के मामले लगातार सामने आते रहे हैं जिनमें अवैध कमाई को वैध कारोबार के जरिए छिपाने की कोशिश की जाती है। वाराणसी का यह मामला भी उसी प्रवृत्ति को दर्शाता है जिसमें संगठित तरीके से आर्थिक अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है।
यह घटनाक्रम न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है बल्कि यह भी दर्शाता है कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मजबूत साक्ष्य और सतत जांच कितनी आवश्यक है। पुलिस की आगे की कार्रवाई पर अब सभी की नजर बनी हुई है।
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