वाराणसी के दालमंडी इलाके में हाल ही में हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद व्यापारियों और स्थानीय लोगों के बीच भय और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। विकास कार्य के नाम पर शुरू की गई इस कार्रवाई से वर्षों से कारोबार कर रहे दुकानदारों का भविष्य संकट में दिखाई दे रहा है। दालमंडी में चूड़ी की पुश्तैनी दुकान चलाने वाले नेशनल फुटबॉल खिलाड़ी राशिद अनवर ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर खेला है और उत्तर प्रदेश टीम के कप्तान भी रह चुके हैं, इसके बावजूद उन्हें कोई सरकारी नौकरी नहीं मिली। परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन उनके पिता और दादा की दुकान है, जो अब टूटने की कगार पर है। उन्होंने कहा कि अगर दुकान चली गई तो वह दिन दूर नहीं जब उन्हें परिवार के साथ गंगा घाट पर बैठकर भीख मांगनी पड़ेगी।
बारह जनवरी को दालमंडी में पहली बार बुलडोजर पहुंचने से इलाके में हड़कंप मच गया। नई सड़क और कपड़ा मार्केट से होते हुए बुलडोजर करीब सौ मीटर अंदर दालमंडी तक पहुंचा और एक मकान को गिराने की प्रक्रिया शुरू की गई। इससे पहले नई सड़क पर भी एक मकान गिराया गया था। दालमंडी में बुलडोजर को पहली बार देखकर दुकानदारों में आक्रोश और भय दोनों देखने को मिला। कई लोगों ने दबी आवाज में विरोध किया लेकिन कोई खुलकर सामने नहीं आ सका। कार्रवाई रुकने के बाद स्थानीय दुकानदारों ने अपनी चिंताएं साझा कीं और कहा कि विकास के इस मॉडल में उनकी रोजी रोटी छिनती नजर आ रही है।
नई सड़क कपड़ा मार्केट में सौ साल पुरानी दुकान के मालिक फिरोज सिद्दीकी ने कहा कि पहले कहा गया था कि दुकानदारों को मोहनसराय या लोहता में शिफ्ट किया जाएगा, लेकिन चौदह किलोमीटर दूर दुकान मिलने से ग्राहक मिलेंगे या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है। उन्होंने कहा कि दालमंडी सस्ता बाजार है जहां मिडिल क्लास और गरीब वर्ग अपनी जरूरत का सामान खरीदता है और यह बाजार खत्म होने से सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं लोगों को होगा। व्यापार मंडल अध्यक्ष फारुख खान और अन्य व्यापारियों ने भी कहा कि बुलडोजर की मौजूदगी से ग्राहक कम हो रहे हैं और दिन भर की दुकानदारी चौपट हो रही है। लोगों की नींद उड़ चुकी है और भविष्य को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है।
राशिद अनवर सहित कई दुकानदारों ने मांग की है कि सरकार इस परियोजना पर दोबारा विचार करे। उन्होंने कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकास स्वीकार नहीं किया जा सकता जिसमें हजारों परिवार बेरोजगार हो जाएं। दालमंडी को पूर्वांचल का दिल बताते हुए उन्होंने सांसद और देश के प्रधानमंत्री से अपील की कि इस मामले को गंभीरता से देखा जाए ताकि लोगों की आजीविका बच सके। दुकानदारों का कहना है कि भय का माहौल बनाकर नहीं बल्कि सहमति और संवाद के जरिए काम होना चाहिए, ताकि विकास के साथ साथ मानवता और सामाजिक संतुलन भी बना रहे।
वाराणसी: दालमंडी में बुलडोजर चला, व्यापारियों में भय और अनिश्चितता का माहौल

वाराणसी की दालमंडी में बुलडोजर कार्रवाई से व्यापारियों और स्थानीय लोगों में भय, आजीविका पर गहरा संकट मंडराया है।
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