आस्था का महासागर दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती में उमड़ा जनसैलाब मंत्रों और दीपों से सजी अद्भुत शाम
वाराणसी: धर्म, आस्था और आध्यात्म की प्राचीन नगरी वाराणसी एक बार फिर अपने उस दिव्य स्वरूप में नजर आई जिसके लिए उसे विश्वभर में जाना जाता है। शनिवार की संध्या दशाश्वमेध घाट पर आयोजित होने वाली मां गंगा की प्रसिद्ध आरती में श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। घाट की सीढ़ियों से लेकर गंगा तट तक हर ओर भक्ति और उत्साह का अद्भुत दृश्य दिखाई दिया। जैसे जैसे शाम ढली और आरती की तैयारियां शुरू हुईं वैसे ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती चली गई और पूरा क्षेत्र आस्था के रंग में डूब गया।
गंगा सेवा निधि की ओर से भव्य आयोजन
गंगा सेवा निधि द्वारा प्रतिदिन आयोजित की जाने वाली इस भव्य आरती का स्वरूप शनिवार को और भी विशेष नजर आया। सैकड़ों दीपों की रोशनी, वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की मधुर ध्वनि ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। आरती के प्रारंभ होते ही घाट पर उपस्थित श्रद्धालु हर हर महादेव और गंगे हरि के जयघोष के साथ भक्ति में लीन हो गए। कई लोग इस दिव्य क्षण को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए तो कई श्रद्धालु आंखें बंद कर मंत्रों के साथ जुड़ते दिखे।
समन्वित आरती ने बांधा समा
गंगा सेवा निधि के विद्वान पुरोहितों द्वारा एक साथ समन्वित ढंग से की गई आरती की प्रस्तुति ने पूरे आयोजन को आकर्षक बना दिया। बड़े दीपदान, धूप और शंखध्वनि के साथ जब आरती अपने चरम पर पहुंची तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो पूरा वातावरण दिव्यता में विलीन हो गया हो। गंगा की लहरों पर तैरते दीपों की कतारें मनमोहक दृश्य प्रस्तुत कर रही थीं और श्रद्धालु इस क्षण को देर तक निहारते रहे।
देश विदेश से पहुंचे पर्यटक
इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों के साथ साथ विदेशों से आए पर्यटकों की भी भारी भीड़ देखने को मिली। विदेशी पर्यटक इस आध्यात्मिक अनुभव से प्रभावित नजर आए और भारतीय संस्कृति की इस परंपरा की सराहना करते दिखे। कई पर्यटक घाट की सीढ़ियों पर बैठकर पूरे अनुष्ठान को ध्यानपूर्वक देखते रहे और इसकी भव्यता को अपने अनुभव में संजोते नजर आए।
प्रशासन की सतर्कता से व्यवस्थित आयोजन
बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस और अन्य संबंधित विभागों के कर्मी घाट पर तैनात रहे और भीड़ को नियंत्रित करते हुए आयोजन को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया गया। प्रशासन की सतर्कता के कारण श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
काशी की आत्मा है गंगा आरती
स्थानीय लोगों का मानना है कि गंगा आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि काशी की आत्मा है। यह आयोजन हर दिन हजारों लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है और मां गंगा के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का माध्यम बनता है। इसके साथ ही यह भारतीय संस्कृति और परंपराओं की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करता है जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करता है।
वर्षों पुरानी परंपरा आज भी कायम
गंगा सेवा निधि द्वारा वर्षों से निरंतर आयोजित की जा रही यह आरती आज वैश्विक स्तर पर काशी की पहचान बन चुकी है। हर शाम यहां उमड़ने वाली भीड़ इस बात का प्रमाण है कि आस्था और विश्वास की यह परंपरा समय के साथ और मजबूत होती जा रही है। दशाश्वमेध घाट की यह संध्या एक बार फिर यह संदेश देती नजर आई कि काशी में आस्था केवल देखी नहीं जाती बल्कि उसे हर दिन जिया जाता है।
LATEST NEWS