वाराणसी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का शुभारंभ, सीएम योगी बोले- ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का सशक्त उदाहरण
काशी और उज्जैन की सांस्कृतिक एकता का अनूठा संगम
वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी की पावन धरती पर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित भव्य महानाट्य का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो काशी और उज्जैन जैसी दो प्राचीन सांस्कृतिक नगरीयों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मां गंगा के तट पर स्थित काशी और महाकाल की नगरी उज्जैन का यह सांस्कृतिक मिलन भारतीय परंपरा की एकता और अखंडता को दर्शाता है। उन्होंने इस आयोजन के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, सांस्कृतिक विभाग के अधिकारियों और सभी कलाकारों का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया।
विक्रमादित्य और भर्तृहरि की परंपरा से जुड़ी काशी
सीएम योगी ने अपने संबोधन में काशी और उज्जैन के ऐतिहासिक व आध्यात्मिक संबंधों को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भगवान राम-लक्ष्मण और कृष्ण-बलराम की जोड़ी भारतीय परंपरा में आदर्श मानी जाती है, उसी प्रकार नाथ संप्रदाय में संत भर्तृहरि और सम्राट विक्रमादित्य की जोड़ी भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि जहां सम्राट विक्रमादित्य की कर्मभूमि उज्जैन रही, वहीं संत भर्तृहरि की साधनास्थली काशी के गंगा तट के पार स्थित है। चुनार का किला भी उनके तप और आशीर्वाद से जुड़ा हुआ है, जिसका संरक्षण और सौंदर्यीकरण उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कराया जा रहा है।
भारतीय कालगणना और परंपरा का वैश्विक महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन भारतीय कालगणना की नगरी है, जबकि काशी पंचांग निर्माण की प्रमुख भूमि रही है। इन दोनों परंपराओं का यह संगम भारत की प्राचीन ज्ञान प्रणाली को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय परंपरा, योग, आयुष और सांस्कृतिक विरासत को जिस प्रकार विश्व स्तर पर पहचान मिली है, वह अभूतपूर्व है। कुंभ जैसे आयोजनों ने भी दुनिया का ध्यान भारत की ओर आकर्षित किया है।
अयोध्या के पुनरुत्थान में विक्रमादित्य की भूमिका
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में अयोध्या नगरी के पुनरुत्थान में सम्राट विक्रमादित्य के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि लगभग 2000 वर्ष पूर्व अयोध्या की खोज और वहां मंदिर निर्माण का कार्य सम्राट विक्रमादित्य ने ही कराया था।
उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के पुत्र लव के बाद अयोध्या में मंदिर निर्माण का श्रेय भी विक्रमादित्य को जाता है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण और विकास कार्य किए जा रहे हैं।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगा महानाट्य
मुख्यमंत्री ने इस महानाट्य को केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य का जीवन पराक्रम, न्याय, दानशीलता और सुशासन का प्रतीक रहा है, जिसे इस नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से युवाओं तक पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कला, नाटक और सिनेमा समाज को दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। कलाकारों द्वारा निभाए गए पात्र युवाओं के लिए प्रेरणा बनते हैं और उनके व्यक्तित्व निर्माण में योगदान देते हैं।
सकारात्मक सिनेमा की जरूरत पर जोर
सीएम योगी ने सिनेमा जगत को भी संदेश देते हुए कहा कि सकारात्मक और प्रेरणादायक पात्रों को ही नायक के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब फिल्मों में नकारात्मक पात्रों को महिमामंडित किया गया, जिसका असर समाज पर पड़ा और एक पीढ़ी भ्रमित हो गई।
उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि सिनेमा और कला के माध्यम से समाज को सही दिशा दी जाए और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को बढ़ावा दिया जाए।
भारतीय संस्कृति को पुनर्जीवित करने का प्रयास
मुख्यमंत्री ने इस नाट्य रूपांतरण को भारतीय संस्कृति के पुनर्जीवन का एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि इस मंचन के माध्यम से भारतीय परंपरा, न्याय व्यवस्था, सुशासन, पराक्रम और दानशीलता जैसे मूल्यों को पुनः जीवंत किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन न केवल सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का कार्य भी करते हैं।
आयोजन से बढ़ेगा सांस्कृतिक पर्यटन
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इस तरह के आयोजन से काशी और उज्जैन जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक शहरों के बीच सहयोग और मजबूत होगा। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और देश-विदेश से अधिक लोग भारतीय संस्कृति को करीब से जान पाएंगे।
अंत में उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी कलाकारों, आयोजकों और मध्य प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास भारत की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होंगे।
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