वाराणसी: प्रधानमंत्री मोदी रखेंगे आधारशिला, गंगा पर बनने वाला सिग्नेचर ब्रिज बदलेगा भविष्य

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वाराणसी में गंगा नदी पर बनने वाला देश का सबसे बड़ा सिग्नेचर ब्रिज

वाराणसी: अविरल गंगा, प्राचीन काशी और आधुनिक भारत-इन तीनों का संगम जल्द ही एक अद्वितीय रूप में नजर आएगा। वाराणसी को देश का सबसे भव्य और अत्याधुनिक सिग्नेचर ब्रिज मिलने जा रहा है, जो न सिर्फ यातायात का नया मार्ग बनेगा बल्कि काशी की पहचान को वैश्विक स्तर पर और मजबूत करेगा। गंगा नदी पर मलवीय पुल के समीप प्रस्तावित इस बहुप्रतीक्षित सिग्नेचर ब्रिज के निर्माण की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और अगले महीने फरवरी से इसका निर्माण कार्य औपचारिक रूप से शुरू होने जा रहा है।

करीब एक दशक से जिस परियोजना का इंतजार किया जा रहा था, वह अब साकार होने वाली है। ब्रिज की डिजाइन पूरी तरह से फाइनल हो चुकी है और रेल मंत्रालय द्वारा निर्माण एजेंसी के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। अधिकारियों के अनुसार फरवरी के पहले सप्ताह में निर्माण कंपनी का चयन कर लिया जाएगा, जिसके तुरंत बाद जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया जाएगा। सभी औपचारिकताओं को रेल मंत्रालय के नियमों के अनुरूप अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए।

इस ऐतिहासिक परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी आधारशिला स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रखेंगे। काशी से उनका विशेष जुड़ाव रहा है और विकास की इस नई कड़ी को वह स्वयं प्रारंभ करेंगे। यही नहीं, इसी कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री वाराणसी नगर निगम के प्रस्तावित नए सदन की आधारशिला भी रख सकते हैं। यह आयोजन काशी के विकास इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ने वाला होगा।

करीब तीन वर्षों में बनकर तैयार होने वाला यह सिग्नेचर ब्रिज मलवीय पुल से लगभग 50 मीटर की दूरी पर, उसके समानांतर बनाया जाएगा। यह रेल-रोड ब्रिज नमो घाट से पड़ाव के बीच स्थित होगा, जिससे वाराणसी के दोनों छोरों के बीच संपर्क और अधिक सशक्त होगा। ब्रिज का निर्माण न सिर्फ शहर की ट्रैफिक समस्या को कम करेगा, बल्कि पूर्वांचल और बिहार की ओर जाने वाले मार्गों को भी नई गति देगा।

लगभग 2600 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह ब्रिज 1074 मीटर लंबा होगा। इसकी संरचना इसे देश के सबसे बड़े और आधुनिक सिग्नेचर ब्रिजों में शामिल करेगी। ब्रिज के निचले हिस्से में चार लेन का रेलवे ट्रैक होगा, जबकि ऊपरी हिस्से में छह लेन की चौड़ी और अत्याधुनिक सड़क बनाई जाएगी। इससे रेल और सड़क दोनों यातायात को एक साथ सुचारू रूप से संचालित किया जा सकेगा। निर्माण में नई और अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिसके तहत गंगा नदी के बीच आठ विशाल और मजबूत पिलर खड़े किए जाएंगे, जो इस भव्य संरचना की मजबूती की पहचान होंगे।

इस सिग्नेचर ब्रिज के साथ-साथ वाराणसी रेलवे स्टेशन और दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन को जोड़ने के लिए एक नया रेलवे ट्रैक भी बनाया जाएगा। इससे न सिर्फ ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि यात्रियों को भी बड़ी राहत मिलेगी। ब्रिज निर्माण और उससे जुड़े सभी कार्यों की निगरानी उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की विशेष रूप से गठित टीम द्वारा की जाएगी, ताकि गुणवत्ता, सुरक्षा और समयसीमा का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जा सके।

गौरतलब है कि इसी वर्ष 8 नवंबर को काशी दौरे पर आए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों के साथ मलवीय पुल के पास प्रस्तावित सिग्नेचर ब्रिज स्थल का निरीक्षण किया था। उस दौरान उन्होंने इसे देश का सबसे बड़ा सिग्नेचर ब्रिज बताते हुए कहा था कि यह परियोजना वाराणसी को एक नई पहचान देगी और आने वाले वर्षों में यह ब्रिज विकास का प्रतीक बनेगा।

सिग्नेचर ब्रिज के निर्माण से वाराणसी को न सिर्फ यातायात के क्षेत्र में बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि यह ब्रिज पर्यटन, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नया आयाम देगा। गंगा के ऊपर खड़ा यह भव्य ढांचा आधुनिक इंजीनियरिंग और प्राचीन काशी की आत्मा का अद्भुत संगम होगा—जो आने वाली पीढ़ियों के लिए विकास, विरासत और विश्वास की एक अविस्मरणीय मिसाल बनेगा।